भारत

admin on December 14, 2013

Read this article in English बस यही अपराध मैं हर बार करता हूँ आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ। 1861 में अंग्रेज़ों की बनाई IPC धारा 377 के अनुसार आदमी-आदमी के प्यार को अपराध करार दिया गया था। आज डेढ़ सौ साल बाद हम इस धारा को हटाने के प्रयासों में असफल हो गए […]

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कुछ दिन पहले अपने अंग्रेज़ी ब्लॉग पर मैं ने कश्मीर पर एक लेख लिखा जो कई दिनों से मन में उबल रहा था, पर कश्मीर में हो रही हाल की घटनाओं के कारण उफन पड़ा। इस लेख को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली — कुछ टिप्पणियाँ अच्छी, कुछ बुरी। फेसबुक और ट्विटर पर सैंकड़ों लोगों ने […]

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admin on August 15, 2009

बासठवें स्वतन्त्रता दिवस पर सभी भारतवासियों को शुभकामनाएँ। इस अवसर पर एक बार फिर पढ़िए आज से चार वर्ष पहले लिखी यह पोस्ट जिस में मिले सुर मेरा तुम्हारा के हर भाषा के बोल संकलित किए गए थे। आज एक और छोटी सी सूचना, समय-लाइव के सौजन्य से

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श्रीनगर, कश्मीर के अंग्रेज़ी अखबार ग्रेटर कश्मीर का ई-पेपर संस्करण देख रहा था तो मुख्यपृष्ठ पर यह रोचक उर्दू विज्ञापन दिखा। विज्ञापन को पढ़िए, स्वयं समझ जाएँगे कि क्या रोचक है इस में। यदि उर्दू नहीं आती तो नीचे हिन्दी अनुवाद दिया हुआ है।

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वरुण गांधी प्रकरण टीवी पर तो छाया ही हुआ है, देसी इंटरनेट पर भी हाल में इस प्रकरण पर जितना कहा जा रहा है, उस के और उदाहरण कम हैं। चुनाव का समय है भई, यह तो होगा ही। पर आश्चर्य की बात यह है कि वरुण गांधी की वीडियो की सच्चाई पर कोई उंगली […]

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मुंबई के स्लम-जीवन पर केन्द्रित स्लमडॉग मिलियनेयर देखकर हॉल से निकलने के बाद अनुभूतियाँ मिश्रित थीं। फिल्म में मुंबई के झोपटपट्टी जीवन की जो छवि दिखाई गई है, उसे देख कर काफी बेचैनी लगी। अमरीकी सिनेदर्शकों से भरे हॉल में ऐसा लगा जैसे हमें पश्चिम वालों के सामने नंगा किया जा रहा है। फिल्म के […]

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मोहल्ले में आजकल रोज़ की तानेबाज़ी चल रहा है। लगता है मोहल्ले वालों को सकारात्मक कुछ नहीं दिखता। संगीत में विभिन्न धर्मों के लोग हैं, यह तो सदियों पुरानी बात है, इस के लिए सुदर्शन को ताना। उर्दू बोलने वालों को कोई दहशतगर्द भले न कहे, पर ताने दो और वाहवाही लूटो। अरे भाई, इस […]

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admin on June 1, 2005

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार : भारत के प्रधानमंत्री ने कहा है कि कश्मीर में सीमा को ‘अर्थहीन और अप्रासंगिक’ बनाने और भारत प्रशासित कश्मीर को अधिक स्वायत्ता देने से पाकिस्तान के साथ चल रहे विवाद को सुलझाने में सहायता मिल सकती है। मेरी प्रतिक्रिया, जो बीबीसी के पन्ने पर भी छपी है, यूँ है […]

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[१९९० के आरंभ तक उत्तर कश्मीर के कलूसा गाँव के जिस घर में मेरा परिवार दशकों से रहा, उस में तब से या तो हिज़्बुल-मुजाहिदीन का डेरा रहा है या राष्ट्रीय राइफ्ल्ज़ का, जिस का जिस समय वर्चस्व रहा। वह क्षेत्र “शान्त” क्षेत्रों में से है, क्योंकि वहाँ अभी भी गिनती के दो-चार हिन्दू बचे […]

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हाल ही के कुछ समाचार माध्यमों में खबर थी, १९९० के पूर्वार्ध में जम्मू कश्मीर छात्र स्वातंत्र्य फ्रंट के कर्ताधर्ता और आत्मसमर्पण करने वाले आतंकियों की संस्था इख़्वान‍-उल-मुस्लिमीन के सर्वोच्च कमांडर ताहिर शेख इख़्वानी ने टेरिटोरियल सेना के अफसरों की चयन परीक्षा उत्तीर्ण कर ली है। बहस उठी कि क्या यह मुनासिब है कि पूर्व […]

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