वरुण गांधी प्रकरण टीवी पर तो छाया ही हुआ है, देसी इंटरनेट पर भी हाल में इस प्रकरण पर जितना कहा जा रहा है, उस के और उदाहरण कम हैं। चुनाव का समय है भई, यह तो होगा ही। पर आश्चर्य की बात यह है कि वरुण गांधी की वीडियो की सच्चाई पर कोई उंगली नहीं उठा रहा, सिवाय स्वयं वरुण गांधी के।

इंटरनेट पर जो लोग इस विषय पर चिट्ठे लिख रहे हैं, वीडियो डाल रहे हैं, चहचहा (ट्विट्टर पर) रहे हैं, और टिप्पणियाँ कर रहे हैं, उन को दो वर्गों में बाँटा जा सकता है — वे जो उन के “वक्तव्यों” के कारण वरुण से नफ़रत करते हैं, और वे जो उन का समर्थन करते हैं। यदि आप भाजपा समर्थक हैं तो आप पहले वर्ग में हैं, अन्यथा दूसरे वर्ग में। इंटरनेट पर पहले वर्ग का ही बोलबाला लगता है। पर इस बात पर कोई निष्पक्ष रूप से प्रश्न नहीं उठा रहा कि क्या वीडियो असली है या नकली। वरुण गांधी मामले में भारतीय मीडिया ने “कथित” या “alleged” या “reported” जैसे शब्दों को त्याग दिया है, ऐसे शब्द जो सामान्यतः किसी भी अपराधी के लिए तब तक प्रयोग किए जाते हैं जब तक उस का अपराध सिद्ध नहीं होता। दूसरी ओर, दिखाए जा रहे वीडियो से “हिन्दू” शब्द को ऐसे बीप किया जा रहा है जैसे यह कोई अपशब्द हो या इस शब्द से ही दंगे फैलने का डर हो। लालू यादव का रोलर चलाना, कपिल सिबल का रासुका के मुद्दे पर टालमटोल करना, मायावती का रासुका लगाना, यह सब समझ में आता है। चुनाव का मौसम है, उन्हें तो वही करना है जो वे करते आए हैं। पर आम आदमी को क्या हो गया है? मुख्य धारा के मीडिया को क्या हो गया है, जिसे निष्पक्ष होना चाहिए? हर कोई यह साबित करने की होड़ में क्यों लगा हुआ है जैसे कि वे वरुण गांधी की उन जनसभाओं में स्वयं उपस्थित थे?

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मैं यहाँ वे प्रश्न पूछने जा रहा हूँ जो कोई नहीं पूछ रहा। पर पहले यह बता दूँ कि मैं यह नहीं मानता वरुण गांधी दूध के धुले हैं। पर जो लोग उसे नष्ट करने पर तुले हैं, वे भी तो दूध के धुले नहीं है। हो सकता है कि उस ने वह सभी घिनौनी बातें कही हों जिन का उस पर आरोप लगाया जा रहा है। पर यह भी सच है कि उसे बदनाम कर के मैदान से बाहर करने वाले भी बहुत बहुत ताकतवर लोग हैं। हालाँकि मैं स्वयं को भाजपा समर्थक मानता हूँ, तब भी यदि यह साबित होता है कि यह वीडियो बिल्कुल सही है तो मैं उस बेवकूफ का समर्थन करने के लिए तैयार नहीं हूँ। पर यदि उस के सही होने में ज़रा भी सन्देह है तो हमें जल्दी नहीं करनी चाहिए नतीजे तक पहुँचने में। मैं यहाँ वही सन्देह व्यक्त करने का प्रयत्न कर रहा हूँ। ध्यान दें कि मैं वरुण की सफाइयों को नहीं तोल रहा, सफाइयाँ तो सभी देते हैं। मैं वीडियो को अपने स्तर पर तोलने की कोशिश कर रहा हूँ। दो प्रश्नों का उत्तर दें – 1. वीडियो के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है या नहीं? 2. क्या किसी को वीडियो के साथ छेड़छाड़ करने से लाभ मिल सकता था? दूसरे प्रश्न का पक्का उत्तर है – हाँ। पहले प्रश्न का उत्तर जानने के लिए आगे पढ़ें।

