देस परदेस

इस सप्ताह पंकज जी के भूत ने अक्षरग्राम पर एक नया शोशा छोड़ा था — मानसिक लुच्चेपन का। बातों में फुरसतिया अनूप जी ने महेश भट्ट की पूजा का ज़िक्र किया। भई बॉलीवुड तो वैसे ही अपने आप में अलग संस्कृति है। इस बीच देसी मूल्यों के पश्चिम में धुन्धला जाने और इससे माता-पिता-सन्तान की […]

राम राम

राम राम गाँव वालो। पडौस में नया आया हूँ। जब तक घर ठीक से बसा लूँ, गुड़-चीनी की ज़रूरत पड़े तो दे देना भाई लोगो। कई दिनों से इस ब्लाग-नगरी की गलियों के चक्कर लगा रहा हूँ। बड़े बड़े दिग्गज बैठे हैं डेरा जमाए। खैर इधर-उधर की हम भी हाँक ही लेंगे। अपना अन्दाज़े-बयाँ और […]