चुटकुला-गूँज + सुभाषित-सहस्र

विवाह के विषय में कुछ सुभाषित (पुरुषों की नज़र से) मैं ने सुना है कि प्रेम रसायनशास्त्र की तरह है। शायद यही वजह है मेरी पत्नी मुझे विषैले पदार्थ के समान समझती है।    – डेविड बिसोनेट कोई व्यक्ति यदि आप की पत्नी को चुरा लेता है, तो उस से बदला लेने का सब से बेहतर […]

एक नास्तिक हिन्दू

(Update: यह लेख 14 अप्रैल 2006 को अनुगूंज शृंखला के अन्तर्गत लिखा गया था। इस शृंखला में सभी चिट्ठाकार एक ही विषय पर लेख लिखते थे। इस लेख में दी गई कई कड़ियाँ अब काम नहीं कर रही हैं।) बहुत ही टेढ़ा विषय दिया है

अनुगूँज 17: क्या भारतीय मुद्रा बदल जानी चाहिए?

भारतीय मुद्रा बदलने का रजनीश का सुझाव विचारणीय तो है, पर मेरे विचार में इस का उत्तर है — नहीं। अर्थशास्त्र पर अपनी पकड़ वैसे बहुत कमज़ोर है, इसलिए डिस्क्लेमर पहले सुना दूँ — इस विषय पर व्यक्‍त किए गए मेरे विचार पूर्ण रूप से व्यक्‍तिगत और अव्यवसायिक हैं, और पढ़ने वाला किसी भी नतीजे […]

अनुगूंज १६: (अति) आदर्शवादी संस्कार सही या गलत?

स्वामी जी बढ़िया रहे। इस विषय पर उन की प्रविष्टि पहले आई, और अनुगूँज बाद में घोषित हुई। यह तो वही हुआ कि जो आप ने पहले ही पढ़ा है उसी पर आप को डिग्री दी जाएगी। फिर खानापूर्ति के लिए एक और प्रविष्टि लिख दी, जिस पर अनूप भाई ने कंजूसी का आरोप सही […]

हिन्दी जाल जगत – आगे क्या?

यह चर्चा आरंभ करने के लिए आलोक का धन्यवाद। सब से पहली बात यह समझने की है कि इंटरनेट हमारे समाज का ही आईना है। हमारे समाज का एक अधूरा आईना, जिस में हम केवल समाज के पढ़े-लिखे, “आधुनिक”, मध्यम-आय (और ऊपर) और मध्यम-आयु (और नीचे) वर्ग का प्रतिबिम्ब देख सकते हैं। समाज के इस […]