एक साल एक दहाई

इस चिट्ठे को पढ़ने वाले सभी दोस्तों को नया साल मुबारक। इस दिन पर इस चिट्ठे पर बहुत दिनों बाद कुछ बड़बड़।

आज एक नई दहाई शुरु हुई है, जो उम्मीद है दुनिया के लिए कुछ खुश खबर ले कर आएगी। इस सदी की पहली दहाई में आतंक का ही बोलबाला रहा – 9-11, 26-11, 7-7, ईराक, अफगानिस्तान, ईरान, सूडान, और न जाने क्या क्या? पर घटनाएँ आम तौर पर अंकों की मोहताज नहीं होती। समयचक्र के लिए एक नई दहाई शुरू होने का कोई अर्थ नहीं है। विश्व घटनाक्रम के लिए 1 जनवरी 2010, ऐसा ही है जैसा कोई और दिन। इसलिए यह उम्मीद करना कि दहाई बदलने से घटनाक्रम बदल जाएगा, खुद को झूठी तसल्ली देना ही है। मैं अंकविद्या में विश्वास नहीं करता, इस कारण व्यक्तिगत जीवन मे सदी या दहाई बदलने से कुछ होगा, यह नहीं मानता।

यह नई दहाई है या नहीं, यह भी बातचीत का विषय हो सकता है। यह शताब्दी 2000 में शुरू हुई थी या 2001 में? भई देखा जाए तो 31-दिसंबर-2000 बीसवीं शताब्दी का अन्तिम दिन था, और उसी तर्क से 31-दिसंबर-2010, इस शताब्दी की पहली दहाई का अन्तिम दिन होगा। दूसरी ओर अंग्रेज़ी भाषी परेशान हैं कि इस दशक को क्या कहा जाए – भई 80s थे, फिर 90s आए, उसके बाद अभी यही समझ में नहीं आ रहा था कि पहले दशक को क्या कहा जाए, कि दूसरा दशक भी आ गया। 10s कहना तो सही नहीं होगा – पर कोई बात नहीं – उस शब्दावली से यह नई दहाई शुरू हुई है।

अपने लिए यह पिछली दहाई बहुत परिवर्तन की रही। 2000 में ही भारत से आए, साल भर कैनेडा में रहने के बाद यू.एस. में पैर जमाए। अब पैर तो लगभग जम गए, दिल अभी नहीं जमा।

इस नए साल की शुरुआत आम सालों की ही तरह हुई — सुबह के डेढ़ बजे पार्टी से लौटे। होशोहवास बराबर रखने, क्योंकि घंटे भर की ड्राइविंग कर के घर पहुँचना था — वह भी बहुत खराब मौसम में। शून्य के आसपास तापमान, वर्षा के साथ हल्का हल्का हिमपात भी हो रहा था, पुलिस वाले चौकन्ने हो कर ताक लगाए बैठे थे कि कौन लेन से भटके कि उन्हें धर पकड़ें।

नए साल के साथ स्वयं से वादा है इस चिट्ठे पर नियमित लिखने का। आज पहले दिन कुछ खास नहीं, बस यही कि नए साल की शुरुआत कैसे हुई।

श्री शिवा-विष्णु टैंपल

kdk_0445कुछ मित्रों का फोन आया, पहली जनवरी को मन्दिर जाना चाहते थे। देखते देखते तीन युगल इकट्ठे हुए और श्री शिवा-विष्णु टैंपल का कार्यक्रम बना। यह मन्दिर वाशिंगटन डीसी की बेल्टवे (मुद्रिका मार्ग) के पास है, और मेरे घर से कोई 50 मील दूर। बहुत भीड़ थी आज। मन्दिर के अहाते की पार्किंग फुल थी, और मन्दिर के बाहर का पार्किंग लॉट भी फुल था। बहुत दूर जा कर पार्किंग कर के आना पड़ा, और फिर ठंड में पैदल मन्दिर तक पहुँचना पड़ा।

शिवा-विष्णु मन्दिर पर एक दक्षिण भारतीय मन्दिर की झलक है। अन्दर के हॉल में कई छोटे छोटे मन्दिर हैं। प्रवेश करते ही एक शीशे के डिब्बे में ओबामा देवता की भी फोटो देखी। दरअसल यह फोटो उस दिन ली गई थी जब व्हाइट हाउस में दीवाली मनाई गई थी और इस मन्दिर ने दीपक, मिठाई और पुरोहित उपलब्ध कराए थे।

खैर मन्दिर में दर्शनाभिलाषियों ने दर्शन किए, भोजनाभिलाषियों ने भोजन किया ;-)। अब इतनी दूर आए थे तो सोचा कि पास के थिएटर में थ्री ईडियट्स देखी जाए।

थ्री ईडियट्स

थ्री ईडियट्स की बहुत प्रशंसा सुनी थी, और फिल्म उस प्रशंसा पर खरी उतरी। शायद ही कोई और फिल्म देखी हो, जो शिक्षाप्रद होने के साथ साथ इतनी मनोरंजक भी हो। पूरा हॉल हँस हँस कर लोटपोट हो रहा था। कुछ मज़ाक फूहड़ किस्म के थे, पर यह ज़माने की माँग है। फिल्म सोचने पर मजबूर करती है — अपनी करीयर चॉइसेज़ याद आती हैं, क्या सही किया, क्या ग़लत, बच्चों की करियर चॉइस में हमारा क्या रोल रहता है, वह याद आता है।

यूँ लगता है कि यह दशक हिन्दी फिल्मों के लिए काफी अच्छा रहा। पिछले दिनों तीन फिल्में देखीं और तीनों लीक से हटकर थीं – पा, रॉकेट सिंह, और अब थ्री ईडियट्स।

एक बार फिर नया साल मुबारक।

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5 Comments

  1. 9-11, 26-11, 7-7

    मेरे ख्याल से यदि आप 9/11 लिख रहे हैं तो फिर 26/11 नहीं लिखा जाएगा वरन्‌ 11/26 लिखा जाएगा और यदि 26/11 लिख रहे हैं तो फिर 11/9 लिखा जाएगा! 🙂

    बाकी सब बढ़िया है, नव वर्ष की शुभकामनाएँ। 🙂

  2. धन्यवाद, अमित और समीर जी।
    अमित, यह सब तुकबन्दी की बात है। 9-11, 26-11, यह इन दिनों के नाम हो गए हैं, मूल कुछ भी हो।

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