[बहुत समय बाद लिख रहा हूँ। पुराने साथियों तथा पाठकों से क्षमा याचना सहित।]
अगले मंगल को नॉर्थ कैरोलाइना में डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनाव होने वाले हैं, यानी अमरीकी चुनाव के लंबे खिंचते सेमी-फाइनल का एक और मुकाबला। मालूम नहीं इस बार भी इस बात का फैसला हो पाएगा या नहीं कि हिलरी क्लिंटन और बराक ओबामा में से कौन यह सेमीफाइनल जीतेगा, जो फाइनल चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी के जॉन मकेन से लड़ेगा।

यदि अमरीकी चुनाव प्रक्रिया के यह शब्द – सुपर-ट्यूज़डे, आयोवा कॉकस, न्यू-हैंपशर प्राइमेरी, रिपब्लिकन, डेमोक्रेट जैसे शब्द आप को परेशान करते हैं तो आप अकेले नहीं हैं। यदि आप की समझ में यह नहीं आ रहा कि पिछले कई महीनों से हो रहा यह चुनाव समाप्त क्यों नहीं हो रहा तो आप अकेले नहीं हैं। अमरीकी चुनाव प्रणाली है ही बड़ी पेचीदा। यदि आप को संक्षेप में समझना है कि हो क्या रहा है, तो पढ़िए यह लेख। इस में मैं अमरीकी चुनाव प्रणाली के विषय में संक्षेप में बताने का प्रयास करूँगा।

द्विदलीय प्रणाली
सब से पहली बात, यहाँ कई पश्चिमी देशों की तरह द्वि-दलीय राजनीतिक प्रणाली है। अर्थात् भारत की तरह सैंकड़ों राजनीतिक दल न हो कर यहाँ केवल दो ही राजनीतिक दल हैं – रिपब्लिकन पार्टी और डेमोक्रेटिक पार्टी। तीसरा छोटा सा दल है, ग्रीन पार्टी, पर न होने के बराबर। रिपब्लिकन पार्टी मूलतः कन्ज़र्वेटिव (परंपरावादी) है, कुछ कुछ दक्षिण-पंथी (राइट ऑफ सेंटर), हमारी बीजेपी की तरह। डेमोक्रेटिक पार्टी मूलतः लिबरल (मुक्त) है, थोड़ा सा वाम विचारों वाली, लेफ्ट ऑफ सेंटर, हमारी कांग्रेस की तरह। यूं समझिए कि केवल कांग्रेस और बीजेपी में मुकाबला है, बाकी कोई दल हैं ही नहीं। यदि आप एक रजिस्टर्ड वोटर हैं तो आप स्वयं को एक रिपब्लिकन वोटर के रूप में रजिस्टर करा सकते हैं, या डेमोक्रैटिक वोटर के रूप में, या फिर आज़ाद वोटर के रूप में। तीनों मामलों में आप फाइनल चुनाव में किसी को भी वोट दे सकते हैं। पर आप किसी एक पार्टी के रजिस्टर्ड वोटर हैं या नहीं, इस से आप की प्राइमेरी चुनाव में भागीदारी पर असर पड़ सकता है।

प्राइमरी चुनाव क्या है
प्राइमरी चुनाव, जो आजकल चल रहा है, दरअसल पार्टियों का आन्तरिक चुनाव है — पर इस की महत्ता आम चुनाव से कुछ कम नहीं, क्योंकि इस में आम जनता भाग लेती है। रिपब्लिकन पार्टी का अपना प्राइमरी चुनाव होता है, डेमोक्रेटिक पार्टी का अपना। और इन आन्तरिक या प्राइमरी चुनावों के बाद चुना जाता है उस पार्टी का राष्ट्रपति पद के लिए दावेदार। फिर नवंबर के पहले मंगलवार (1 नवंबर को छोड़ कर) को मुख्य चुनाव में इन दोनों उम्मीदवारों में से एक को चुना जाता है। प्राइमरी और मुख्य चुनावों में एक और बड़ा अन्तर यह है कि प्राइमरी चुनाव हर स्टेट के लिए अलग अलग होते हैं, अलग अलग तरीके से और अलग अलग समय पर। इसी कारण प्राइमरी चुनावों की प्रक्रिया इतनी लंबी खिच जाती है। हर राज्य का अपना कानून है, और इस कारण हर राज्य की चुनावों में महत्ता भी कम-ज़्यादा होती है। शुरू शुरू में चुनाव कराने वाले राज्य छोटे होते हुए भी किसी उम्मीदवार को अकारण ही चढ़ा सकते हैं। जब तक आधे राज्य चुनाव करा लेते हैं, आम तौर पर एक स्पष्ट उम्मीदवार उभर कर आ जाता है, और ऐसा होने पर बाद के राज्यों को प्राइमरी चुनाव कराने का आवश्यकता ही नहीं पड़ती।