नीचे जो स्टार न्यूज़ का वीडियो है, उस के दृष्यों का विश्लेषण कर के मैं ने टिप्पणियाँ लिखी हैं। इस पौने तीन मिनट के वीडियो में लगभग वह सारे विवादित वचन हैं जो कथित रूप से वरुण गांधी ने दिए हैं। टिप्पणियाँ अंग्रेज़ी में लिखी हैं, क्योंकि यूट्यूब के संपादित्र में देवनागरी नहीं चल रही। टिप्पणियाँ देखने के लिए वीडियो को चलाएँ।

लोग सोचते हैं कि इस तरह के वीडियो के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकती। मेरा यह मानना है कि वे लोग डिजिटल वीडियो से पहले के ज़माने में रह रहे हैं। आजकल एक पेशेवर वीडियो बनाने के लिए, वीडियो में काट छाँट करने के लिए, उस में बाहर की आवाज़ डालने के लिए केवल एक वीडियो एडिटर सॉफ्टवेयर की आवश्यकता है, जो नेहरू प्लेस के फुटपाथ पर कुछ रुपयों में मिल जाता है। एक अदद वॉइस आर्टिस्ट हो तो क्या कहने — उन की भी अपने देश में कमी नहीं है। हाँ होठों की हरकत मेल न खाए शायद। पर पेशेवर वीडियो की बात कौन कर रहा है, जब करोड़ों लोगों को एक गैर-पेशेवर वीडियो से बेवकूफ बनाया जा सकता है। आप ऊपर के वीडियो में ध्यान से देखें। जहाँ जहाँ वरुण ने सब से आपत्तिजनक शब्द “कहे हैं”, वे शॉट दूर से लिए गए हैं, जहाँ आप होठों की हरकत नहीं देख सकते। उस के ऊपर न्यूज़ रिपोर्टरों की अपनी बकवास।

जहाँ पर वरुण कह रहे हैं (1:01 मिनट पर) कि “यह कटु** के गले को काट देगा चुनाव के बाद”, वहाँ पर सीन कुछ इस तरह का है (नीचे चित्र देखें)। आप होठों की हरकत को नहीं देख सकते।

Varun Gandi speech

फिर एक जगह वह “कहता है” कि इन के नाम डरावने होते हैं, वहाँ पर तो लहजा ही देहाती लगता है। यहाँ सुनें। यहाँ पर वरुण जान बूझ कर देहाती लहजे में बात कर रहे हैं, या किसी और की आवाज़ है? कहा नहीं जा सकता। होठों की हरकत आप देख नहीं सकते (1:57 मिनट पर), और सरकार के ध्वनि विशेषज्ञों को सोनिया गांधी या मायावती जब तक नहीं कहेंगी वे इसे देखेंगे नहीं।

कुछ और प्रश्न जो उठते हैं :

1. विवादित वीडियो किस चैनल का है, या किन चैनलों का है? अभी तक किसी भी चैनल ने यह क्यों नहीं कहा है कि, “यह हमारा वीडियो है, हमारे कैमरामैन ने खींचा है। इस लिए वरुण गांधी सफाइयाँ देना बन्द करें”? मैं यह तो नहीं मान सकता कि जब भाषण दिया गया तो कोई मुख्य चैनल वहाँ नहीं थी। नहीं थी तो किस ने खींचा?

2. सभी चैनलें एक ही स्रोत से ली गई फुटेज को बार बार दिखा रहे हैं, जिस का पता नहीं कि किस ने बनाया है? आज के वरुण-विरोधी माहौल में तो ऐसे व्यक्ति हीरो बन जाते। फिर वे लोग छुपे क्यों हुए हैं? चैनलें अपना वीडियो क्यों नहीं दिखातीं? विभिन्न चैनलें विभिन्न् कोणों से लिए वीडियो दिखातीं, जिन की ध्वनि आपस में मेल खाती, तो कोई शक ही नहीं होता।

