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	<title>Comments on: टैगिंग की उत्तर-पुस्तिका</title>
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	<description>इधर की ईंट उधर का रोड़ा</description>
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		<title>By: अतुल शर्मा</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-493</link>
		<dc:creator>अतुल शर्मा</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Mar 2007 06:17:36 +0000</pubDate>
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		<description>रमणजी़, इस पोस्ट से कम्प्यूटर पर हिन्दी के प्रयोग के विकास की जानकारी मिली साथ ही हिन्दी चिट्ठों की शुरुआत के बारे में भी जाना। अभी चल रहे इस टैगिंग प्रकरण के कारण आप जैसे चिट्ठा जगत के अग्रज के बारे में भी जानने को मिला।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रमणजी़, इस पोस्ट से कम्प्यूटर पर हिन्दी के प्रयोग के विकास की जानकारी मिली साथ ही हिन्दी चिट्ठों की शुरुआत के बारे में भी जाना। अभी चल रहे इस टैगिंग प्रकरण के कारण आप जैसे चिट्ठा जगत के अग्रज के बारे में भी जानने को मिला।</p>
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		<title>By: श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-492</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 03 Mar 2007 05:55:31 +0000</pubDate>
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		<description>होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं रमण जी। :P

कल शुषा फॉन्ट इस्तेमाल कर देखा। फोनेटिक तो नहीं है लेकिन कुछ कुछ उसके जैसी चीज है कीबोर्ड याद करना ज्यादा मुश्किल नहीं। पुराने समय में फोनेटिक टूल नहीं थे इसलिए उस वक्त के लिहाज से इसका कीबोर्ड बहुत सरल है।

अब तो इसका और कोई फायदा मुझे लगता नहीं सिवाय कि नॉन यूनिकोड ग्राफिक्स प्रोग्रामों के लिए ठीक है। कीबोर्ड मैप &#039;अभिव्यक्ति&#039; की साइट पर फोन्ट और कीबोर्ड मैप दिया गया है, देख देखकर टाइप किया जा सकता है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं रमण जी। <img src='http://kaulonline.com/chittha/wp-includes/images/smilies/icon_razz.gif' alt=':P' class='wp-smiley' /> </p>
<p>कल शुषा फॉन्ट इस्तेमाल कर देखा। फोनेटिक तो नहीं है लेकिन कुछ कुछ उसके जैसी चीज है कीबोर्ड याद करना ज्यादा मुश्किल नहीं। पुराने समय में फोनेटिक टूल नहीं थे इसलिए उस वक्त के लिहाज से इसका कीबोर्ड बहुत सरल है।</p>
<p>अब तो इसका और कोई फायदा मुझे लगता नहीं सिवाय कि नॉन यूनिकोड ग्राफिक्स प्रोग्रामों के लिए ठीक है। कीबोर्ड मैप &#8216;अभिव्यक्ति&#8217; की साइट पर फोन्ट और कीबोर्ड मैप दिया गया है, देख देखकर टाइप किया जा सकता है।</p>
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	</item>
	<item>
		<title>By: शुऐब &#187; अभी धागों से आज़ाद ना हुआ</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-498</link>
		<dc:creator>शुऐब &#187; अभी धागों से आज़ाद ना हुआ</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Mar 2007 11:23:34 +0000</pubDate>
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		<description>[...] बारिश होगई जैसे हमारे हरदिल अज़ीज़ रमणजी। उत्तरों का मेला है और एक दूसरे को टैग [...]</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>[...] बारिश होगई जैसे हमारे हरदिल अज़ीज़ रमणजी। उत्तरों का मेला है और एक दूसरे को टैग [...]</p>
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		<title>By: रमण कौल</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-491</link>
		<dc:creator>रमण कौल</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Mar 2007 01:22:40 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;अच्छा पुराने समय (बल्कि अब भी) कृतिदेव रेमिंगटन फॉन्ट भी बहुत चलता था। वह क्यों इतना प्रचलित हुआ होगा ?&lt;/blockquote&gt;
पक्का तो नहीं मालूम, पर शायद रेमिंगटन टाइपराइटर का लेआउट हिन्दी टाइपिस्टों को सिखाया जाता रहा होगा, जिस के कारण इसे एक तरह का मानक माना जाता रहा। फिर भारत सरकार ने इन्स्क्रिप्ट द्वारा मानकीकरण किया, जिस का कंप्यूटर पर अधिक चलन रहा। पर टाइपराइटर से कंप्यूटर पर आने वाले लोग रेमिंगटन के आदी रहे। यह मेरा अनुमान है, यदि कोई अधिक प्रकाश डाल सकें को अच्छा होगा। रवि रतलामी शायद इस बारे में अधिक जानते होंगे।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>अच्छा पुराने समय (बल्कि अब भी) कृतिदेव रेमिंगटन फॉन्ट भी बहुत चलता था। वह क्यों इतना प्रचलित हुआ होगा ?</p></blockquote>
<p>पक्का तो नहीं मालूम, पर शायद रेमिंगटन टाइपराइटर का लेआउट हिन्दी टाइपिस्टों को सिखाया जाता रहा होगा, जिस के कारण इसे एक तरह का मानक माना जाता रहा। फिर भारत सरकार ने इन्स्क्रिप्ट द्वारा मानकीकरण किया, जिस का कंप्यूटर पर अधिक चलन रहा। पर टाइपराइटर से कंप्यूटर पर आने वाले लोग रेमिंगटन के आदी रहे। यह मेरा अनुमान है, यदि कोई अधिक प्रकाश डाल सकें को अच्छा होगा। रवि रतलामी शायद इस बारे में अधिक जानते होंगे।</p>
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		<title>By: श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-490</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</dc:creator>
		<pubDate>Fri, 02 Mar 2007 00:50:05 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=119#comment-490</guid>
		<description>यह तो जानता था कि शुषा यूनीकोड नहीं है पर यह आज समझा कि वह इतना प्रचलित क्यों हुआ था, वह फोनेटिक फॉन्ट था।