रिपब्लिकन पार्टी का उम्मीदवार तो महीनों पहले तै हो गया है, पर डैमोक्रैटों की रस्साकसी अभी चल रही है। उदाहरण के तौर पर पिछले हफ्ते हुए पेन्सिलवेनिया डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनावों के बारे में कहा जा रहा था कि वहाँ 32 साल बाद प्राइमरी चुनाव कराने की ज़रूरत पड़ी है। पिछली बार 1976 में तब यहाँ प्राइमरी चुनाव महत्वपूर्ण थे, जब जिमी कार्टर को चुना गया था। अन्यथा पेन्सिलवेनिया और बाद के राज्यों का नंबर आने से पहले ही उम्मीदवार का निर्णय हो जाता है।

हर राज्य का अलग अलग कानून है, इस कारण किसी राज्य में ओपन प्राइमरी होते हैं, तो किसी में क्लोज़ड। ओपन प्राइमरी में यह होता है कि एक पार्टी का पंजीकृत वोटर दूसरी पार्टी के चुनाव में भी भाग ले सकता है। कुछ राज्यों में आज़ाद वोटर दोनों तरफ वोट डाल सकते हैं। कुछ राज्यों में आप केवल उस पार्टी के प्राइमरी चुनाव में भाग ले सकते हैं, जिस के आप पंजीकृत वोटर हैं।

तो क्या लोग सीधे उम्मीदवार को वोट देते हैं?
हाँ भी और नहीं भी। हर वोटर अपने वोट द्वारा अपने क्षेत्र के डेलीगेट (संसद सदस्य) को अधिकृत करता है, किसी एक उम्मीदवार को चुनने के लिए। यानी, उस डेलिगेट के क्षेत्र से जिस उम्मीदवार को अधिक वोट मिलते हैं, वह डेलिगेट बाद में होने वाले एक पार्टी कन्वेन्शन में उसी उम्मीदवार को वोट देता है। इस कारण हर स्टेट के प्राइमरी के बाद यह निश्चित होता है कि किस उम्मीदवार को कितने डेलिगेट मिले हैं। कुछ राज्यों में यह चुनाव सीधे वोट डाल कर होता है, और कुछ अन्य राज्यों में वोटरों की बैठक या पंचायत बुला कर, जिसे कॉकस (caucus) कहा जाता है। इस में एक और पेचीदगी यह है कि कुछ राज्यों में विनर-टेक्स-आल (winner takes all) का नियम है, यानी उस राज्य में जो जीतेगा, राज्य के सारे डेलीगेट उसी को चुनेंगे। वोटरों पर निर्भर इन वचनबद्ध (pledged) डेलिगेटों के अतिरिक्त डैमोक्रैटिक पार्टी में सुपर-डिलिगेट्स की भी प्रथा है। ये कुछ विशिष्ट शक्ति वाले पार्टी के मुख्य सदस्य हैं, जो अपनी मर्ज़ी से वोट दे सकते हैं। रिपब्लिकन पार्टी में सुपर डेलीगेट्स का नियम नहीं है।

