पाठकों की प्रतीक्षा में

कई साल पहले (2004 में) जब यह चिट्ठा शुरू हुआ तो यही कोई 20 चिट्ठाकार थे हिन्दी चिट्ठा जगत में — पाठकों की संख्या भी एकाध सैंकड़े से अधिक नहीं रही होगी। इन्तज़ार रहता था कि कोई लिखे तो हम पढ़ें और टिप्पणी करें। आजकी स्थिति, जब हज़ारों की संख्या में हिन्दी चिट्ठाकार हैं और शायद लाखों में पाठक हैं, तब एक स्वप्न लगती थी। सितंबर 2005 में लिखा यह लेख उस स्वप्न को दर्शाता है।

पिछले 2-3 वर्षों से मेरा लेखन बहुत ढ़ीला पड़ गया है। जब मैंने चिट्ठे पर लिखना छोड़ दिया, तो स्वाभाविक था कि पाठकों ने भी आना छोड़ दिया। इस बार नव वर्ष पर प्रण किया है कि नियमित लिखने लगूँगा। कोशिश करूँगा कि रोज़ एक प्रविष्टि लिखूँ। साथ में लेखन की गुणवत्ता बढ़ानी पड़ेगी क्योंकि अब पहले वाले गारंटीशुदा पाठक नहीं हैं — हज़ारों अन्य चिट्ठों और चिट्ठाकारों के बीच पाठकों के लिए रेस है।

आज साल का तीसरा दिन है, और यह मेरी तीसरी पोस्ट। स्टैटकाउंटर देखकर दिल डूब रहा है। इक्का-दुक्का पाठक गूगल के ज़रिए पुरानी प्रविष्टियों पर आए हैं, पर नई प्रविष्टियों पर ट्रैफिक शून्य के बराबर है। ज़ाहिर है, फिर से यहाँ जगह बनाने में समय लगेगा। पर इस बार मैं लगा रहूँगा.. अपने लिए।

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13 Comments

  1. हम तो नियमित हैं…अटेन्डेन्स लगा लिजिये!!

    ’सकारात्मक सोच के साथ हिन्दी एवं हिन्दी चिट्ठाकारी के प्रचार एवं प्रसार में योगदान दें.’

    -त्रुटियों की तरफ ध्यान दिलाना जरुरी है किन्तु प्रोत्साहन उससे भी अधिक जरुरी है.

    नोबल पुरुस्कार विजेता एन्टोने फ्रान्स का कहना था कि ‘९०% सीख प्रोत्साहान देता है.’

    कृपया सह-चिट्ठाकारों को प्रोत्साहित करने में न हिचकिचायें.

    -सादर,
    समीर लाल ’समीर’

  2. रमण जी ,
    आप हिंदी चिट्ठे भी लिखते हैं, यह मुझे मालूम भी नही था . आप नियमित लिखें ,अब मैं जब जान गयी हूँ अवश्य पढूंगी .

    नव वर्ष मंगलमय हो !!

  3. जी हाँ!
    अब ब्लॉगिंग फल-फूल रहा है!
    आपका अभिनन्दन है!
    उत्कर्षों के उच्च शिखर पर चढ़ते जाओ।
    पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ।।

    पगदण्डी है कहीं सरल तो कहीं विरल है,
    लक्ष्य नही अब दूर, सामने ही मंजिल है,
    जीवन के विज्ञानशास्त्र को पढ़ते जाओ।
    पथ आलोकित है, आगे को बढ़ते जाओ।।

  4. रमण साहब,
    आपने नए साल के आग़ाज़ में क्या ख़ुशख़बरी दी है ! आपका फिर से नियमित लिखने का ऐरान देखते हुए हमको भी अपनी ख़ामोशी तोड़कर यह बताना लाज़्मी लगा कि “पहले वाले गारंटीशुदा पाठक” में एक पक्का पाठक अब भी यहाँ छुपा है और आपकी पोस्ट का बेसब्र इंतज़ार में रहता है, और हर नई प्रविष्टियों को आरएसएस फ़ीड की मदद से ज़रूर फ़ॉलो किया करेगा.

    || نَووَرش کی شُبھکامنائیں ||

  5. वापस स्वागत है रमण भैया। हाँ ये तो है कि लिखना छोड़ने से पाठक सँख्या घट जाती है, पर दोबारा शुरु करो तो कुछ समय में सबको खबर भी हो जाती है। बाकी पुराने पाठकों में हम भी शामिल हैं, आप लिखिये तो सही हम पढ़ने बराबर आते रहेंगे। आपका चारा खरीदा हुआ है, खाने आते रहेंगे। 🙂

  6. रमण जी
    जी हज़ूर, मैं भी हाज़िर हूं। आपको वापस देख बहुत ख़ुशी हुई या फिर मुझे आने मे देर हुई 😉
    आपको याद दिलाना चाहूंगा कि ये आपका UniNagari ही तो है जिसकी वजह से मैं हिन्दी ब्लॉगिंग आया। आपको वापस देखकर मुझे भी वापस ब्लॉगिं की तरफ आने को दिल कर रहा है।

  7. कौलजी ,आपके वापस आने पर अभिनन्दन. आपने सच कहा कि शुरू में कुछ ही चिठ्ठाकार थे औ अब तो सैलाब है.वो भी एक ज़माना था आप हिन्दी चिठ्ठाजगत के अगुवाओं में से हैं. आपके पाठक दुबारा आप के चिठ्ठे पर आयेंगे. भीड़ में उत्कृष्टता कम ही मिलती है.

  8. शायद आप को बहुत जल्दी वादा तोड़ने में अच्छा लगता है , या बहुत जल्दी में आप वादे करते है . DAILY एक पोस्ट का वादा था और मैं देख रहा हूँ हफ़्तों में एक भी पोस्ट नही . हम तो राह देखते रहते है , कुछ एक पोस्ट कर दिया करे . धन्यवाद .

  9. अभी पंजाब में बारिश कुछ ज्यादा हुई है, राजस्थान में भी उदयपुर की फतहसागर झील पूरी भर गई है और सारी पहाड़ियाँ हसीन होगई हैं..अगर आप लोग भारत भ्रमण के मूड में हो तो उदयपुर से नाथव्दारा का रास्ता जरुर नापें.

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