रविवार की सुबह उठते ही हम ने अपनी घड़ियों को एक घंटा पीछे किया। यह अच्छी खासी मेहनत है — कलाई की घड़ियाँ, दीवारों की घड़ियाँ, वीसीआर, माइक्रोवेव, थर्मोस्टैट, स्टीरियो, आदि यदि सब का समय ठीक करने लगें तो दर्जन भर तो हो ही जाती हैं, इसलिए काम अभी पूरा नहीं हुआ। सौभाग्य से कंप्यूटर, टीवी, फोन, आदि अपना समय स्वयं ठीक कर लेते हैं। दरअसल शनिवार और रविवार की रात के 1:59 के एक मिनट बाद दोबारा एक बजा दिया गया था।

विश्व के बहुत से भागों में हर साल में दो बार समय को बदला जाता है — अप्रैल के अन्त में घड़ियाँ एक घंटा आगे की जाती हैं, और अक्तूबर में एक घंटा पीछे। सर्दियों का समय मानक समय होता है, और गर्मियों का समय डेलाइट सेविंग टाइम कहलाया जाता है — यानी यहाँ, पूर्वी यूएस में अब हम मानक समय (ET) पर लौट आए हैं, गर्मियों में Eastern Daylight Time (EDT) पर चले जाएँगे। । इस का कारण यह बताया जाता है कि गर्मियों में धूप अधिक देर तक रहती है, और सर्दियों में कम समय तक, इस कारण गर्मियों में घड़ियों को आगे कर कुछ धूप को “बचा” (?) लिया जाता है। यानी गर्मियों में आप अपनी सुबह और रात एक घंटा जल्दी शुरू करते हैं। यह प्रथा आम तौर पर उन देशों में अपनाई जाती है जो भूमध्यरेखा से दूर हैं, क्योंकि वहाँ मौसम बदलने से दिन-रात की लंबाई पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है।

भारत में कई क्षेत्रों के स्कूलों में गर्मियों में “मॉर्निंग टाइम” कर दिया जाता है, यानी स्कूल एक-दो घंटे जल्दी खुलता है। यूँ समझिए कि बजाय स्कूलों, दफ्तरों, रेलों, हवाई जहाज़ों, आदि का समय बदलने के, घड़ियों का ही समय बदल दिया जाए।

डेलाइट सेविंग टाइम का अध्ययन करने पर कुछ बहुत ही रोचक तथ्य सामने आते हैं

1. जिन देशों ने डेलाइट सेविंग टाइम अपनाया है, वहाँ भी कई लोग इस का विरोध करते हैं। समय के साथ इस में बहुत सारे परिवर्तन हुए हैं। एक परिवर्तन यहाँ अगले साल (2007 में) किया जाना है। अगले वर्ष से ग्रीष्म-कालीन समय चार पाँच सप्ताह अधिक समय के लिए रहा करेगा — मार्च से नवंबर तक।

2. यूएस में कुछ प्रदेशों में डेलाइट सेविंग टाइम नहीं अपनाया जाता – जैसे एरिज़ोना और हवाई। तब भी एरिज़ोना के कुछ भागों – नवाहो नेशन – में इसे अपनाया जाता है। नवाहो नेशन मूल अमरीकियों (रेड इंडियन्स) का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जो एरिज़ोना के अतिरिक्त दो और प्रदेशों, यूटा और न्यू मैक्सिको, में फैला है।

3. विकीपीडिया के अनुसार भारत में भी युद्ध के समय कुछ देर तक डेलाइट सेविंग टाइम का प्रयोग किया गया है, पर यह सूचना अप्रमाणिक लगती है।

4. पाकिस्तान ने भी 2002 में कोशिश कर के देख ली, पर फिर छोड़ दिया।

5. हम तो इस रविवार की सुबह एक घंटे के लिए फिर सो गए, पर यदि आप शनिवार रात को रात की ड्यूटी पर थे तो आप की शिफ्ट एक घंटा बढ़ गई होगी। कोई बात नहीं, मार्च 2007 तक इन्तज़ार कीजिए, आप की शिफ्ट एक घंटा कम हो जाएगी।

6. अक्सर देशों में यह अभियान चलाया जाता है कि घड़ियों का समय बदलने के साथ स्मोक अलार्म के सेल भी बदलें। यह एक तरह से इस द्विवार्षिक कार्य की याद दिलाता है, और आप का स्मोक अलार्म काम करता रहता है। यह अलग बात है कि जब हमारे घरों में खाने में तड़का लगता है, तो स्मोक अलार्म को बजने से बचाने के लिए कई तिगड़में करनी पड़ती हैं।

