पिद्दा सा कश्मीर, और आज़ादी?

कुछ दिन पहले अपने अंग्रेज़ी ब्लॉग पर मैं ने कश्मीर पर एक लेख लिखा जो कई दिनों से मन में उबल रहा था, पर कश्मीर में हो रही हाल की घटनाओं के कारण उफन पड़ा। इस लेख को काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली — कुछ टिप्पणियाँ अच्छी, कुछ बुरी। फेसबुक और ट्विटर पर सैंकड़ों लोगों ने इसे शेयर किया। लेख का सार यह था कि कश्मीर जितना बड़ा दिखता है, उतना है नहीं। कश्मीरी मुसलमान आज़ादी ले भी लेंगे तो उनका यह “देश” नहाएगा क्या और निचोड़ेगा क्या। कुछ पाठकों ने सुझाव दिया कि इसे हिन्दी में छापूँ। इसलिए अनुवाद कर सामयिकी में भेज दिया। नीचे मूल अंग्रेज़ी लेख और सामयिकी में छपे हिन्दी अनुवाद की कड़ियाँ हैं। कृपया पढ़ें और अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें। अंग्रेज़ी लेख पर एक लंबे चौड़े वार्तालाप के ज़रिए कुछ और बिन्दु सामने आए हैं।