यह वैसे ही है जैसे बारहा डायरेक्ट का ANSI फॉन्ट होता है। फॉन्ट चुनकर तो हिन्दी में लिखा जा सकता है लेकिन फॉन्ट बदलने पर इंग्लिश हो जाता है और जिसे भेज रहे हैं उसके पास भी वह फॉन्ट होना चाहिए। पर &lt;a href=&quot;http://epandit.blogspot.com/2006/12/how-to-type-hindi-text-in-photoshop.html&quot; rel=&quot;nofollow&quot;&gt;ग्राफिक्स प्रोग्रामों के लिए उपयोगी है&lt;/a&gt;।

अच्छा पुराने समय (बल्कि अब भी) कृतिदेव रेमिंगटन फॉन्ट भी बहुत चलता था। वह क्यों इतना प्रचलित हुआ होगा ?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>यह तो जानता था कि शुषा यूनीकोड नहीं है पर यह आज समझा कि वह इतना प्रचलित क्यों हुआ था, वह फोनेटिक फॉन्ट था।</p>
<p>यह वैसे ही है जैसे बारहा डायरेक्ट का ANSI फॉन्ट होता है। फॉन्ट चुनकर तो हिन्दी में लिखा जा सकता है लेकिन फॉन्ट बदलने पर इंग्लिश हो जाता है और जिसे भेज रहे हैं उसके पास भी वह फॉन्ट होना चाहिए। पर <a href="http://epandit.blogspot.com/2006/12/how-to-type-hindi-text-in-photoshop.html" rel="nofollow">ग्राफिक्स प्रोग्रामों के लिए उपयोगी है</a>।</p>
<p>अच्छा पुराने समय (बल्कि अब भी) कृतिदेव रेमिंगटन फॉन्ट भी बहुत चलता था। वह क्यों इतना प्रचलित हुआ होगा ?</p>
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	<item>
		<title>By: रमण कौल</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-495</link>
		<dc:creator>रमण कौल</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Mar 2007 18:07:58 +0000</pubDate>
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		<description>&lt;blockquote&gt;यह वाली बात जरा समझा सकते हैं क्या, मैं शुषा को फॉन्ट समझता था, क्या वो एक टाइपिंग सॉफ्टवेयर/टूल है ?&lt;/blockquote&gt;

