Archive for the 'इधर उधर की' Category

मुक्का बला मुक्का बला

प्रभु देवा के डान्स वाला गाना तो आप ने देखा सुना ही होगा, “मुकाबला मुकाबला”। उस का तमिल वर्जन भी शायद सुना होगा। पर तमिल का अंग्रेज़ी वर्जन नहीं सुना होगा। देखने-सुनने लायक है, पेश है :

यदि आप ने कल की पहेली नहीं पढ़ी तो पहले उसे पढ़ें। नीरज रोहिल्ला जी ने सही पकड़ा, वही हल था।
तो हुआ यूँ कि कंप्यूटर जिस के हाथ में था, उसी के पास इस ज्योतिष विद्या की कुंजी थी। यानी, हमारी बड़ी बिटिया हमें बुद्धू बना रही थी। पर विद्या काम की है, इस लिए [...]

पिछले रविवार मैं छुट्टी के मूड में सुस्ता रहा था कि मेरी छोटी बिटिया मेरे पास आई। बोली, “पापा कमाल हो गया, आप ऊपर आ कर देखिए कंप्यूटर पर क्या हो रहा है।” मैं उस की रोज़ की घिसी-पिटी अमरीकी कार्टूनों की यूट्यूब वीडियो देख देख कर तंग आ गया हूँ, इसलिए मैं ने टाल [...]

[बहुत समय बाद लिख रहा हूँ। पुराने साथियों तथा पाठकों से क्षमा याचना सहित।]
अगले मंगल को नॉर्थ कैरोलाइना में डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव होने वाले हैं, यानी अमरीकी चुनाव के लंबे खिंचते सेमी-फाइनल का एक और मुकाबला। मालूम नहीं इस बार भी इस बात का फैसला हो पाएगा या नहीं कि हिलरी क्लिंटन और बराक ओबामा [...]

टैक्सी नंबर 9-11

कल 11 सितंबर थी, और ऐतिहासिक 11 सितंबर की छठी बरसी। कल जितना समय रेडियो सुना, अधिकांश कार्यक्रम इसी घटना से संबन्धित थे। कई कार्यक्रम रोचक लगे - जैसे कि वर्जीनिया की दारुल-नूर मस्जिद के युवा इमाम की कहानी, जिस के लिए अमरीकी मुसलमानों को शान्ति का पाठ पढ़ाना एक चुनोती है, या एक पाकिस्तानी [...]

मिक्स्ड डबल्ज़ का तो मैं ने नाम भी नहीं सुना था, पर डीवीडी के आवरण पर कोंकणा सेनशर्मा का नाम देख कर उठा लाया। पेज थ्री और मिस्टर ऐण्ड मिसेज़ अइयर देखने के बाद कोंकणा की एक और फिल्म देखने को मिली। कोंकणा ने नाराज़ नहीं किया।
बॉलीवुड में आजकल अलग ढ़र्रे की कई फिल्में [...]

गूगल कैलेंडर

आ गया, आ गया, जिस का इन्तज़ार था। याहू में काफी पहले से कैलेंडर था, बाद में MSN ने भी जोड़ दिया था। पर जब से हम ने याहू और MSN में खोजना बन्द कर दिया था, और माइ-याहू और माइ-MSN पर नियमित रूप से जाना छोड़ दिया था तब से गूगल में कैलेंडर की [...]

परदेस का तोहफा

बेचारे शुऐब परेशान हैं। दुबई से भारत जा रहे हैं, और रिश्तेदारों की माँगें हैं — यह ले कर आओ वह ले कर आओ। शुऐब कहते हैं
चंद लोग दुबई को जन्नत समझते हैं कि यहां पैसों की बारिश होती है। यहां लोग मुम्बई कि तरह रात दिन पसीना बहाते हैं तब जाकर थोडे पैसे मिलते हैं। 
इस बात [...]

परसों जीतू की शादी की सालगिरह थी। एक बार फिर मुबारकबाद। वैसे पतियों पर अक्सर यह इलज़ाम लगाया जाता है कि उन्हें अपनी शादी की सालगिरह याद नहीं रहती। लेकिन एक चुटकुला हाल में किसी ने भेजा, जिस में पति को शादी की बीसवीं सालगिरह भी याद थी। उस का हिन्दी अनुवाद कर के बता [...]

बंटी और बबली फिल्म में एक गाना है
छोटे छोटे शहरों से, खाली भोर दुपहरों से, हम तो झोला उठा के चले।
बारिश कम कम लगती है, नदिया मद्धम लगती है, हम समन्दर के अन्दर चले।
पिछले दिनों लगता है बड़ा शहर मुम्बई वास्तव में समन्दर के अन्दर चला गया। मुम्बई और आसपास के इलाकों में ४३० [...]






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