3. वरुण गांधी का देश की बड़ी बड़ी चैनलों के बड़े बड़े पत्रकारों ने साक्षात्कार लिया यह मुद्दा खुलने के बाद, जैसे कि स्टार न्यूज़ के दीपक चौरसिया, टाइम्ज़ नाउ की नविका कुमार, CNN-IBN की पत्रकार, आदि। इन साक्षात्कारों के लिए इन चैनलों ने उन्हीं पत्रकारों को भेजना चाहिए था जो इन भाषणों के चश्मदीद गवाह थे, ताकि वे उस का सही तौर पर सामना करते। आप इन वीडियो कड़ियों पर नज़र डालें। यह लोग वरुण से बड़े प्यार से बात कर रहे हैं, और पीठ पीछे धज्जियाँ उड़ा रहे हैं। वे यह क्यों नहीं कह सकते कि “हम वहाँ थे। आप ने ‘वोट कटवा’ नहीं कहा, वरुण; आप ने ‘कटुआ’ कहा?”

4. यह विवादित भाषण कहा जा रहा है कि 5 मार्च को दिया गया। फिर यह उस दिन सायं के समाचार में आना चाहिए था, या अगले दिन के। फिर यह 16 मार्च को सामने क्यों आया? जो दंगा फसाद इन वक्तव्यों से होना था, वह 5-6 मार्च को होना चाहिए था, फिर 12 दिन बाद, सीडी निकलने के बाद यह रासुका के लायक कैसे बना?

5. वीडियो की जाँच भाषण के एक महीने बाद भी सामने क्यों नहीं आ रही? कहा गया कि वरुण ने वकील के बिना अपनी आवाज़ का नमूना देने से मना कर दिया। क्या वास्तव में वे वरुण की आवाज़ का सैंपल लिए बग़ैर कुछ नहीं कर सकते? किस को बेवकूफ बना रहे हैं यह लोग? बीबीसी पर, सीएनएन पर, और अन्य चैनलों पर उन के कितने ही इंटरव्यू हैं, जिन पर कोई उंगली नहीं उठा सकता।

6. समाचार चैनलों ने अब तक पीलीभीत के एक भी चश्मदीद गवाह से बात क्यों नहीं कराई है, जो यह कह सके कि वह उस समय मौजूद था जब यह वक्तव्य दिए गए? बल्कि कुछ लोगों से पूछा गया तो उन्हों ने कहा कि उन्हें मालूम नहीं क्योंकि वे वहाँ नहीं थे। पीलीभीत से ली गई इस रिपोर्ट को पढ़िए जिस में लोग कह रहे हैं कि वरुण गांधी ने किसी समुदाय के खिलाफ कुछ नहीं कहा। ऐसी रिपोर्टों को हमारा मीडिया तूल क्यों नहीं देता?

7. यदि मीडिया को, और सरकार को, यह लगता है कि ऐसे वक्तव्यों से सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ता है, और उस कारण इन वक्तव्यों को देने वाले को जेल में बन्द कर दिया गया है, तो फिर उन वक्तव्यों को बार बार क्यों दोहराया जा रहा है? सांप्रदायिक दंगे फैलाने के लिए?

ऐसा लगता है कि हम इस दशक का सब से बड़ा मीडिया फ्रॉड देख रहे हैं। ऊपर दर्शाए गए वीडियो में रिपोर्टर की आवाज़ को सुनिए। क्या रिपोर्टर का यह फर्ज़ नहीं है कि समाचार को जैसे का तैसा प्रस्तुत करे? यहाँ तो लगता है यह कांग्रेस, बसपा या सपा का कार्यकर्त्ता है? हर वाक्य में वह कथित भाषण के शब्दों को बढ़ा चढ़ा कर अपने शब्द डाल रहा है — कब्रिस्तान, मुर्दों का टीला, भस्मासुर, आदि। देश की इन अग्रणी चैनलों को समाचार और संपादकीय के बीच का अन्तर नहीं मालूम क्या?