श्रीश, शुषा है तो फॉण्ट ही। पर वह यूनिकोड नहीं है। यूनिकोड में विश्व की हर लिपि के अक्षरों के लिए अलग कूट बनाए गए हैं, जब कि शुषा में अंग्रेज़ी के ही अक्षरों को ले कर उन्हें बदल कर देवनागरी के अक्षर बनाए गए हैं। इस का अर्थ यह है, कि आप वर्ड या कोई भी वर्ड प्रोसेसर खोल कर लिखना शुरू कीजिए - ihMdI लिखिए, फॉण्ट शुषा चुनिए तो वह हिंदी हो जाएगा। समस्या यह थी कि यदि आप फॉण्ट को वापस Arial कर दें तो वह फिर ihMdI में बदल जाएगा। जिस को आप भेज रहे हैं, उस के पास भी शुषा होना चाहिए।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<blockquote><p>यह वाली बात जरा समझा सकते हैं क्या, मैं शुषा को फॉन्ट समझता था, क्या वो एक टाइपिंग सॉफ्टवेयर/टूल है ?</p></blockquote>
<p>श्रीश, शुषा है तो फॉण्ट ही। पर वह यूनिकोड नहीं है। यूनिकोड में विश्व की हर लिपि के अक्षरों के लिए अलग कूट बनाए गए हैं, जब कि शुषा में अंग्रेज़ी के ही अक्षरों को ले कर उन्हें बदल कर देवनागरी के अक्षर बनाए गए हैं। इस का अर्थ यह है, कि आप वर्ड या कोई भी वर्ड प्रोसेसर खोल कर लिखना शुरू कीजिए &#8211; ihMdI लिखिए, फॉण्ट शुषा चुनिए तो वह हिंदी हो जाएगा। समस्या यह थी कि यदि आप फॉण्ट को वापस Arial कर दें तो वह फिर ihMdI में बदल जाएगा। जिस को आप भेज रहे हैं, उस के पास भी शुषा होना चाहिए।</p>
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		<title>By: श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-494</link>
		<dc:creator>श्रीश शर्मा 'ई-पंडित'</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Mar 2007 17:27:14 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=119#comment-494</guid>
		<description>शुक्र है आपके चिट्ठे पर कमेन्ट होने लगी। मैं पिछले दो दिन से कोशिश कर रहा था। इस बारे में मेल भी करने वाला था।

मेरे  पहले दो मनपसंद सवालों के पुराने चिट्ठाकारों से खूब अच्छे जवाब मिल रहे हैं, मेरा टैग करना सार्थक हो रहा है। अब बस आलोक जी और देवाशीष दादा का जवाब नहीं आया।

इस पोस्ट से आपके दिए हुए पिछले कुछ लिंक पर गया और पोस्टें पढ़ी। खूब रुचिकर रहीं। तसल्ली से सब पढ़नी होंगी।

