चक्कर चार सौ बीस का

420 million pound fraudआज बीबीसी की वेबसाइट पर समाचार देखा कि स्पेन की पुलिस ने धोखेबाज़ों के एक गिरोह को 420 मिलियन पाउंड की धोखाधड़ी के लिए गिरफ्तार किया है। यूँ तो इस धनराशि को डॉलर, यूरो आदि में परिवर्तित किया जाए तो कुछ और ही अंक सामने आएँगे, पर फिर भी 420 अंक के संयोग को अनदेखा नहीं किया जा सकता। गूगल भैया की सहायता से 420 के महत्व को जानने की कोशिश की गई। देस में तो चार-सौ-बीसी या फोर-ट्वेंटी धोखाधड़ी की पर्याय है, पर पश्चिम में यह अंक सुनने को नहीं मिलता। खोज करने पर पता चला कि यदि मैं ने अमरीका में 420 अंक का प्रयोग नहीं सुना तो उस का कारण यह है कि मेरी सही लोगों से (या ग़लत लोगों से?) दोस्ती नहीं है। मालूम हुआ कि यहाँ भी 420 का अर्थ कुछ अच्छा नहीं है। इस का इस्तेमाल गाँजे (मेरियुआना) का नशा करने वालों द्वारा प्रयोग किया जाता है। Continue reading चक्कर चार सौ बीस का

इतनी सर्दी है किसी का लिहाफ लइ ले

temperature screeshot from igoogle on Jan-15, 09 बाईं ओर मैं ने अपने गूगल होमपेज से मौसम का जो हाल चिपका रखा है, वह चित्र अपनी कहानी कह रहा है। मैं जिस शहर में रहता हूँ, उस का नाम है वेस्टमिन्सटर। यह बाल्टिमोर से केवल 50 किमी की दूरी पर है और वाशिंगटन डीसी से कोई 80 किमी। पर पर फिर भी इन शहरों के मुकाबले वेस्टमिन्सटर में 7-8 डिग्री अन्तर होता है तापमान में। तापमान कम होता है, क्योंकि यह इलाका थोड़ा ग्रामीण टाइप का है — खुली जगह काफी है। इस क्षेत्र का तापमान देख कर मुझे कश्मीर की याद आती है, जहाँ सारा बचपन गुज़रा है। इस बार अभी कोई खास बर्फ नहीं पड़ी है, हालाँकि इतनी सर्दी पड़ रही है। चलो अच्छा है, नहीं तो सुबह-सुबह बेलचा उठा कर घर का ड्राइव-वे साफ करना पड़ता है दफ्तर जाने से पहले।

पर पिछले कुछ दिनों से मैं दफ्तर के काम से मिशिगन सिटी, इंडियाना आया हुआ हूँ, जो शिकागो के पास, लेक मिशिगन के किनारे पर स्थित है। और यहाँ इस बार जो ठंड पड़ रही है, वह मैं ने जीवन में कभी नहीं देखी। इस समय बाहर का तापमान शून्य से तेईस डिग्री नीचे है। शून्य से तेईस डिग्री नीचे। बर्फ भी खासी गिरी हुई है, और गिर भी रही है। यह ग्लोबल वार्मिंग है या ग्लोबल कूलिंग? Continue reading इतनी सर्दी है किसी का लिहाफ लइ ले

स्लम-डॉग मिलियनेयर – एक समीक्षा

मुंबई के स्लम-जीवन पर केन्द्रित स्लमडॉग मिलियनेयर देखकर हॉल से निकलने के बाद अनुभूतियाँ मिश्रित थीं। फिल्म में मुंबई के झोपटपट्टी जीवन की जो छवि दिखाई गई है, उसे देख कर काफी बेचैनी लगी। अमरीकी सिनेदर्शकों से भरे हॉल में ऐसा लगा जैसे हमें पश्चिम वालों के सामने नंगा किया जा रहा है। फिल्म के पहले हिस्से में ऐसा लगा यह क्या देखने आ गए — फिल्म छोड़ कर जाने का भी विचार आया। साथ में यह भी सोचा कि जो दिखाया जा रहा है, अतिशयोक्ति के साथ ही सही, है तो सच्चाई ही। ऐसा लगा कि सलाम बॉम्बे फिर दिखाई जा रही है। अन्तर यह था कि सलाम बॉम्बे में गन्दगी दिखाने वाली हमारी अपनी मीरा नायर थीं, और यह फिल्म अंग्रेज़ निर्देशक डैनी बॉयल ने बनाई है। Continue reading स्लम-डॉग मिलियनेयर – एक समीक्षा

नव वर्ष की शुभकामनाएँ

इस सुप्त चिट्ठे पर भूले भटके आए पाठकों को नए वर्ष की शुभकामनाएँ। पिछला वर्ष विश्व-अर्थव्यवस्था की भांति इस चिट्ठे के लिए भी मंदी का ही रहा। बारह महीने में कुल जमा छः प्रविष्टियाँ, तीन मई में तीन जुलाई में। इस उम्मीद के साथ कि दोनों के लिए नया साल कुछ बढ़ोतरी लाए, एक बार फिर हैपी न्यू यियर।