जीमेल “बेटा” की शैतानियाँ

Gmail Betaजीमेल, तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? माना तुम स्वयं को बेटा* मानते हो, पर हम ने तो हमेशा से तुम्हें बड़ा माना है, और दूसरों से बढ़ कर दर्जा दिया है।

जीमेल वाले सुनें या न सुनें, पर आप सुन लीजिए। यदि आप के जीमेल में डॉट है तो उस का जीमेल वालों के लिए कोई अर्थ नहीं है। नहीं समझ में आया? बताता हूँ। अवांछित ईमेल यानी स्पैम को रोकने के मामले में तो जीमेल का शायद सानी न हो, पर मेरे खाते में कई बार कुछ अलग किस्म के अवांछित ईमेल आ जाते हैं।

पिछले साल जून में मेरे जीमेल में किन्हीं महिला का ईमेल कुछ इस तरह का आया, अनुवाद कर रहा हूँ

रमण, किसी कारण से पिछले कुछ दिनों से तुम्हारे बारे में बहुत सोचने लगी हूँ। तुम्हें मेल करने का सोचती हूँ तो यह याद आता है कि तुम कितने सुस्त हो मेल चैक करने में। तुम्हें फोन करने का सोचती हूँ तो कांपते हुए ख्याल आता है पता नहीं किस मूड में होगे – कहीं तुम मुझ पर बरस न पड़ो, या बेरुखी न दिखाओ। जब तुम ऐसा करते हो तो मेरा दिल टूट जाता है। इसलिए फोन ही नहीं करती…

यह शुरुआत थी एक लंबे चौड़े ईमेल की जो ब्लैकबेरी से भेजा गया था। बहुत मर्म भरा ईमेल था, जिस में कोशिश की गई थी एक पुराने रिश्ते को पुनर्जीवित करने की। बाकी सब तो ठीक था, मुझे यह लांछन बरदाश्त नहीं हुआ कि “ईमेल चैक करने में सुस्त हो”। 🙂 मेरे पास तो ईमेल बाद में आता है, मैं चैक पहले करता हूँ। मैं ने फौरन वापस लिखा, दो शब्दों में – “गलत रमण”। उस का भी फौरन जवाब आया, “धन्यवाद। क्षमा। मैं यकीन नहीं कर सकती कि इस नाम के दो लोग होंगे। Too much of a good thing! 🙂 Hard to believe!!” मैं ने सोचा, “थैंक यू”। दरअसल मैं भी सोचता था कि मेरा नाम इतना आम नहीं है।

बात आई गई हो गई। फिर कुछ हफ्तों बाद, मेरे जीमेल में हच कंपनी का मोबाइल बिल आया। यह किसी और रमण कौल के नाम था, जो फरीदाबाद में रहते हैं। मेरे यह हमनाम ऊपर वाले रमण कौल से अलग थे (अलग शहर)। मैं ने इस ईमेल को कचरे में डाल दिया। अगले महीने फिर आया। मैं ने हच को लिखा कि आप ग़लत ईमेल पर बिल भेज रहे हैं, मैं तो भारत में रहता भी नहीं और मैं आप का ग्राहक नहीं हूँ। उन का स्वचालित उत्तर आया कि हमें संपर्क करने के लिए धन्यवाद, आप की समस्या का समाधान शीघ्रातिशीघ्र किया जाएगा। अगले महीने फिर। फिर अगले महीने वोडाफोन का बिल आया। पता चला हच अब वोडाफोन है। इस बार मैं ने फोन नंबर देख कर भारत में अपने भाई को कहा, उस नंबर पर फोन कर के फोन के मालिक को बता दे। अगले महीने फिर बिल आया। इस बार वोडाफोन को भी लिखा, और फोन नंबर के मालिक को भी फोन लगाया। कश्मीरी में बात की – उन के फोन रिकॉर्ड से पता चल ही गया था कि जम्मू बहुत फोन जा रहे हैं, इसलिए “डालडा कश्मीरी”** नहीं हैं। मैं ने उन से कहा, “रमण जी, मैं रमण बोल रहा हूँ। यह बताइए कि आप का ईमेल पता क्या है?” बोले, “रमण डॉट कौल एट जीमेल डॉट कॉम”। मैं ने कहा यह तो मेरा जीमेल पता है। वे बोले, “अच्छा सॉरी, यह तो मेरा हॉटमेल वाला है, जीमेल वाले में डॉट नहीं है”। मैं ने कहा, “तो फिर आप अपनी मोबाइल कंपनी को फोन पर बताइए न, कि वे ग़लत पते पर बिल भेज रहे हैं”। वे बोले, “हाँ पहले भी आप का सन्देश मिला था, मैंने बताया भी था वोडाफोन को। अभी फिर फोन करता हूँ उन्हें।”

