विश्व भर में आजकल आतंकवाद की जितनी घटनाओं का पर्दाफाश होता है, वह चाहे भारत में हो, योरप या अमरीका में — उन में से अधिकांश की जड़ें किसी न किसी रूप में पाकिस्तान से जा मिलती हैं। न्यूयॉर्क में कल पाकिस्तानी मूल के अमरीकी नागरिक फैसल शाहज़ाद का पकड़ा जाना इसी सिलसिले की नवीनतम कड़ी है।

मीडिया में जो रिपोर्टें आईं हैं, उन के हिसाब से फैसल शाहज़ाद के पकड़े जाने का घटनाक्रम किसी जासूसी उपन्यास से कम नहीं लगता। तीन दिन पहले, यानी 1 मई को न्यू यॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में एक निसान पाथफाइंडर कार खड़ी पाई गई, जिस का इंजन चालू था और गाड़ी में से धुँवा निकल रहा था। आसपास के लोगों की सतर्कता और पुलिस-एफ.बी.आइ. आदि की मेहनत से दो दिन बाद इस गाड़ी के मालिक फैसल शहज़ाद को तब पकड़ा गया जब वह पाकिस्तान की ओर अपनी यात्रा आरंभ कर चुका था। आज़ादी की ओर अपने सफर के पहले हिस्से में वह न्यू यॉर्क के जे.एफ.के. हवाई अड्डे पर दुबई के जहाज़ में बैठा था। जहाज़ चलने वाला था, जब उसे रोका गया और फैसल को गिरफ्तार किया गया। भारत को इस से सीख लेनी चाहिए।

फैसल भाई ने पिछले वर्ष ही अमरीकी नागरिकता की शपथ ली थी। उससे पहले अमरीका में ही बी.एस. और एम.बी.ए. किया था — यानी पढ़ा लिखा था। उस ने अपनी ओर से काफी सतर्कता से काम लिया था। सस्ती सेकंड हैंड गाड़ी दो हफ्ते पहले खरीदी थी। जिससे खरीदी थी, उससे इंटरनेट द्वारा संपर्क किया था, किसी मॉल के पार्किंग लॉट में मुलाकात की थी, और नकदी दे कर गाड़ी ली थी। गाड़ी का उस के नाम से संबन्ध न जुड़े, इस लिए उसे अपने नाम रजिस्टर नहीं कराया था। उस पर किसी और गाड़ी के नंबर प्लेट लगा लिए थे। गाड़ी के सामने के शीशे के अन्दर गाड़ी का VIN (Vehicle Identification Number) खुदा रहता है, जिसके साथ छेड़छाड़ करना गैरकानूनी होता है। गाड़ी का मालिक कोई बने, नंबर कोई लगे, पर VIN से गाड़ी की मूल पहचान बनी रहती है। इस गाड़ी में VIN को मिटा दिया गया था।

फैसल को शायद यह मालूम नहीं था (मुझे भी आज ही मालूम हुआ), कि गाड़ी के निचले हिस्से में भी इंजन पर VIN खुदा रहता है। पुलिस ने उस से गाड़ी के पिछले मालिक का पता खोजा। उस ने फैसल के साथ गाड़ी के विषय में जो ईमेल किये थे, उससे फैसल के विषय में कुछ पता चला। अन्त में फैसल के नागरिकता संबन्धी कागज़ों से उस का चित्र लेकर गाड़ी के मालिक को दिखाया गया, जिससे उसने फैसल की पहचान की। फैसल को फटाफट नो-फ्लाई लिस्ट पर डाला गया, पर जब तक वह जहाज़ में बैठा तब तक एयरलाइन के कंप्यूटर में नई लिस्ट आई नहीं थी। पर इस से पहले कि जहाज़ उड़ता, यात्रियों की सूची अधिकारियों के पास पहुँची और जहाज़ को उड़ने से रोका गया। इस पूरे मरहले में अधिकारियों की सतर्कता का तो हाथ था ही, किस्मत ने भी अधिकारियों का खासा साथ दिया लगता है। वरना एक बार शहज़ाद साहब कराची पहुँच जाते तो अल्लाह हाफिज़।

प्रश्न यह उठता है कि पाकिस्तान में ऐसा क्या है कि पूरे विश्व को आतंकवाद निर्यातित करने की उन्होंने फैक्ट्री लगा रखी है? माना कि उन्हें अमरीकी नीतियों से इख्तिलाफ है, पर इस तरह मासूमों की भीड़ पर हमला करना, यह क्या किसी किताब में लिखा है? शायद वे सोचते हैं कि जो भी मरेंगे, उन में से अधिकतर काफिर होंगे और वे इस तरह खुदा का ही काम कर रहे हैं। हैरानी इस बात की है कि कई बार ये लोग पढ़े लिखे नौजवान होते हैं। कितनी नफरत चाहिए इतनी शिक्षा को शून्य करने के लिए। (ऊपर दिया गया चित्र सी.एन.एन. डॉट कॉम से लिया गया है और लगता है फैसल के औरकुट खाते से है।)