NDTV की बरखा दत्त के इस वीडियो को देखें। शुरुआत में वरुण की सफाइयों वाले वक्तव्य स्क्रीन पर दिखाए जा रहे हैं। बढ़िया। पर फिर बरखा, बजाय उस का जवाब दिए शुरु हो जाती है उस की हेट स्पीच की बात करने। क्या हमारी किस्मत में एक निष्पक्ष मीडिया नहीं हो सकता? क्या हमें सरकारी दूरदर्शन और गैरज़िम्मेदार निजी मीडिया के बगैर कुछ नहीं मिल सकता?

आप क्या सोचते हैं? आप भी अपनी राय दीजिए

18 Comments on वरुण गांधी वीडियो – असली या नकली?

  1. अमित सिंह says:

    जीहां, वरुण के वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई है. लेकिन मैं नहीं मानता कि हम इस दशक का सब से बड़ा मीडिया फ्रॉड देख रहे हैं. हमारा मीडिया इससे भी बड़े बड़े फ्राड कर चुका है, बल्कि फ्राड करते करते ही चुक गया है, ये लोग समाचार दिखाते नहीँ बल्कि समाचार बनाते हैं, आज के हर चैनल अपनी विश्वसनीयता गंवा चुके हैं, कोई भी आदमी इन चैनलों के चीख पुकार पर विश्वास करने को तैयार नहीं है,

    एम्बेडेड जर्नलिज्म का घिनौना रूप हमारे सामने है, इन्टरनेट पर इन पत्रकारों (?) की टुच्ची हरकतों पर लानत भेजने वालों की तादाद बहुत अधिक है क्योंकि इन्टरनेट पर लोग तकनीक के बारे में अधिक जानते हैं, उन्हें इन चैनल वालों की बेहूदा बातों पर गुस्सा और घृणा ही आयेगा,

    आज सुबह सुबह पहली ही पोस्ट अच्छी पढ़ने को मिली!

  2. जिम्मेदार मीडिया से यह आशा की जाती है कि वह ऐसी बातों से परहेज करे जिससे की किसी भी प्रकार के गलत वातावरण का निर्माण होने की आशंका हो। समालोचना तो छोड़िये इन्हें आलोचक भी नहीं कहा जा सकता इनके लिये निदंक सबसे उचित शब्द हो सकता है। ये सिर्फ विरोध के लिये विरोध करते हैं। ये उपदेशात्मक लहजे में हमेशा कहते हैं कि अच्छी सरकार‚ स्वास्थ्य‚ सुरक्षा और गरीबी से जुड़े मुद्दों को उठाना चाहिये पंरतु स्वयं ये गढ़े मुर्दों को उखाड़ कर वातावरण में सड़ांध फैलाते रहते हैं।

  3. nitin says:

    आपका एनालिसिस पढ़कर अच्छा लगा, सारे के सारे चैनल वाले इस ख़बर पर तो कांग्रेस के खरीदे हुए लगते है, भारी भरकम शब्दों के प्रयोग कर के फैसला सुनाने की बजाय इन्हें सिर्फ खबर देना चाहिये ।

  4. Vinod Shukla says:

    सचमुच यह तो मीडिया स्पांसर्ड कार्यक्रम लगता है. वैसे भी मीडिया वाले बिके हुये हैं, और सच्चाई से उनका न‌ाता दूर का नहीं. वह तो भला हो नये माध्यमों का कि अब इनके झूठों से परदा उठ जाता है. वैसे भी अब बरखा दत्त आदी पत्रकारों की कोई क्रेडिबिलीटी बची नहीं सब जानते हैं कि इनका झुकाव किस तरफ हैं.

  5. kajal kumar says:

    वीडियो तो असली है..देखना ये है कि इसे नकली कैसे साबित किया जाता है.

  6. रमण कौल says:

    सभी की टिप्पणियों के लिए धन्यवाद।
    @kajal kumar
    वीडियो असली है तो आप के पास अवश्य कोई ऐसी जानकारी होगी, जो मेरे पास नहीं है। मेरे द्वारा उठाए गए प्रश्नों का कोई उत्तर?