फिर और छानबीन की तो जीमेल सहायता पन्नों से यह पन्ना हाथ लगा: http://mail.google.com/support/bin/answer.py?answer=10313#

जीमेल वाले लिखते हैं,

Gmail doesn’t recognize dots as characters within usernames, adding or removing dots from a Gmail address won’t change the actual destination address. Messages sent to yourusername@gmail.com, your.username@gmail.com, and y.o.u.r.u.s.e.r.n.a.m.e@gmail.com are all delivered to your inbox, and only yours.

यानी आप के पते में कोई डॉट नहीं है, या दस डॉट हैं, जीमेल उसे एक ही पता समझता है, डॉटों को गिनता ही नहीं। यदि ऐसा है तो फिर मेरे नामराशि को बिना डॉट वाला पता कैसे मिला? कहीं ऐसा तो नहीं कि शुरू शुरू में वे डॉट को गिनते थे और बाद में गिनना बन्द किया? क्या हमें पुराना ग्राहक होने की सज़ा मिल रही है, जब जीमेल खुद को बेटा कहता था, पर था एल्फ़ा? यदि ऐसा है तो क्या मेरे ईमेल भी दूसरों को मिलते हैं? इस सब का कोई जवाब नहीं। जीमेल खुद को बेटा कहता है, इसलिए क्या उस से ज़िम्मेदारी की उम्मीद करना ग़लत है? यह कई प्रश्न हैं जिन का उत्तर नहीं है।

इस बीच हर महीने, बिना नागा, मेरे पास वोडाफ़ोन का बिल आता है। हर बार मैं उन को जवाब देता हूँ कि अपना पता ठीक करें। अपने नामराशि के हॉटमेल (डॉट के साथ) और जीमेल (बिना डॉट के) पर सीसी कर देता हूँ। जवाब में, जीमेल पर भेजा गया ईमेल मेरे खाते में वापस आ जाता है, हॉटमेल से कोई जवाब नहीं आता, और वोडाफ़ोन का स्वचालित मेल आ जाता है,

Dear Customer,
Thank you for writing to us.
This is an automated response to your e-mail. We will respond to you within 2 working days.
……
In the meantime, if you need any further assistance, please do call us on 111 (toll free) from your Vodafone mobile phone. We’ll do our best to help you.

Happy to help,
Vodafone Care

वे दो वर्किंग डेज़ कभी पूरे नहीं होते। हाँ, कस्टमर की सीक्योरिटी के लिए अब उन का बिल पासवर्ड सुरक्षित पीडीएफ़ के रूप में आता है। और पासवर्ड ईमेल में लिखा हुआ है – नाम के पहले चार अक्षर और नंबर के अन्तिम चार अंक। मेरे लिए कितना मुश्किल है इस पासवर्ड का राज़ खोलना।

क्या आप के जीमेल पते में नुक़्ता है? क्या आप में से किसी के पास जीमेल बेटा की शैतानियों के किस्से हैं? या फिर वोडाफोन के? या कोई लवलेटर आते हों? टिप्पणी कीजिए।
—-
* ग्रीक अक्षर β जिसे हम भारत में बीटा कहते हैं, अमरीकी उसे बेटा कहते हैं। बीटा- या बेटा-सॉफ़्टवेयर का अर्थ है रिलीज़ से पहले का प्रारूप, जिसे केवल टेस्टिंग के लिए रिलीज़ किया जाता है। यानी गूगल वालों के लिए पल्ला झाड़ने के लिए काफी है। पर क्या आप यह मानते हैं कि जीमेल अभी परीक्षण के अन्तर्गत है?
** मेरे एक मित्र हैं यहाँ राज़दान साहब, जो स्वयं को “डालडा कश्मीरी” कहते हैं। इस वर्ग में वे कश्मीरी पंडित आते हैं, जो कश्मीर से सदियों पहले आए हैं, और उत्तर प्रदेश, दिल्ली, मध्य प्रदेश, आदि में बस गए हैं। ये लोग कश्मीरी तो हैं, पर कश्मीरी भाषा नहीं बोलते। समय के साथ उन के रस्मो-रिवाज भी कुछ कुछ बदल गए हैं। इस वर्ग में आप कुछ प्रसिद्ध कश्मीरी परिवार जैसे नेहरू परिवार, और उन से जुड़े अन्य परिवार – शीला कौल, कैलाशनाथ काट्जू, आदि को रख सकते हैं।