अभी क्या हो रहा है?
रिपब्लिकन पार्टी से जॉन मकेन ने अपने निकटतम प्रतिद्वन्द्वी माइक हक्कबी को इतना पीछे छोड़ दिया कि उन की उम्मीदवारी तय है। डेमोक्रैटिक पार्टी में दोनों उम्मीदवार एक दूसरे के इतना पास चल रहे हैं कि फैसला ही नहीं हो पा रहा। अमरीका के इतिहास में पहली बार एक महिला और एक अश्वेत व्यक्ति चुनावों के इस दौर तक पहुँचे हैं। पेन्सिलवेनिया में 32 साल बाद चुनाव हुए हैं, पर वहाँ भी फैसला नहीं हो पाया। हालाँकि हिलरी क्लिंटन ने राज्य को जीत लिया, पर कुल मिला कर बराक ओबामा से आगे नहीं निकल पाई। अब अगले सप्ताह मंगल को इंडियाना और नॉर्थ कैरोलाइना की बारी है। देखिए क्या होता है।

चुनावों की समयावली
– मुख्य चुनाव दिवस 1 नवंबर के बाद के पहले मगंल को होता है, हर साल। हाँ राष्ट्रपति चुनाव हर चार साल बाद होते हैं, और इस साल भी होने हैं। बुश के दो कार्यकाल पूरे हो जाएगें, और परंपरानुसार वे तीसरी बार चुनाव में भाग नहीं ले रहे हैं। उन के दल के उम्मीदवार जॉन मकेन हैं।
– चुनावों की सरगर्मी लगभग सवा-डेढ़ साल पहले शुरू हो जाती है, जब सभी उम्मीदवार अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करते हैं। इस के साथ शुरू हो जाता है पैसा और समर्थन जुटाने का काम। जो जिनते अधिक मिलियन बटोरेगा, उस की सफलता और चयनीयता उसी हिसाब से आँकी जाएगी।
– जनवरी में पहला प्राइमरी होता है आयोवा में, यानी आयोवा कॉकस। आयोवा यूँ तो छोटा सा राज्य है, जिस के चुनाव का राष्ट्रीय स्तर पर अधिक महत्व नहीं है, पर यह महत्व इसलिए बढ़ जाता है कि यहाँ से पहला विजेता नामांकित होता है। शायद अपना यही महत्व बनाए रखने के लिए इस राज्य ने यह कानून पास किया है कि हमारा चुनाव सब से पहले होगा।
– कुछ दिन बाद ही होता है न्यू हैंपशर का प्राइमरी। यह और भी छोटा राज्य है, पर फिर जनवरी मे तीन चार राज्यों का चुनाव और होता है। अपना महत्व बढ़ाने के लिए दो और राज्यों – मिशिगन और फ्लोरिडा ने इस बार अपने प्राइमरी चुनाव आगे खिसका लिए। पर डेमोक्रेटिक पार्टी की केन्द्रीय कमान ने इस फैसले को नहीं माना, और हालाँकि चुनाव जनवरी में हो चुके हैं, इन दो राज्यों के डेलिगेटों को अभी भी नहीं गिना जा रहा है। इन की गिनती का क्या करना है, शायद अन्त में ही तय होगा।
– फिर फरवरी में आता है महामंगलवार (Super Tuesday) जिस दिन 24 राज्यों में एक साथ चुनाव होते हैं। आम तौर पर इस दिन उम्मीदवार का पता चल जाता है। पर इस बार डेमोक्रैटिक पार्टी में रेस काँटे की है।
– अप्रैल समाप्त होते होते 15-16 और राज्य हो जाते हैं। बाकी के 4-5 राज्य मई और जून में। जुलाई में आधिकारिक रूप से उम्मीदवारों की घोषणा हो जाती है, और फिर शुरू होती है असली रस्साकशी जो नवंबर में समाप्त होती है। मुख्य चुनावों के लिए भी वही डेलीगेटों की लड़ाई, और वही अलग राज्यों के अलग नियम — पर हाँ चुनाव एक ही दिन होते हैं। इस बार चुनावी मंगल 4 नवंबर को पड़ता है। देखते रहिए क्या होता है। पहली महिला राष्ट्रपति बनेगी, पहला अश्वेत बनेगा, या इन दोनों की आपसी रस्साकशी का फायदा जॉन मकेन को मिलेगा।

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2 Comments on अमरीकी चुनावी दंगल के मंगल

  1. बहुत अन्तराल के बाद दिखे लेकिन बहुत उम्दा जानकारी के साथ. बहुत आभार ज्ञानवर्धन का.

  2. Roshini says:

    Nice Post !
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