  7. आज के दौर में तथाकथित हिन्‍दू विरोधी धर्मनिपेक्ष जो कहे वही सही होता है । वही ये लोग कर रहे है चाहे वह मीडिया हो या पार्टीया

  8. Ravi Singh says:

    जीहां, किसी भी वीडियो के साथ बड़ी आसानी से इस तरह की छेड़छाड़ की जा सकती है|

    जब भी कोई इस तरह का सबूत पेश किया जाता है तो सबसे पहले सबूत पेश करने वाले का होना भी जरूरी है| किसने वीडियो खींचा? ये बहुत महत्वपूर्ण बात है| लेकिन चुनाव आयोग और इन चैनलों के पीछे कौन से अति उत्साह की संजीवनी काम कर रहा थी, उन्हें ही पता होगा।

    संसद में जब कांग्रेस ने नोट के बदले वोट खरीदे थे और इसका “पदमश्री” राजदीप बेअ- सर देसाई के चैनल ने स्टिंग किया था| इस स्टिंग के बाद राजदीप वीडियो पर कुंडली मार कर बैठ गये थे| जब जनता में इसकी भद्द पिटी तो राजदीप ने मन मसोसकर इसे दिखाया था लेकिन अपने चैनल द्वारा खींचे गये वीडियो की जांच परख करने के बारे में कितनी बेहूदा दलीलें दी थीं|

    वही चैनल, वही लोग एक गुमनाम पेश किये गये वीडियो पर कैसी एकपक्षीय और दोमुंही बातें करने लगते हैं! क्या इसी को एम्बेडेड पत्रकारिता कहते हैं?

    इन चैनलों की आम आदमी के बीच विश्वसनीयता शून्य से अधिक नहीं है, इसका अन्दाजा इन चैनलों को भी हो गया है|

  9. Hind says:

    who is this media person? He sounds like mentally retarded. He should work in D grade hindi movie or horror movie. I don’t know how come he is using such a big big words.

  10. दिगम्बर जैन says:

    हिन्द भाई, डी ग्रेड मूवी या होरर मूवी में तो काम करने के लिये अक्ल की आवश्यकता होती है,

    वैसे इन चैनल वालों को मैं मानसिक विक्षिप्त मानने के लिये तैयार नहीं हूं, ये डेड़ अक्कल वाले पक्के अवसरवादी और अपनी कमाई के लिये कुछ भी करने के लिये, कितना भी नीचे गिरने के लिये तैयार लोग हैं,

  11. बहुत वस्तुनिष्ठ तरीके से आपने सारे मुद्दे को रखा है, बेहतरीन विश्लेषण किया है… लेकिन ये सब बेकार इसलिये है कि भारत में नेट के उपयोगकर्ता फ़िलहाल सिर्फ़ 2% हैं और मीडिया इन बातों को लेगा / छापेगा नहीं क्योंकि वह बिका हुआ है… पहले भी मैं अपने कई चिठ्ठों में इन मीडिया वालों के दोगलेपन के किस्से उजागर कर चुका हूँ, देशद्रोहियों के हाथों का खिलौना बन गया है हमारा इलेक्ट्रानिक मीडिया… 5M (मार्क्स-मिशनरी-मुल्ला-मैकाले-माइनो) का असर मीडिया पर साफ़ नज़र आता है… भारत का दुर्भाग्य है ये, लेकिन हिन्दू जब तक एक वोट बैंक नहीं बनते तब तक ये ऐसे ही भुगतते रहेंगे…

  12. vasim says:

    agr ukt vidio glat hy to us samay rikard kiye gye sahi vidiyo kaha hay ? aakhir bhajpa ke vidio rikadr bhi to vha rhe honge?

  13. आदर्श राठौर says:

    मित्र! वरुण को बचाने की व्यर्थ कोशिश न करें। वरुण के भड़काऊ भाषण देने के 1 घंटे के अंदर ही उनका ये वीडियो समाचार चैनल्स के पास पहुंच गया था। मैंने खुद इसे देखा-सुना था और बिना किसी छेड़छाड़ के, बिना आपत्तिजनक शब्दों को म्यूट/बीप किए चलाया था। उसने वाकई ऐसे ही भड़काऊ भाषण दिया था। इस मामले में सारे सबूत पुलिस के पास पहुंच चुके हैं। आप चिंता न करें।
    चलिए मान भी लेते हैं कि वीडियो से छेड़छाड़ कर ली गई। लेकिन पीलीभीत की जनता झूठ नहीं बोलेगी। अपने घर पर बैठकर विश्लेषण किया जा सकता है। हकीकत जाननी है तो घटनास्थल पर जाकर देखें।
    उम्मीद करता हूं मॉडरेशन के वक्त आप इस टिप्पणी को मिटाएंगे नहीं।

