मरने से पहले जीना सीख ले

ज़िन्दगी तो बेवफ़ा है एक दिन ठुकराएगी
मौत महबूबा है अपने साथ ले कर जाएगी।

यदि किसी को मालूम हो कि उस का जीवन कुछ दिन, सप्ताह, महीने, में समाप्त होने वाला है, तो उस दशा में उस को कैसा महसूस होता होगा? हाल में कुछ इस तरह के व्यक्तियों के बारे में पढ़ने-सुनने-देखने को मिला। और इन लोगों के साहस ने मुझे बहुत प्रेरित किया है। कहने में आसान लगता है, पर यदि मेरे साथ ऐसा हो तो मैं क्या करूँगा? यह सिचुएशन बार बार सोचने पर मजबूर करती है। जब बुनो कहानी में “मृत्युंजय” कहानी बुनी जा रही थी, तब भी हम इसी सूरते-हाल का विश्लेषण कर रहे थे। पर वह तो किस्सा-कहानी की बात थी, जो जी में आया लिख दिया

इस पोस्ट को संक्षिप्त रख कर दो और सूक्तियाँ यहाँ प्रस्तुत करना चाहूँगा जो जीवन-यापन में सहायता कर सकती हैं Continue reading मरने से पहले जीना सीख ले