&lt;blockquote&gt;शुषा में सब से बड़ा फायदा यह था कि आप को टाइपिंग के लिए किसी बाहरी टूल की आवश्यकता नहीं थी।&lt;/blockquote&gt;
यह वाली बात जरा समझा सकते हैं क्या, मैं शुषा को फॉन्ट समझता था, क्या वो एक टाइपिंग सॉफ्टवेयर/टूल है ?</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शुक्र है आपके चिट्ठे पर कमेन्ट होने लगी। मैं पिछले दो दिन से कोशिश कर रहा था। इस बारे में मेल भी करने वाला था।</p>
<p>मेरे  पहले दो मनपसंद सवालों के पुराने चिट्ठाकारों से खूब अच्छे जवाब मिल रहे हैं, मेरा टैग करना सार्थक हो रहा है। अब बस आलोक जी और देवाशीष दादा का जवाब नहीं आया।</p>
<p>इस पोस्ट से आपके दिए हुए पिछले कुछ लिंक पर गया और पोस्टें पढ़ी। खूब रुचिकर रहीं। तसल्ली से सब पढ़नी होंगी।</p>
<blockquote><p>शुषा में सब से बड़ा फायदा यह था कि आप को टाइपिंग के लिए किसी बाहरी टूल की आवश्यकता नहीं थी।</p></blockquote>
<p>यह वाली बात जरा समझा सकते हैं क्या, मैं शुषा को फॉन्ट समझता था, क्या वो एक टाइपिंग सॉफ्टवेयर/टूल है ?</p>
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		<title>By: रमण कौल</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-496</link>
		<dc:creator>रमण कौल</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Mar 2007 15:25:48 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=119#comment-496</guid>
		<description>शैलेश जी, ईमेल द्वारा प्राप्त आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद, और यह बताने के लिए भी कि मेरे चिट्ठे पर टिप्पणी बक्सा काम नहीं कर रहा था। लगता है, नए टेंपलेट में कुछ समस्या है। उसे जब तक ठीक करूँ, तब तक पुराना टेंपलेट फिर लगा दिया है। एक बार फिर धन्यवाद।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>शैलेश जी, ईमेल द्वारा प्राप्त आप की टिप्पणी के लिए धन्यवाद, और यह बताने के लिए भी कि मेरे चिट्ठे पर टिप्पणी बक्सा काम नहीं कर रहा था। लगता है, नए टेंपलेट में कुछ समस्या है। उसे जब तक ठीक करूँ, तब तक पुराना टेंपलेट फिर लगा दिया है। एक बार फिर धन्यवाद।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: शैलेश भारतवासी</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2007/02/tagging-uttar-pustika/comment-page-1/#comment-497</link>
		<dc:creator>शैलेश भारतवासी</dc:creator>
		<pubDate>Thu, 01 Mar 2007 15:19:15 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=119#comment-497</guid>
		<description>रमण जी!
मैंने तो चिट्ठाकारी को जवान होते देखा है मगर आज जान पाया आप इसके जन्मदातों में से एक हैं।
आपलोगों ने देवनागरी में टंकण करने के लिए कितना संघर्ष किया और हम आपद्वारा यूनिनागरी नामक बनी-बनाई खिचड़ी का स्वाद ले रहे हैं।
जहाँ तक टिप्पणियों का प्रश्न है, आजकल चिट्ठाकार जिस अनुपात में बढ़े हैं शायद पाठक उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं। हम सोचते हैं कि अधिक से अधिक को पढ़ लो और विशेषकर रूप से नये चिट्ठाकारों को। विश्वास रखिए। आपका चिट्ठा बहुत लोग पढ़ते है।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रमण जी!<br />
मैंने तो चिट्ठाकारी को जवान होते देखा है मगर आज जान पाया आप इसके जन्मदातों में से एक हैं।<br />
आपलोगों ने देवनागरी में टंकण करने के लिए कितना संघर्ष किया और हम आपद्वारा यूनिनागरी नामक बनी-बनाई खिचड़ी का स्वाद ले रहे हैं।<br />
जहाँ तक टिप्पणियों का प्रश्न है, आजकल चिट्ठाकार जिस अनुपात में बढ़े हैं शायद पाठक उस अनुपात में नहीं बढ़े हैं। हम सोचते हैं कि अधिक से अधिक को पढ़ लो और विशेषकर रूप से नये चिट्ठाकारों को। विश्वास रखिए। आपका चिट्ठा बहुत लोग पढ़ते है।</p>
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