  14. रमण कौल says:

    सभी की टिप्पणी के लिए धन्यवाद।

    @vasim ji
    यह तो प्रश्न है कि सही वीडियो कहाँ है, पर सही वीडियो भाजपा के पास होनी चाहिए यह तो आवश्यक नहीं है। उन का काम समाचार वितरण का नहीं है। इसी वीडियो को कोई भी चैनल अपनाने को तैयार हो जाए तो काफी है। दो चैनलें दो विभिन्न कोणों से दिखाएँ तो शुबह ही न रहे।

    @आदर्श राठौर जी
    आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद। टिप्पणी मिटाने का प्रश्न ही नहीं, क्योंकि मैं भी सच जानना चाहता हूँ। पर आप की टिप्पणी ने कुछ और प्रश्न उठाए हैं।

    यदि आप को इतनी अन्दर की सूचना है कि समाचार चैनलों को वीडियो 1 घंटे में मिल गया था तो इसे 11 दिन तक क्यों नहीं दिखाया? मेरे लेख में प्रश्न संख्या 4 देखें।

    मैं मानता हूँ कि पीलीभीत की जनता झूठ नहीं बोलेगी। मेरा प्रश्न संख्या 6 देखें।

    यदि आप के पास मूल वीडियो है तो उसे यूट्यूब पर डालिए न।

  15. मित्र आ तो गया था लेकिन इसे चलाने या न चलाने को लेकर संशय बना हुआ था। लेकिन बाद में जब एक चैनल ने शुरुआत की तो सभी ने चलाना शुरु किया। मूल वीडियो को मैंने देखा है।

    http://pyala.blogspot.com/2009.....st_17.html
    पर मैंने इस पर लिखा है। और यू ट्यूब पर ये जो भाषण पड़ा हुआ है ये पूर्ण नहीं बल्कि पैकेंजिग के तहत उसके अंश लिए गए हैं। इसलिए कोई भी बात स्पष्ट नहीं हो रही। वॉयस ऑफ इंडिया चैलन अगर आपने देखा होता तो सब मामला साफ रहता। मूल वीडियो को मैं यू ट्यूब पर नहीं डाल सकता, क्षमा चाहता हूं। लेकिन मूल प्रति, रिकर्डिंग की मूल टेप और कैमरा आदि सब कुछ पीलीभीत पुलिस के पास जमा करा दिए गए हैं। देखना ये है कि पुलिस अब इसपर क्या निष्कर्ष निकालती है।
    आभार…..

  16. रमण कौल says:

    धन्यवाद, आदर्श। क्या इस बात पर थोड़ी रौशनी डालेंगे कि क्या यह रिकॉर्डिंग किसी मुख्य चैनल/चैनलों ने की थी, या किसी अन्य गुट या व्यक्ति ने? जितना भी वीडियो मैं ने देखा है, उस में सारी आपत्तिजनक बातें दूर से शूट की गई हैं। क्या मीडिया वहाँ मौजूद था या नहीं? आप की टिप्पणियों से कुछ तो सूचना मिली है, पर मेरे सात के सात प्रश्न अनुत्तरित हैं। उम्मीद है कि कभी उत्तर मिलेगा।

    आज की तारीख की और कितनी घटनाएँ हैं जो मीडिया हमें दस बारह दिन बाद बताएगा?

  17. मैथिली says:

    रमण जी आपने बाजिब प्रश्न उठाये हैं
    बार बार पढ़ने के बाद में मैं इसी नतीजे पर पहुंचा हूं कि आपके निष्कर्षों से असहमत हुआ नहीं जा सकता

  18. […] do you think? Have your say. Read the comments on the Hindi version of this post too. linkscolor = “000000”; highlightscolor = “888888”; backgroundcolor = “FFFFFF”; channel = […]

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