स्लम-डॉग मिलियनेयर – एक समीक्षा

मुंबई के स्लम-जीवन पर केन्द्रित स्लमडॉग मिलियनेयर देखकर हॉल से निकलने के बाद अनुभूतियाँ मिश्रित थीं। फिल्म में मुंबई के झोपटपट्टी जीवन की जो छवि दिखाई गई है, उसे देख कर काफी बेचैनी लगी। अमरीकी सिनेदर्शकों से भरे हॉल में ऐसा लगा जैसे हमें पश्चिम वालों के सामने नंगा किया जा रहा है। फिल्म के […]

मिक्स्ड-डबल्ज़ और लास्ट-नेम

मिक्स्ड डबल्ज़ का तो मैं ने नाम भी नहीं सुना था, पर डीवीडी के आवरण पर कोंकणा सेनशर्मा का नाम देख कर उठा लाया। पेज थ्री और मिस्टर ऐण्ड मिसेज़ अइयर देखने के बाद कोंकणा की एक और फिल्म देखने को मिली। कोंकणा ने नाराज़ नहीं किया। बॉलीवुड में आजकल अलग ढ़र्रे की कई फिल्में […]

परिणीता

परिणीता को रिलीज़ हुए कुछ महीने हो गए हैं, पर मुझे अभी देखने का मौका मिला। देख कर इतनी अच्छी लगी कि यहाँ लिखने का मन हुआ। न तो मैंने शरतचन्द्र का मूल उपन्यास पढ़ा है, और न ही मीनाकुमारी वाली पुरानी “परिणीता” देखी है (देखी भी होगी तो याद नहीं)। इस कारण उत्सुकता के […]

ये वर्ल्ड है ना वर्ल्ड..

ये वर्ल्ड है ना वर्ल्ड, इस में दो तरह के लोग रहते हैं, एक वह जिन्होंने बंटी और बबली नहीं देखी, और दूसरे वह जिन्होंने देखी है। आज हम “दूसरे” लोगों में शामिल हुए। कई दिनों से पड़ौस की देसी वीडियो दुकान के चक्कर लग रहे थे, अब जा कर मिली है। फिल्म के गाने […]

कृष्ण और कृष्ण

आज हम भी “ब्लैक” देख कर आए, और सोचा पहले आशीष जी को धन्यवाद दें — फिल्म को सुझाने के लिए, और इस सुझाव के लिए कि फिल्म को सिनेमा हॉल में ही देखें। हमारा भी यही सुझाव है कि फिल्म को बिलकुल मिस न किया जाए। नाम को देख कर तो लग रहा था […]