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10 Comments

  1. रमण बेटा*, मेरे विचार में तुम्हें नाम बदल लेना चाहिये, वैसे भी रमण नाम हो कर भी तुम अनजानी युवतियों के संदेश पा कर भी उनके साथ रमण नहीं करते! 🙂
    बहुत दिनों के बाद तुम्हारा लिखा कुछ पढ़ा, बहुत अच्छा लगा.

  2. बहुत दिनों बाद आपको पढ कर अच्छा लगा!
    इस तरह की घटनाएं मजेदार होती हैं .. कई बार लोग ई-मेल खाते के नाम में कोई अंक जोड लेते हैं.
    टिप्पणी वाले बॉक्स की फ़ांट का आकार थोडा बढाईये कृपया.

  3. बच्चा(बेटा) जीमेल बड़ा नटखट लगता है!
    अमरीका में ज़ेड को जी बुलाते हैं ये जानता था, लेकिन नहीं पता था कि बीटा को बेटा पुकारते हैं.

  4. यह लेख पढ़कर समझ आया कि क्यों हमें एक बच्चे के नानी नानी कहते हुए मेल आते थे। हमने भी अपने नाम के बीच एक डॉट डाल दिया था। घुघूती बासूती नहीं असली वाले नाम में। अब बेटियों व पति को तुरन्त बताना पड़ेगा कि हमारी मेल नानी जी के पास भी जाती होंगी। सो उनका मनोरंजन कार्यक्रम बंद किया जाए। बताने के लिए धन्यवाद।
    वैसे यह डालडा कश्मीरी भी बढ़िया रहा। अब हम स्वयं को डालडा कुमाऊँनी (उत्तराखंडी) कहेंगे।
    घुघूती बासूती

  5. समस्या गम्भीर है। सबसे पहले तो उस बन्दे को पकड़े (दूसरे वाले रमण कौल को), उसका पता लो।
    फिर दिल्ली मे किसी किराने वाले को फोन करके, ढेर सारा सामान नोट करा दो, उसके घर के पते पर। लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए ढेर सारे दिल्ली वाले ब्लॉगर है ना।

    उसकी मोबाइल कम्पनी को ढेर सारी गाली गलौच लिखकर, कनैक्शन तुरन्त बन्द करने को कह दो। वे कर भी दे देंगे, ना करें तो एक फोन कन्ज्यूमर फोरम को कर दो। दूसरे वाले का फोन बन्द होगा तो खुद ही कल्लाएगा।

    उस बन्दी को जवाब दो, बोलो हो सकता है मै वो वाला रमण नही, जिसको आप ढूंढ रहे हो, लेकिन मिलने मे क्या हर्ज है। वो रेलवे पटरी के बगल मे लिखा रहता है ना ’एक बार मिल तो लें”

    लगातार लिखते रहे, नही किसी दिन हम लोग भी पूछने लगेंगे दिल्ली वाले रमण कौल या अमरीका वाले?

  6. हा हा!! बड़ा घोटाला है भाई जी..आप परेशान तो जरुर हुए होंगे मगर हम चाहते हैं कि आप हमेशा इस तरह की परेशानियों से दो चार होते रहें ताकि आपका लिखा पढ़ने मिलता रहे. 🙂

    मैं सिर्फ मिशिगन तक गया था वरना आपसे न मिलता, इतनी हिम्मत अब बाकी नहीं. जल्द वाशिंग्टन यात्रा होगी तो मुलाकात होगी. आपको सूचित करुँगा.

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