कल परसों मुझे सौभाग्य प्राप्त हुआ 2006 के सर्वश्रेष्ठ उदीयमान चिट्ठाकार (तरकश सम्मान प्राप्त) और इंडीब्लॉगीज़-2006 के सर्वोत्तम हिन्दी ब्लॉगर से मिलने का। जी हाँ, टोरोंटो की अपनी संक्षिप्त यात्रा के दौरान, मुझे उड़नतश्तरी की स्वर्ण-कलम के पीछे छिपे स्वर्णिम व्यक्तित्व के स्वामी समीर लाल जी से और उन के परिवार से उन के घर पर मिलने का मौका मिला।

कैनाडा जाने का कार्यक्रम अचानक बन गया था। मुझे और मेरी पत्नी को किसी ज़रूरी काम से वहाँ जाना पड़ा। तय हुआ कि सोमवार को यहाँ से ड्राइव कर के जाएँगे और मंगल को वापस आएँगे। कुल मिला कर 1800 किलोमीटर के करीब का सफर। कुल ड्राइविंग समय 18 घंटे। यह मेरे लिए सब से थकाने वाली यात्राओं में से था। पहले यह सफर दर्जनों बार कर चुका हूँ, पर वहाँ पहुँच कर एकाध दिन रुकना होता था। एक तरफ की यात्रा लगभग 900 किलोमीटर है, और इस बार वहाँ रात को रुकना था, सुबह उठकर एक दफ्तर में जा कर काम भी करना था, और वापसी की यात्रा भी करनी थी। इस बीच में ऐसा लग रहा था कि सब से मिल भी नहीं पाएँगे, शायद सभी काम भी न हो पाएँ। पर जैसे तैसे सब निबटाया और वापसी यात्रा आरंभ करने से पहले समीर जी से भी मिल लिए।

समीर लाल से मिल कर ऐसा नहीं लगा कि पहली बार मिल रहा हूँ। उन के लेखन से परिचित होने के कारण उन के व्यक्तित्व की भी एक झलक बनी हुई थी, और उन के चित्रों से उन्हें पहचानने में भी दिक्कत नहीं आनी थी। शायद अनजाने में भी बाज़ार आदि में मिल जाते तो मैं पहचान लेता। फिर एक विशेष आत्मीयता से भरा व्यक्तित्व और हिन्दी चिट्ठाकारी का अपनत्व। यह बात शायद ही किसी और रिश्ते में हो सकती है।

समीर लाल और रमण कौल

मैं उन चिट्ठाकारों के बारे में सोच रहा था जिन से मैं मिल चुका हूँ, और मेरा ध्यान इस बात की ओर गया कि वे लोग इंडीब्लॉगीज़ से किसी न किसी तरह से जुड़े हुए हैं। यह मेरा सौभाग्य ही समझिए कि मेरा पहला मिलन (जो कि हिन्दी चिट्ठाकारी का भी पहला मिलन था) इंडीब्लॉगीज़-2004 के विजेता अतुल अरोरा से हुआ। पिछले वर्ष पुणे की यात्रा के दौरान इंडीब्लॉगीज़-2005 के विजेता शशि सिंह से भेंट होते होते रह गई। उन से बस फोन पर बात हो पाई, और दूसरे विजेता अनूप शुक्ला से भी फोन पर ही बात हो पाई थी। पर उस की भरपाई की थी पुणे में इंडीब्लॉगीज़ के रचयिता देबाशीष से मुलाकात कर के। और अब 2006 के विजेता समीर लाल जी। 2007 के विजेता कृपया आगे आएँ। हमें अगली विज़िट प्लान करनी है।

Tags: , ,

17 Comments on एक चिट्ठाकार मिलन कैनाडा में

  1. अगली मीटिंग तय करें ताकि इंडीब्लागीस का अगला विजेता तय हो सके। विवरण पढ़कर अच्छा लगा! अब समीरलाल जी की जुबानी सुनना है!

  2. बहुत बहुत बधाई. रमण कौल जी को सर्वाधिक बधाई. हिम्मत की दाद देता हूं. भारी-भरकम व्यक्तियों से मुलाक़ात की हिम्मत जुटा लेना वाक़यी दाद के काबिल है. यह शिखर वार्ता रही किंतु वार्ता के मुख्य बिंदु क्या थे. अमेरिकी महाद्वीप में गुट बनाने के लिए क्या रणनीति तय की गई? या निर्गुट सम्मेलन की तरह औपचारिकता पूरी हो गई? इस बारे में शीघ्र पत्रकारवार्ता बुलाई जाए. निश्चिंत रहे पत्रकार आए तो गुट बना देंगे. ख़बरें खड़ी हो जाएंगी.
    अब समीर भाईसाहब क्या कहते हैं ये पठनीय होगा. इंतज़ार में..

