बासठवें स्वतन्त्रता दिवस पर सभी भारतवासियों को शुभकामनाएँ।

इस अवसर पर एक बार फिर पढ़िए आज से चार वर्ष पहले लिखी यह पोस्ट जिस में मिले सुर मेरा तुम्हारा के हर भाषा के बोल संकलित किए गए थे। आज एक और छोटी सी सूचना, समय-लाइव के सौजन्य से

शास्त्रीय गायक दिवंगत पंडित पी. वैद्यनाथन और लुई बैंक्स द्वारा संगीतबद्ध मिले सुर मेरा तुम्हारा गीत ने दूरदर्शन के छोटे पर्दे को अचानक नयी ऊचाई पर पहुंचा दिया था।

यह गीत जब भी सुनता हूँ, मन को भा जाता है। यदि किसी को गीत से विभिन्न भाषाओं के गायकों के नाम भी मालूम हों तो कृपया बताएँ। कुछ स्वर जो इस में सुनाई दिए थे, वे हैं – भीमसेन जोशी, लता मंगेशकर, बालमुरली कृष्ण, आदि। इन गायकों के अतिरिक्त कुछ चेहरे जो दिखे थे वे हैं कपिल देव, कमल हासन, तनुजा, वहीदा रहमान, हेमा मालिनी, शर्मिला टैगोर, अमिताभ बच्चन, जीतेन्द्र, मिठुन चक्रवर्ती। जो चेहरे और स्वर मैं नहीं पहचान पाया हूँ, उन के विषय में सूचना मिलेगी तो आभारी रहूँगा।

गीत का ऑडियो (एमपी3) और वीडियो एक बार फिर प्रस्तुत है

listen सुनने के लिए क्लिक करें (mp3 डाउनलोड करने के लिए माउस का दायाँ बटन दबाएँ)

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4 Comments on सुर बने हमारा

  1. शुक्रिया इसे यहां सुनवाने का।

  2. मेरे विचार से, इसमें कुछ अन्य लोग हैं – फिल्म कालाकारा शबाना आज़मी, समुद्र तट पर टेनिस खिलाड़ी रामानाथन कृष्नन, जीप पर बेडमिन्टन खिलाड़ी प्रकाश पाडुकोन, मेट्रो पर क्रिकेटर अरुन कुमार और टेनिस खिलाड़ी जयदीप मुकर्जी, मल्लिका साराभाई।

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  4. मिले सुर मेरा तुम्हारा …सुर बने हमारा
    के रीमेक को फिल्मी नौटंकी बना कर रख दिया

    इन्दौर। सिन्धी व्यापारी संघ के अध्यक्ष धनराज वाधवानी ने अमिताभ बच्चन द्वारा जारी रीमेक ’फिर मिले सुर मेरा तुम्हारा …’ की तीव्र आलोचना की है। मूल गीत में जो सिन्धी लाइनें (मुहिंजो सुर तुहिंजे साँ प्यारा मिले जडेंह … )थी इस रीमेक में हटा दी गई हैं यह देश की एकता व सद्भाव के हित में भी नहीं हैं।
    वाधवानी ने कहा “अमि्ताभ बच्चन का मैं प्रशंसक हूं लेकिन उन्होंने जो 23 वर्ष पुराने ‘मिले सुर मेरा तुम्हारा .. सुर बने हमारा…’ का रीमेक प्रस्तुत किया है उससे असंतुष्ट हूं। पुराने संस्करण में जो भारतीय एकता और संस्कृति का जो दर्शन होता है वह इसमें नहीं है। पुराने संस्करण की सबसे शानदार बात यह है कि उसमें बंगला, पंजाबी, सिन्धी, मराठी, मलयालम, कन्नड़ जैसी सभी प्रमुख प्रादेशिक भाषाओं में भी सुर को पिरोने का प्रयास किया गया है। पुराने संस्करण में बारिश है, बादल हैं, नदी है पर्वत है, खेत, उँट और हाथी है, सागर है, लहरें है, वहॉं गॉंव और शहर है, महानगर है । पं भीम सेन जोशी के सुर से आरंभ होकर राष्ट्र गान पर समापन वास्तव में सुर को मिलाने का वह एक बेहतरीन प्रयास था। लता मंगेशकर, आशा भोंसले, भीमसेन जोशी से लेकर कई प्रख्यात हस्तियां गाते हुए नजर आईं। नये संस्करण में न तो वे जमीन से जुड़े वास्तविक जीवन के कलाकार हैं न ही प्राकृतिक दृश्य हैं। इसमें सिर्फ अमिताभ बच्चन ही नहीं हैं, बल्कि उनके बेटे अभिषेक, बहू ऐश्वर्य राय के अलावा आमिर खान, शाहरुख खान, प्रियंका चोपड़ा, दीपिका पादुकोण, रणबीर कपूर, शाहिद कपूर, शिल्पा शेट्टी और जूही चावला को शामिल किया गया है। मिले सुर मेरा तुम्हारा …सुर बने हमारा को फिल्मी नौटंकी बना कर रख दिया है। लेकिन यह आम देश भक्त की भावनाओं से खिलवाड़ ही है।“ लगता है कि गीत में जाने अनजाने में देश वासियों के बीच में दरार डालने का प्रयास किया गया है। कलाम, सचिन, हिरवानी…. को नहीं देख कर भी रीमेक से निराशा स्वाभाविक है। मूल गीत में (पंजाबी) तेरा सुर मिले मेरे सुर दे नाल मिलके बणे एक नवा सुर ताल (हिन्दी) मिले सुर मेरा तुम्हारा तो सुर बने हमारा (सिन्धी) मुहिंजो सुर तुहिंजे साँ प्यारा मिले जडेंह … आदि लाइनें थीं।”

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