इस घटना का सीधा परिणाम यह होगा कि पाकिस्तानियों को अमरीका का वीज़ा मिलने में और दिक्कतें आएँगी। एयरपोर्टों पर अधिक छानबीन का सामना करना पड़ेगा। इंटरनेट पर पाकिस्तानी लोग इन बातों का रोना रो रहे हैं। पर यह कोई नहीं कहता कि इसका ज़िम्मेदार कौन है — सभी लोग एयरपोर्ट वालों पर, अमरीकियों पर, नस्लभेद का इलज़ाम लगाते हैं, पर यह कोई नहीं कहता कि इस का मूल कारण इस तरह के आतंकी हैं। जितना ऐसा आतंकी पढ़ा लिखा हो, भोली सूरत वाला हो, उतना ही नस्ल आधारित खोजबीन का शिकंजा बड़ा होता जाता है। मेरा पड़ौसी यदि यह मेरे बारे में सोचे कि पड़ौस के इस दक्षिण ऐशियाई बन्दे से सावधान रहना चाहिए तो मैं उसे दोष नही देता। दोष देता हूँ हम जैसे दिखने वाले ऐसे पाकिस्तानियों को जिन्होंने पाकी को एक नापाक शब्द बना दिया है।

ऐसे मौकों पर मुझे फिर सुदर्शन की लिखी कहानी हार की जीत याद आती है। यदि आजकल का बाबा भारती दीन-दुखी-अन्धे को देख कर मुख मोड़ता है या उन पर विश्वास नहीं करता तो इस में गलती बाबा भारती की है या खड़ग सिंह की?

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7 Comments on पाकिस्तान से जुड़ी एक और कड़ी आतंक की

  1. अगस्त्य says:

    अाज मेरे फ़ेसबुक के पन्ने पर इसी से मिलता जुलता एक लंबा संवाद चल रहा था – यदि अापका यह चिट्ठा अंग्रेज़ी (या उर्दू) में होता तो इसे वहाँ ज़रूर पोस्ट करता!

  2. ePandit says:

    यही तो कमाल है कि पढ़े-लिखे लोग भी आतंकी बन रहे हैं। अब ऐसा भी कैसे कहें कि अनपढ़ मुस्लिमों को ही आतंकी बरगला रहे हैं। खैर भारत को इस मामले में अमेरिका से सबक लेना चाहिये जिस तरह से उसने इस मामले में सक्रियता दिखा कर फैसल को पकड़ा।

    और आपकी बात सही है, कभी अफगानिय़ों के 9/11 के कारण निर्दोष सिखों को भुगतना पड़ा, अब पाकियों की नापाक हरकतों के कारण सभी दक्षिण एशियाइयों को भुगतना पड़ रहा है।

  3. रमण कौल says:

    टिप्पणियों के लिए धन्यवाद।
    अगस्त्य अंग्रेज़ी में भी इससे मिलता-जुलता लेख लिखा है http://kaulonline.com/blog/201.....onnection/

  4. SHUAIB says:

    अफ़ग़ान, ईराक़ के बाद अब मार खाने की बारी इनही की है। वो कहते हैं ना कि अपने ही पैरों पे कुलहाडी मारना, और इनहोने मारली है। मुसीबत ख़ुद चली नही आती बल्कि मुसीबत को बुलाया जाता है।

  5. यही तो कमाल है कि पढ़े-लिखे लोग भी आतंकी बन रहे हैं। अब ऐसा भी कैसे कहें कि अनपढ़ मुस्लिमों को ही आतंकी बरगला रहे हैं। खैर भारत को इस मामले में अमेरिका से सबक लेना चाहिये जिस तरह से उसने इस मामले में सक्रियता दिखा कर फैसल को पकड़ा।

    और आपकी बात सही है, कभी अफगानिय़ों के 9/11 के कारण निर्दोष सिखों को भुगतना पड़ा, अब पाकियों की नापाक हरकतों के कारण सभी दक्षिण एशियाइयों को भुगतना पड़ रहा है।

  6. Priya says:

    yadi hum sab apne kartavyon ka theek theek nirvaah karein toh hum hi sarvashreshtha kehlayengein. hum hindustaniyon mein aaj bhi yeh chamta hai jarurat hai toh bas is baat ki ki hum bas itna samajh lein ki hum kewal ek hindustani hain.aur ek hindustani hone ke nate hume kya karna chahiye yeh batlane ki jarurat nahin hai.kuch karein toh bas itna ki hamara desh hum par garva kar sake.

  7. vimal kumar says:

    Akhir pakistaniyau ko kya ho gaya hai, sher ki savari kar lee hai .
    utarenge to kha jyeaga baithe rahenge to jahhnum ko to ja he rahe hai .

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