  3. हा हा, यह भी खूब रही. २००७ में जिसे भी इंडी ब्लागीज जीतना हो, वो रमण जी सीधे संपर्क करके अगले साल मार्च से जून के बीच मिलने का समय तय कर ले.

    मजेदार वर्णन. बहुत अच्छा लगा रमण जी और भाभी जी सि मिलना.आज हम भी अपना कार्य किये देते हैं.

  4. kakesh says:

    सुबह सुबह दो महान हस्तियों के दर्शन हो गये..मजा आ गया.

  5. मैं तुरन्त कौल जी से मिलने जा रहा हूं। अगला विजेता जो बनना है 🙂

  6. pankaj bengani says:

    वाह इतनी भारी मुलाकात बडी खूबी से की आपने. मैं आपसे मिलना चाहता हुँ जल्द से जल्द 😉

  7. रवि says:

    तब तो मेरी आपकी मुलाकात संभवतः स्वर्ग में ही हो सकेगी लगता है 🙁 बू हू हू 🙁

  8. अरुण says:

    ये रमण भाई का पता देना समीर भाई अब तो आपको मिल ही चुका है मुझे कोशिश करने दो,और जरा ये भी बता देना रमण भाई को मक्खन किस डेरी का पसंद है भाई रमण जी की e:mel i.d. क्या है तुरंत बताओ मै जरा मेल करता हू कि अब अगला प्रोग्राम मेरे यहा का बनाये पंगा मत मोल ले

  9. paramjitbali says:

    आप बड़े सोभाग्य शाली है जो इतने बड़े चिट्ठाकार से मिले। विवरण पढकर अच्छा लगा।

  10. पढ़कर अच्छा लगा । और आपके मुस्कराते चेहरे देखकर यह भी पता चला कि भेंट कितनी सुखद रही होगी ।
    घुघूती बासूती

  11. सभी की टिप्पणियों के लिए धन्यवाद।
    इंडीब्लॉगीज़ 2007 मीटिंग के लिए शॉर्ट लिस्ट बननी शुरू हो गई है। उस में अपना नाम शामिल करने के लिए मुझे ईमेल भेजें, अपनी अनुदान प्रतिज्ञा के साथ। सब से बड़ी अनुदान प्रतिज्ञा वाले को चुना जाएगा। 🙂
    नीरज जी, वार्ता के मुख्य बिन्दुओं के निर्धारण का कार्यभार हम ने अपनी पत्नियों पर छोड़ा हुआ था, और समयाभाव के कारण उस सूची में चिट्ठाकारी को स्थान नहीं मिल पाया। एक दूसरे को जानने में ही समय निकल गया, और साथ में भाभी जी द्वारा बनाए स्वादिष्ट व्यंजनों की रेसिपी डिस्कस हो रही थी।
    घुघूती जी, यह हम मुस्कुरा नहीं रहे हैं। समीर जी के सुपुत्र जो फोटो खींच रहे हैं, हम से बार बार “चीज़” शब्द का उच्चारण करा रहे हैं। 🙂

  12. रमण भाई आपकी और समीर भाई की फोटो देख कर बहुत अच्छा लग रहा है,..काश हम भी मिल पाते समीर भाई से फ़िर एसे ही हम भी फ़ोटो खिंचवाते,..और अपने चिट्ठे पर लगाते,..समीर भाई कभी इंडिया भी आईये यहाँ कितने ब्लोगिये आपकी फ़िराक में बैठे है,…
    हम तो है ही आपके शिष्य आपही के पक्ष में बोलेंगे…
    दर्शन कराने हेतु रमण भाई का बहुत-बहुत धन्यवाद,..
    सुनीता(शानू)

  13. अरे वाह! जल्दबाज़ी का यह मिलन तो बहुत अप्रत्याशित खुशी देने वाला रहा होगा . पर १८०० किमी की ड्राइविंग मायने रखती है . बहुत हिम्मत का काम है .

  14. Amit says:

    चिट्ठाकार भेंटवार्ता पर बधाई, आपके वाहन चालन ने मुग्ध किया! 🙂

    2007 के विजेता कृपया आगे आएँ। हमें अगली विज़िट प्लान करनी है।

    कौल साहब, क्या केवल इंडीब्लॉगीज़ के विजेताओं से ही मिलने का ध्येय साधा है? 😉

  15. मुझे समझ नहीं आया की ये चिठ्ठाकारी क्या है, क्या सिर्फ केनेडा में ही चलती है ये विधा???

  16. munish says:

    main bahut dino se chhittha banane ki soch raha hoon, pahle orkut phir facebook, aur blog aur ab chhittha yani hindi blog banana apni pahchan banane ke liye bhi hum kya kya karte hai, bechaare prem chand ji hote to shayad itni kahaniya likh hi nahi paate, aur shayad badhiya katha kahaniya isiliye vilupt ho gayee hai.

  17. munish says:

    are bhai hindi me kyo nahi aayee meri tipanni (why my commentcome in english)

Leave a Reply