रमण कौल | 9 अप्रैल, 2010

आज हफिंगटन पोस्ट में पिछले नवंबर में हुए पाकिस्तान फैशन वीक से यह तस्वीर छपी है। पोस्ट नें लेख का शीर्षक दिया है “वाट द….?”। सच है, तस्वीर अपनी कहानी खुद कहती है, शब्दों की अधिक आवश्यकता नहीं है। मेरा बस यह कहना है… यह फैशन वीक है, या फैशन वीक है?

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रमण कौल | 3 अप्रैल, 2010

फरवरी में भारत यात्रा के दौरान कार्यक्रम बना श्रीलंका घूमने का। श्रीलंका भ्रमण का अनुभव बहुत ही बढ़िया रहा। विस्तार से जल्दी लिखूँगा, फिल्हाल यह लघु-चित्र-प्रविष्टि। वहाँ, छाते का एक अनूठा प्रयोग देखने को मिला। अक्सर प्रेमी युगल छाता साथ लेकर चलते हैं — अकस्मात वर्षा हो जाए, उसमें तो काम आ ही जाएगा, पर [...]

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रमण कौल | 1 अप्रैल, 2010

आज सुबह सुबह गूगल खोला तो देखा गूगल के स्थान पर नाम है “टोपीका”। उसके नीचे लिंक था “हमारे नए नाम के बारे में जानें“। गूगल ब्लॉग पर बताया गया है कि गूगल ने अपना नाम क्यों बदला।

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रमण कौल | 3 जनवरी, 2010

कई साल पहले (2004 में) जब यह चिट्ठा शुरू हुआ तो यही कोई 20 चिट्ठाकार थे हिन्दी चिट्ठा जगत में — पाठकों की संख्या भी एकाध सैंकड़े से अधिक नहीं रही होगी। इन्तज़ार रहता था कि कोई लिखे तो हम पढ़ें और टिप्पणी करें। आजकी स्थिति, जब हज़ारों की संख्या में हिन्दी चिट्ठाकार हैं और [...]

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मैं आजकल राजीव श्रीनिवासन के चिट्ठे का नियमित पाठक बन गया हूँ। राजीव एक 23 वर्षीय युवा चिट्ठाकार हैं – पर इस चिट्ठाकार के विषय में विशेष यह है कि यह जिस जगह से अपना ब्लॉग लिख रहे हैं, वह आजकल विश्व की सब से जोखिम भरी जगहों में से एक है। जी हाँ, [...]

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रमण कौल | 2 जनवरी, 2010

इस चिट्ठे को पढ़ने वाले सभी दोस्तों को नया साल मुबारक। इस दिन पर इस चिट्ठे पर बहुत दिनों बाद कुछ बड़बड़।
आज एक नई दहाई शुरु हुई है, जो उम्मीद है दुनिया के लिए कुछ खुश खबर ले कर आएगी। इस सदी की पहली दहाई में आतंक का ही बोलबाला रहा – 9-11, 26-11, 7-7, [...]

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रमण कौल | 19 जुलाई, 2009

यह समाचार रोचक है। आज सुबह एमएसएनबीसी पर देखा, तो सोचा आप के साथ शेयर करूँ। इसी बहाने कई दिन बाद कुछ लिखा जाएगा। तो हुआ यूँ कि केली हिल्डेब्राँड नाम की एक युवती फेसबुक पर थी। उसने सोचा, जैसा कि हम सब सोचते हैं, कि अपने नाम पर खोज की जाए। अब यह नाम [...]

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140 अक्षरों की संदेश पत्रिका, यानी ट्विट्टर पर आप कितने सक्रिय हैं, इस के तीन मुख्य मापदंड हैं – आप कितना लिख रहे हैं (अपडेट्स या लेख संख्या), आप कितने लोगों का लिखा पढ़ रहे हैं (फॉलोइंग या पठन संख्या) और आप को कितने लोग पढ़ रहे हैं (फॉलोवर्स या पाठक संख्या)। पहली दो संख्याएँ [...]

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रमण कौल | 1 फरवरी, 2009

ज़िन्दगी तो बेवफ़ा है एक दिन ठुकराएगी
मौत महबूबा है अपने साथ ले कर जाएगी।
यदि किसी को मालूम हो कि उस का जीवन कुछ दिन, सप्ताह, महीने, में समाप्त होने वाला है, तो उस दशा में उस को कैसा महसूस होता होगा? हाल में कुछ इस तरह के व्यक्तियों के बारे में पढ़ने-सुनने-देखने को मिला। और [...]

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रमण कौल | 28 जनवरी, 2009

आज बीबीसी की वेबसाइट पर समाचार देखा कि स्पेन की पुलिस ने धोखेबाज़ों के एक गिरोह को 420 मिलियन पाउंड की धोखाधड़ी के लिए गिरफ्तार किया है। यूँ तो इस धनराशि को डॉलर, यूरो आदि में परिवर्तित किया जाए तो कुछ और ही अंक सामने आएँगे, पर फिर भी 420 अंक के संयोग को अनदेखा [...]

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