admin on December 17, 2006

नुक़्ताचीं है ग़मे दिल उस को सुनाए न बने क्या बने बात जहाँ बात बनाए न बने। जो लोग उर्दू शायरी के शौकीन नहीं हैं, उन के लिए ग़ालिब के इस शेर की थोड़ी सी व्याख्या (मेरी समझ से) – नुक़्ताचीं = नुक़्ताचीनी या आलोचना करने वाला। वह नुक्ताचीं है (हर बात पर आलोचना करता […]

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admin on December 7, 2006

यह प्रविष्टि मैं बुद्धवार की शाम को शुरू कर रहा हूँ और अभी कुछ देर में सोनी टीवी पर बिग बॉस शुरू हो रहा है। तब तक मैं यह प्रविष्टि लिख लेता हूँ। जी हाँ, मैं यह रियलिटी शो नियमित रूप से देखता हूँ। कहने में थोड़ी शर्म आ रही है, क्योंकि यह अक्लमन्दों की […]

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