पहेली - बूझो तो जानें

पिछले रविवार मैं छुट्टी के मूड में सुस्ता रहा था कि मेरी छोटी बिटिया मेरे पास आई। बोली, “पापा कमाल हो गया, आप ऊपर आ कर देखिए कंप्यूटर पर क्या हो रहा है।” मैं उस की रोज़ की घिसी-पिटी अमरीकी कार्टूनों की यूट्यूब वीडियो देख देख कर तंग आ गया हूँ, इसलिए मैं ने टाल दिया, “बेटे मुझे आराम करने दो, इस समय मैं तुम्हारे कंप्यूटर के कमाल देखने के मूड में नहीं हूँ।”

बिटिया ज़बरदस्ती पकड़ कर उठाने लगी, “नहीं पापा, ऐसा लगता है किसी ने ऊपर दीदी के कमरे में कैमरा और माइक्रोफोन फिट किया है। ऐसी साइट है, उस पर जो सवाल पूछो उस का सही सही जवाब मिल जाता है।”

मैं ने तंग आ कर कहा, “अच्छा कंप्यूटर पर देखना है न? चलो यहाँ कंप्यूटर पर दिखाओ।”

“नहीं ऊपर दीदी के लैपटॉप पर, वहाँ साइट खुली हुई है।”

मैं कंप्यूटर के पास बैठ गया, “नहीं यहीं बताओ। बताओ, किस साइट पर जाना है?”

उसने साइट बताई। उस पर लिखा था ‘प्रश्न पूछिए’ और आगे एक खाली टेक्स्ट बॉक्स था। बिटिया बोली, “पूछिए ‘मैं ने किस रंग की शर्ट पहनी है?’।”

जवाब आया “मैं इस समय थका हुआ हूँ, इस समय नहीं बता सकता।”

“अरे, यह क्या? अच्छा, यह पूछिए इस कमरे में कितने लोग हैं।”

जवाब आया, “तुम मुझ पर विश्वास नहीं कर रहे, पहले मुझ पर विश्वास करो तब मैं तुम्हारे प्रश्नों के उत्तर दूँगा।”

मैं ने कहा, “देख लिया तुम्हारा कंप्यूटर का कमाल। अब छोड़ो मेरा पीछा।”

“नहीं, पापा प्लीज़, एक मिनट के लिए ऊपर आइए।”

मजबूर हो कर मैं उस के साथ ऊपर गया, साथ में श्रीमती जी भी आईं। ऊपर पहुँच कर, “दीदी, दिखाओ पापा को।”

मैं ने कहा, “अच्छा पूछो पापा ने किस रंग की शर्ट पहन रखी है।”

जवाब आया, “लाल”।

“अँय। शायद इत्तेफाक़ होगा। अच्छा पूछो, इस कमरे में कितने लोग हैं?” जवाब आया “चार”।

“देखा पापा, मैं कह नहीं रही थी? मुझे तो डर लग रहा है। लगता है यहाँ कैमरा लगा है।”

“चुप रहो ऐसा कुछ नहीं है। अच्छा पूछो, आस्था की आयु कितनी है।” जवाब आया, “तेरह साल”।

“मेरी स्कूल बस का क्या नंबर है?” बिल्कुल सही जवाब आया।

इसी तरह, और भी कई सवाल पूछे और सभी के सही जवाब। मैं चकरा गया। नीचे आकर मैं ने फिर कंप्यूटर पर चैक किया, पर वही उल्टे सीधे जवाब मिले। शाम तक मैं इसी परेशानी में रहा कि यह हो क्या रहा है। पर रात होते होते मालूम हो गया कि क्या हो रहा है। क्या आप अनुमान लगा सकते हैं, कि इस पहेली का क्या रहस्य था। टिप्प्णी के रूप में बताएँ। नहीं भी लगा सकते तो भी टिप्पणी करें। पुराना चिट्ठाकार हूँ, पर अभी गुमनामी के अन्धेरे में हूँ। आप की टिप्पणियों के उजाले की आवश्यकता है। कल इसी ब्लॉग पर इसी समय, आप को पहेली का उत्तर भी मिलेगा, और इस चमत्कारी साइट का पता भी।


“पहेली - बूझो तो जानें” पर 10 टिप्पणियाँ

  1. 1 समीर लाल

    आप और गुमनामी का अंधेरा. हद है, आपसे तो चिठ्ठा जगत है और आप ऐसी बात कर रहे हैं. बाकि आपके प्रश्न का उत्तर तो हमारे पास नहीं है कि यह कैसे हो रहा है. :)

    कल बिटिया से फोन करके पूछ सकता हूँ बस, वही बत पयेगी पापा का आन्सर. :)

  2. 2 Neeraj Rohilla

    ऐसा कुछ खेल मैंने भी कई साल पहले देखा था | उस वेबसाईट का खेल बड़ा आसान था:

    आप जब प्रश्न टाइप करते हैं तो इंटर मारने के बाद उत्तर भी टाइप कर दीजिये | इंटर मारने के बाद का टाइप किया हुआ भाग आपको दिखाई नहीं देगा लेकिन जब आपका वोही उत्तर, कंप्यूटर जी बड़े प्यार से उत्तर वाले खाने में लिख देंगे |

    आपकी वेबसाईट कोई अलग हो सकती है लेकिन कुल मिलाकर मामला इसी प्रकार का होगा…:-)

    बताइयेगा कि ऐसा ही कुछ है या फ़िर कोई और गोरखधंधा है :-)

  3. 3 जगदीश भाटिया

    मजेदार किस्सा।
    पहेली के जवाब का इंतजार रहेगा।

  4. 4 उन्मुक्त

    रमण कौल और गुमनाम - अच्छा मजाक कर लेते हैं।
    क्या पहले से कुछ जवाब लिख रखें हैं?

  5. 5 कुश

    ये तो बड़ा पेचीदा सवाल है.. जवाब का इन्तेज़ार रहेगा

  6. 6 यूनुस

    हमारे पास कल तक सिर खुजाने के सिवा बचा क्‍या है ।
    अगर आप खुद को गुमनाम कहेंगे तो हम कल के छोकरे तो अनाम बेनाम जाने क्‍या क्‍या हो जायेंगे सर जी

  7. 7 रमण कौल

    सभी टिप्पणियो के लिए धन्यवाद। नीरज जी का अनुमान सही था। हल यहाँ देखिए, और आप भी अपने मित्रों को अचंभे में डालिए।

  8. 8 काकेश

    हा हा. मजाक अच्छा करते हैं. आप गुमनाम!! बात कुछ हज़म नहीं हुई.

    मजेदार पहेली.

  9. 9 सागर नाहर

    एक पोस्ट में दो दो मजाक!
    दोनों ही बहुत बढ़िया। :)

  1. 1 कल की पहेली का हल - पीटर का कमाल : इधर उधर की

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