चुनाव दिवस

विश्व की लार्जेस्ट डेमोक्रेसी में चुनाव हो रहे हों. या रिचेस्ट डेमोक्रेसी में, हम लोगों की रुचि तो बनी रहती है — वोट दे सकें या न दे सकें। कल सारे अमरीका में चुनाव हो रहे हैं, और मैं ने सोचा इस के विषय में कुछ सूचनाएँ स्वयं भी मालूम कर लूँ और आप से भी बांटूँ। आप पूछेंगे कौन से चुनाव हो रहे हैं भाई, अभी दो साल पहले ही तो चुनाव हुए थे, जब बुश जी दोबारा चुने गए थे? यहाँ के चुनावों की खासियत यह है कि हर साल चुनाव दिवस पर यहाँ चुनाव होते हैं। और चुनाव दिवस रहता है नवंबर के पहले सोमवार से अगला दिन — यानी इस बार 7 नवंबर को। यह दिन 2 नवंबर से ले कर 8 नवंबर वाले सप्ताह में आने वाले मंगलवार को पड़ता है।

यूँ तो राजनैतिक पदों के लिए चुनाव हर चार साल में होते हैं, पर हर साल किसी न किसी चुनाव की बारी आ ही जाती है — चाहे वह स्थानीय पदों के लिए हों, प्रादेशिक पदों के लिए हों, या राष्ट्रीय पदों के लिए यहाँ तक कि स्कूल बोर्ड के पदों के लिए भी । कुछ नहीं तो किसी न किसी और प्रस्ताव पर मत ड़ाले जाने होते हैं।

हाउस आफ रिप्रेज़ेन्टेटिव्ज़ (जैसे भारत में “लोक सभा” है) के लिए हर दो साल में चुनाव होते हैं, इस कारण यह चुनाव एक मध्यावधि चुनाव की तरह माना जाता है। इस से देश के नेता (राष्ट्रपति) का चुनाव तो नहीं होता, पर उस की सदन के ऊपर पकड़ पर काफी प्रभाव पड़ता है। “हाउस” के सदस्यों की संख्या 434 होती है, और उन का कार्यकाल केवल दो वर्ष होता है, जबकि राष्ट्रपति का चार वर्ष। सीनेट (“राज्य सभा”) के सदस्य छः साल तक बने रहते हैं, पर इस के 100 सदस्यों में से एक तिहाई सदस्य हर दो साल में सीधे चुनाव द्वारा चुने जाते हैं। फिर राष्ट्रपति का चुनाव हर चार साल में होता है। इस के अतिरिक्त किसी न किसी प्रदेश के चुनाव होने होते हैं, या नगरपालिका के, या स्कूल बोर्ड के। इस के अतिरिक्त कई तरह के प्रस्ताव होते हैं, जैसे फलाँ कानून बनाया जाए या नहीं, संविधान में फलाँ संशोधन किया जाए या नहीं, (उदाहरणतः) समलैंगिकों को विवाह की अनुमति दी जाए या नहीं, वाल्मार्ट को घुसने दिया जाए या नहीं, इस तरह के कई प्रस्ताव होते हैं, जिन पर नागरिक सीधे वोट डालते हैं। यानी चुनाव दिवस पर आम तौर पर नागरिकों को कई चीज़ो पर अपना मत व्यक्त करना होता है, और कई व्यक्तियों की किस्मत का फैसला करना होता है। यह प्रस्ताव स्थानीय स्तर पर हो सकता है, प्रादेशिक स्तर पर, या राष्ट्रीय स्तर पर। इस कारण यहाँ विभिन्न प्रदेशों में, विभिन्न नगरों में अलग अलग कानून लागू होते हैं।

कहना यह है कि हर तरह का चुनाव इसी दिन होता है, और इस से चुनाव आयोग का एक काम बच जाता है – चुनाव की तारीख तय करने का।

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8 Comments

  1. जानकारी शेयर करने के लिए आपका धन्यवाद रमणजी – आपने अपना विचार नही बताया कि इस बार कौन जीतेगा।

  2. शुएब, मुझे लगता है, आप को अपने दोस्त बुश की चिन्ता 🙂 हो रही है। पर जैसा मैं ने बताया, इस बार राष्ट्रपति चुनाव नहीं हो रहे हैं, इस कारण उन की कुर्सी को कुछ नहीं होगा, चुनाव का नतीजा कुछ भी निकले। हाँ यह क़यास लगाया जा रहा है कि संसद के दोनों सदनों में उन की रिपब्लिकन पार्टी अपना बहुमत खो देगी। जिस स्टेट में मैं रह रहा हूँ वहाँ गवर्नर (जैसे भारतीय प्रदेशों में मुख्यमन्त्री होता है, राज्यपाल नहीं) का चुनाव हो रहा है। उसके लिए दोनों पार्टियों में कांटे की टक्कर है।

  3. अच्छी जानकारी शेयर करने के लिये बधाई. चुनाव परिणाम आ जाने के बाद उसका अगले राष्ट्रपति चुनाव पर क्या असर होगा, इस विषय में अपना विश्लेषण लिखियेगा.

  4. यहाँ विभिन्न प्रदेशों में, विभिन्न नगरों में अलग अलग कानून लागू होते हैं।
    यही नही हर शहर अपनी मुद्रा भी चुन सकता है बशर्ते वो डालर में बदली जा सके। जैसे यहाँ अमेरिका में एक रामचंद्र नगर (राम के नाम से ही कुछ मिलता हुआ) है वहाँ राम मुद्रा प्रचलित है और एक राम मुद्रा का मूल्य लगभग ७ या ८ डालर है।

    रमण जी अच्छी जानकारी दी है आपने।

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