इंटरनेट की खूबी यह है कि हर रोज़ आप को कुछ न कुछ नया देखने-सीखने को मिलता है। यदि शाम तक याद रहे तो एक अदद ब्लॉग-पोस्ट हो जाती है। हाँ तो आज एक मेल फॉर्वर्ड मिला जिस में बराक ओबामा के राज्याभिषेक समारोह के एक चित्र की कड़ी थी। इस में यूँ तो कोई खास बात नहीं होनी चाहिए, पर इस वाले चित्र में यह खास बात थी कि उस में आप क्लिक कर के ज़ूम कर सकते हैं, दाएँ बाएँ पैन कर सकते हैं – यहाँ तक कि लाखों लोगों के चेहरों को देख सकते हैं – वह भी करीब से। ज़रा और खोजबीन की तो मालूम हुआ कि इस तकनीक का नाम गिगापैन तकनीक है। इस बात को मैं “आज के दिन की सीख” कह सकता हूँ।
नीचे के चित्र को देखें। इस में जो लोगों की अपार भीड़ दिख रही है, क्या आप उस में किसी का चेहरा पहचान पाएँगे? अब चित्र पर क्लिक कीजिए। चित्र एक नई खिड़की में खुलेगा। अब आप अपने माउस को इस्तेमाल कर के ज़ूम-इन, ज़ूम-आउट और पैन कर सकते हैं, बिल्कुल वैसे ही जैसे आप किसी गूगल मानचित्र या गूगल अर्थ पर करते हैं। यदि आप के माउस में बीच का व्हील है तो उसे घुमा कर ज़ूम कर सकते हैं। देखिए आप कितने चेहरों को पहचान पाएँगे।

यूँ तो इस तरह से कुछ चित्रों को जोड़ कर बड़ा चित्र बनाना मुश्किल नहीं है। इसे पैनोरामिक स्टिचिंग कहते हैं। मैं ने कई ऐसे चित्र पहले देखे हैं, जिस में आठ-दस चित्रों को जोड़ कर एक बड़ा चित्र बनाया गया हो। पर इस चित्र में 220 चित्रों को जोड़ा गया है और कुल मिला कर यह चित्र 56,646 पिक्सल लंबा और 27,788 पिक्सल चौड़ा है, यानी 1.57 गिगापिक्सल। ज़ाहिर बात है, कि इतने चित्रों को इतनी खूबी से मिलाने के लिए आवश्यक है कि इन्हें एक समानता से खींचा जाए, एक ही दृष्टिकोण से खींचा जाए और बहुत जल्दी-जल्दी खींचा जाए ताकि समाँ बदल न जाए। यह सब करने के लिए जिस रोबोटिक कैमरा स्टैंड का इस्तेमाल किया गया है, उस का नाम है एपिक। एपिक बनाने वाली कंपनी गिगापैन सिस्टम्स वाले अपनी साइट पर बताते हैं :
इस में बस आप अपना कैमरा अटैच कर दीजिए, फिर एपिक आप से वे निर्देश लेगा जिस से आप का गिगापिक्सल चित्र खींचा जा सके। आप ऊपर बाएँ का और नीचे दाएँ का कोना सेट कर दीजिए। एपिक स्वयं हिसाब लगाएगा कि आप के कैमरा को कितने चित्र खींचने की आवश्यकता है, सैंकड़ों या हज़ारों। फिर यह उन चित्रों को स्वयं ही पंक्तियों और स्तंभों में बाँट देगा। फिर इस रोबोट का बाज़ू कैमरा को क्लिक करता जाएगा और कम से कम समय में बहुत ही सूक्ष्म विवरण वाला चित्र बना देगा।
आज की तारीख में कैमरे की कीमत 379 डॉलर है, यानी लगभग बीस हज़ार रुपए। जिस हिसाब से परिणाम हैं, कीमत अधिक नहीं है। पाँच वर्ष पहले मैं ने अपना 4 मैगापिक्सल कैमरा इतने में ही खरीदा था। गिगापैन डॉट ऑर्ग की साइट पर आप अपनी खींची हुई पैनोरामिक तस्वीरें चढ़ा सकते हैं, जहाँ वे होस्ट की जाएँगी और दर्शाई जाएँगी। इस साइट में खोजने पर कुछ आलीशान तस्वीरें मिलीं। दो सप्ताह पहले लॉस एंजिलिस के कोडैक सेंटर में ऑस्कर समारोह वाले दिन लिया गया यह चित्र देखिए। इस की भीड़ में चेहरे पहचानने की कोशिश कीजिए। मैं इस में स्लमडॉग मिलियनेयर के दल को ढूँढ रहा था, और मुझे वे लोग मिले भी। इरफान खान, डैनी बॉइल, ए. आर. रहमान, मधुर मित्तल। आप भी ढूँढिए, मिलते हैं तो टिप्पणी के द्वारा बताइए।

ताज महल का नीचे दिया गया चित्र देखिए। इस में आप दीवारों पर बने डिज़ाइनों की बारीकियाँ तक देख सकते हैं।

नासा की साइट के इस पृष्ठ के अनुसार यह वही तकनीक है, जिसे मंगल पर भेजे गए वाहन प्रयोग में ला रहे हैं, उस ग्रह के चित्र खींचने के लिए।
इंडिया गेट का भी चित्र यहाँ पर देखा जा सकता है।
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Read this post in English.
[...] website, it is the same technology that is used by Mars rovers to image the red planet. – इस प्रविष्टि को हिन्दी में पढ़ें। linkscolor = “000000″; highlightscolor = “888888″; backgroundcolor = “FFFFFF”; channel = [...]
बहुत ही सुन्दर जानकारी. आभार..
भाई क्या शानदार बात बताई है? जवाब नहीं इस का।
सुंदर. हमने भी आज नई चीज सीखी आपके सौजन्य से. और, चीजों को ब्लॉग पोस्ट लिखते तक याद रखा करिए तो लोगों का ऐसे ही भला होते रहेगा
शानदार जानकारी !
बेहतरीन जानकारी!
गजब की तकनीकि है. क्रांतिकारी. फोटोग्राफी में एकदम क्रांतिकारी कदम.
हमें एक ईमेल आया था और ओबामा का फ़ोटो देखकर खुश हो गये पर इतने गहन अध्ययन के लिये आपको बधाई ।
अच्छी वेबसाइट है, लगता है मुझे भी अब इसको follow करना पड़ेगा, मैंने इसको bookmarks में रख लिया है !
यह तकनीक गूगल – पृथ्वी एवं विकीमैपिया के सामानांतर प्रतीत होती है | जो भी हो, जानकारी के लिए धन्यवाद |
~ दुष्यन्त
बहुत उम्दा बधाई