Anugunj
विवाह के विषय में कुछ सुभाषित (पुरुषों की नज़र से)
मैं ने सुना है कि प्रेम रसायनशास्त्र की तरह है। शायद यही वजह है मेरी पत्नी मुझे विषैले पदार्थ के समान समझती है।
- डेविड बिसोनेट
कोई व्यक्ति यदि आप की पत्नी को चुरा लेता है, तो उस से बदला लेने का सब से बेहतर तरीका है कि [...]
बहुत ही टेढ़ा विषय दिया है संजय ने। जितना इस विषय पर विवाद होने का डर रहता है, उतना शायद ही किसी और विषय पर रहता हो। अभी तक इसीलिए इस तरह के विषय हिन्दी चिट्ठाजगत में नहीं उठाए जा रहे थे। पर यह प्रसन्नता की ही बात है कि अब हिन्दी चिट्ठाजगत भी वयस्क [...]
भारतीय मुद्रा बदलने का रजनीश का सुझाव विचारणीय तो है, पर मेरे विचार में इस का उत्तर है — नहीं। अर्थशास्त्र पर अपनी पकड़ वैसे बहुत कमज़ोर है, इसलिए डिस्क्लेमर पहले सुना दूँ — इस विषय पर व्यक्त किए गए मेरे विचार पूर्ण रूप से व्यक्तिगत और अव्यवसायिक हैं, और पढ़ने वाला किसी भी नतीजे [...]
Continue reading about अनुगूँज 17: क्या भारतीय मुद्रा बदल जानी चाहिए?
स्वामी जी बढ़िया रहे। इस विषय पर उन की प्रविष्टि पहले आई, और अनुगूँज बाद में घोषित हुई। यह तो वही हुआ कि जो आप ने पहले ही पढ़ा है उसी पर आप को डिग्री दी जाएगी। फिर खानापूर्ति के लिए एक और प्रविष्टि लिख दी, जिस पर अनूप भाई ने कंजूसी का आरोप सही [...]
Continue reading about अनुगूंज १६: (अति) आदर्शवादी संस्कार सही या गलत?
यह चर्चा आरंभ करने के लिए आलोक का धन्यवाद।
सब से पहली बात यह समझने की है कि इंटरनेट हमारे समाज का ही आईना है। हमारे समाज का एक अधूरा आईना, जिस में हम केवल समाज के पढ़े-लिखे, “आधुनिक”, मध्यम-आय (और ऊपर) और मध्यम-आयु (और नीचे) वर्ग का प्रतिबिम्ब देख सकते हैं। समाज के इस वर्ग [...]
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