हिन्दी

मित्रो, मैं आज बहुत समय बाद लिख रहा हूँ और आशा है कि आगे से नियमित लिखूँगा। ऊपर लिखे इस वाक्य में आप को कुछ अटपटा लगा? मुझे यकीन है कि कुछ लोगों को “मित्रो” शब्द आम भाषा से विपरीत लगा होगा, क्योंकि उन्हें संबोधन में भी “मित्रों” लिखने कहने की आदत है। दरअसल यह […]

Continue reading about सवाल बहुवचन संबोधन में अनुस्वार का

गूगल ने उर्दू के शौकीनों के लिए बहुत ही नायाब टूल उपलब्ध करा दिया है। पिछली 13 मई से गूगल अनुवादक में उर्दू जोड़ दी गई है, यानी आप अब उर्दू से, या उर्दू में, दर्जनों भाषाओं का अनुवाद कर सकते हैं। गूगल ट्रान्सलेट पर जाइए, “Translate from” में “Urdu ALPHA” चुनिए, “Translate to” में […]

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[आज जुलाई का अन्तिम दिन है। यदि आज मैं यह प्रविष्टि नहीं लिखता तो इस चिट्ठे की पौने तीन वर्ष की आयु में पहला महीना ऐसा चला जाता जिस में कुछ भी न लिखा गया हो। अपने चिट्ठे को सुप्तावस्था से बाहर लाने की कोशिश है यह प्रविष्टि, जो मैं ने कुछ समय पहले आरंभ […]

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आप साइबर कैफे में, लाइब्रेरी में, दफ्तर में या किसी ऐसे कंप्यूटर पर काम कर रहे हैं जहाँ आप को कुछ भी इन्स्टाल करने की आज़ादी नहीं है, और आप हिन्दी लिखना चाहते हैं। ऐसे में यूनिनागरी और हग जैसे ऑनलाइन टाइपराइटर बहुत काम आते हैं। मेरी साइट पर यूनिनागरी पिछले दो वर्षों से अधिक […]

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admin on December 17, 2006

नुक़्ताचीं है ग़मे दिल उस को सुनाए न बने क्या बने बात जहाँ बात बनाए न बने। जो लोग उर्दू शायरी के शौकीन नहीं हैं, उन के लिए ग़ालिब के इस शेर की थोड़ी सी व्याख्या (मेरी समझ से) – नुक़्ताचीं = नुक़्ताचीनी या आलोचना करने वाला। वह नुक्ताचीं है (हर बात पर आलोचना करता […]

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विवाह के विषय में कुछ सुभाषित (पुरुषों की नज़र से) मैं ने सुना है कि प्रेम रसायनशास्त्र की तरह है। शायद यही वजह है मेरी पत्नी मुझे विषैले पदार्थ के समान समझती है।    – डेविड बिसोनेट कोई व्यक्ति यदि आप की पत्नी को चुरा लेता है, तो उस से बदला लेने का सब से बेहतर […]

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अभी हाल में प्रतीक का पोस्ट पढ़ा सही हिन्दी (broken link) लिखने पर। बहुत ही सटीक और सामयिक लेख था, और इस विषय पर मैं भी बहुत समय से लिखना चाहता था। अब प्रतीक की बात को ही आगे बढ़ाता हूँ। हालाँकि हम सभी चिट्ठाकार हिन्दी के दीवाने हैं, हम में से अधिकांश लोगों ने […]

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admin on May 29, 2006

सुदर्शन लिखित हार की जीत मेरी सर्वाधिक प्रिय कहानियों में से है। किस कारणवश आज इस कहानी की याद आ गई, यह अगली पोस्ट में बताऊँगा। अभी प्रस्तुत है यह कहानी, सधन्यवाद भारत दर्शन*, जहाँ यह कहानी शुषा मुद्रलिपि में मिली, और रजनीश मंगला जिनके चमत्कारी टूल ने इसे यूनिकोड में परिवर्तित किया। * अपडेट 27 […]

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कड़ी : प्रेमचन्द की कहानियाँ सी-डॅक की साइट पर अनेकों ई-पुस्तकें उपलब्ध हैं। इन में से मेरी मनपसन्द हैं मुंशी प्रेमचन्द की कहानियों वाली ई-पुस्तकें। यह ई-पुस्तकें वर्ड फाइलों के रूप में उपलब्ध हैं और हर फाइल में ३ से ६ कहानियाँ हैं। सीडॅक ने यह बहुत उत्कृष्ट काम किया है। पर इन्हें पढ़ने और खोजने […]

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admin on February 27, 2005

अगर तुम आ जाते एक बार काँटे फिर न पीड़ा देते आँसू भी मोती बन जाते तेरी बाहें जो बन जाती मेरे गले का हार अगर तुम आ जाते एक बार जीवन का सच अतिसय सुन्दर पा जाते हम दोनों मिलकर उजड़े दिलों में छा जाती मदमाती नई बहार अगर तुम आ जाते एक बार […]

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