विदेश

admin on July 19, 2009

यह समाचार रोचक है। आज सुबह एमएसएनबीसी पर देखा, तो सोचा आप के साथ शेयर करूँ। इसी बहाने कई दिन बाद कुछ लिखा जाएगा। तो हुआ यूँ कि केली हिल्डेब्राँड नाम की एक युवती फेसबुक पर थी। उसने सोचा, जैसा कि हम सब सोचते हैं, कि अपने नाम पर खोज की जाए। अब यह नाम […]

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ऐसा लगता है कि अमरीका में डेमोक्रेटिक पार्टी की लिबरल (उदारवादी) विचारधारा की सरकार बनने के बाद दक्षिणपन्थी कुछ अधिक ही सक्रिय हो गए हैं। पिछले सप्ताह एक गर्भपात कराने वाले डॉक्टर का कत्ल होने के बाद आज एक और नस्लवादी घटना हुई। वाशिंगटन डीसी के हॉलोकास्ट म्यूज़ियम, जिस में यहूदियों पर हुए अत्याचारों को […]

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मुंबई के स्लम-जीवन पर केन्द्रित स्लमडॉग मिलियनेयर देखकर हॉल से निकलने के बाद अनुभूतियाँ मिश्रित थीं। फिल्म में मुंबई के झोपटपट्टी जीवन की जो छवि दिखाई गई है, उसे देख कर काफी बेचैनी लगी। अमरीकी सिनेदर्शकों से भरे हॉल में ऐसा लगा जैसे हमें पश्चिम वालों के सामने नंगा किया जा रहा है। फिल्म के […]

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[बहुत समय बाद लिख रहा हूँ। पुराने साथियों तथा पाठकों से क्षमा याचना सहित।] अगले मंगल को नॉर्थ कैरोलाइना में डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव होने वाले हैं, यानी अमरीकी चुनाव के लंबे खिंचते सेमी-फाइनल का एक और मुकाबला। मालूम नहीं इस बार भी इस बात का फैसला हो पाएगा या नहीं कि हिलरी क्लिंटन और बराक […]

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admin on September 12, 2007

कल 11 सितंबर थी, और ऐतिहासिक 11 सितंबर की छठी बरसी। कल जितना समय रेडियो सुना, अधिकांश कार्यक्रम इसी घटना से संबन्धित थे। कई कार्यक्रम रोचक लगे – जैसे कि वर्जीनिया की दारुल-नूर मस्जिद के युवा इमाम की कहानी, जिस के लिए अमरीकी मुसलमानों को शान्ति का पाठ पढ़ाना एक चुनोती है, या एक पाकिस्तानी […]

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इंटरनेट पर, किसे मालूम है कि आप एक कुत्ता नहीं हो। या फिर यह कि आप फिर वही कुत्ता नहीं हो। यदि आप को मेरा अनुवाद समझ में नहीं आया, तो यह रहा टी.वी. रमण रामन का मूल कथन On the Internet, no one knows you aren’t a dog! Nor even if you are still […]

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admin on November 6, 2006

विश्व की लार्जेस्ट डेमोक्रेसी में चुनाव हो रहे हों. या रिचेस्ट डेमोक्रेसी में, हम लोगों की रुचि तो बनी रहती है — वोट दे सकें या न दे सकें। कल सारे अमरीका में चुनाव हो रहे हैं, और मैं ने सोचा इस के विषय में कुछ सूचनाएँ स्वयं भी मालूम कर लूँ और आप से […]

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admin on October 31, 2006

रविवार की सुबह उठते ही हम ने अपनी घड़ियों को एक घंटा पीछे किया। यह अच्छी खासी मेहनत है — कलाई की घड़ियाँ, दीवारों की घड़ियाँ, वीसीआर, माइक्रोवेव, थर्मोस्टैट, स्टीरियो, आदि यदि सब का समय ठीक करने लगें तो दर्जन भर तो हो ही जाती हैं, इसलिए काम अभी पूरा नहीं हुआ। सौभाग्य से कंप्यूटर, […]

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