समय-क्षेत्रों के विषय में कुछ और रोचक सूचनाएँ

1. जहाँ बांगला-देश, भारत, पाकिस्तान में आधे-आधे घंटे का समय अन्तर है, वहीं मुख्य भूखंड यूएस में (यानी हवाई और अलास्का, जो मुख्य अमरीकी भूखंड के साथ नहीं जुड़े हैं, को छोड़ कर) चार मानक समयों का प्रयोग होता है जो एक दूसरे से एक एक घंटे के अन्तर पर हैं। यानी जहाँ मैं रहता हूँ और जहाँ मिर्ची सेठ रहते हैं, उन स्थानों के बीच तीन घंटों का अन्तर है। इस के अतिरिक्त हवाई और अलास्का में दो और टाइम ज़ोन हैं, यानी पूर्वी यूएस और पश्चिमी यूएस में लगभग उतना समय अन्तर है जितना भारत और इंगलैंड में है।

2. विश्व में सब से ज़्यादा (ग्यारह) टाइम ज़ोन्स रूस में हैं। चीन ऐसा सब से बड़ा देश है जिस में एक ही समय रखा गया है, हालाँकि वहाँ 1949 से पहले पाँच समय क्षेत्र थे।

3. विश्व के अधिकांश क्षेत्रों में यूटीसी से पूरे घंटों (यानी एक, दो, दस, आदि) का अन्तर रखा जाता है, पर कई देशों में “साढ़े” घंटों का भी अन्तर है, जिन में भारत भी है। नेपाल शायद ऐसा अकेला देश है जिस में “पौने” घंटों का भी अन्तर है। इस के अतिरिक्त ऐसे कुछ क्षेत्र आस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में हैं।

4. विकीपीडिया के अनुसार मुंबई में 1955 तक शेष भारत से 39 मिनट का अन्तर था। क्या यह सही है?

बहुत हो गया, मुझे उठ कर वीसीआर का समय ठीक करना है। कहा जाता है कि जिन लोगों का तकनीकी रुझान नहीं होता उन के वीसीआर में हमेशा 12:00 बजे का समय ब्लिंक करता रहता है। मैं अपना इंप्रेशन तो ठीक कर लूँ।

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12 Comments on डेलाइट सेविंग टाइम

  1. शुऐब says:

    वो सब ठीक है रमण जी – मगर ऐसा करते क्यों हैं? मुझे शायद ऐसा दूसरी बार पता चला है – पहले भी ऐसा कहीं सुना था लेकिन आज तक किसी को नही देखा टाइम आगे पीछे करते हुए – क्षमा चाहता हूं ये किस्सा मेरी समझ से बाहर है।

  2. समय क्षेत्रों के बारे में आपने काफी रोचक तथ्य पेश किए हैं रमण जी। धन्यवाद।

  3. समस्त पश्चिमी यूरोप में भी यही होता है, मगर यहां पहले से ही मार्च से अक्टूबर तक डेलाइट सेविंग टाइम होता है, जिसकी देखादेखी अमरीका २००७ में यह करेगा। दूसरी चीज़ जो यहां है वह है DTF रेडियो संकेत द्वारा घड़ियां यह खुद ही कर लेती है। अधिकतर कलाई घड़ियों को छोड़कर बाकी सभी घड़ियों में यहां यह संकेत प्राप्त करने की क्षमता होती है। आमतौर पर यह कहा जाता है कि इससे गर्मियों की शाम में देर तक धूप रहने से बिजली की खपत में कमी आएगी, मगर कुछ पर्यावरण संस्थाओं के सर्वेक्षण से पता चला है कि यह कमी सिर्फ कुछ ०.१ % की है। हालांकि अधिकतर युवा इसे जारी रखना चाहते है ताकि वे साल में एक शनिवार रात एक धंटा अधिक पार्टी कर सकें।

  4. बढ़िया जानकारी है.

  5. Tarun says:

    जानकारी अच्छी दी है, आपके और मेरे समय में कोई अंतर नही है।

  6. Jitu says:

    बहुत अच्छी और रोचक जानकारी बताई आपने। रमण भाई, इसे सर्वज्ञ पर भी डाल दें तो बहुत अच्छा रहेगा। प्रथम पृष्ट पर “रोचक जानकारी” का लिंक देकर।

    सर जी! अब तो सर्वज्ञ को गोद ले लीजिए, बहुत दिनो से आपकी राह देख रहा है।

  7. Nitin Bagla says:

    बढिया जानकारी !!!
    हिन्दी विकीपीडिया पर भी डाल सकते हैं

  8. Punit Pandey says:

    it means people in India working with US companies will have to streach their evening working time by one more hour 🙁 Not a good thing for indian software engineers.

  9. कमाल की करामात हैं, यह भी. भारत में इस प्रकार की व्यवस्था लागु हो जाए तो?…
    सोच कर देखें, दूरदराज के गाँवो तक समय बदलना कोई हँसी खेल नहीं होगा.

  10. रमन जी बहुत ही रोचक जानकारी दी।
    धन्यवाद।

  11. Monusoft says:

    Hi,

    I would like inform you that now Hindi Comment Writer for WordPress is out. You can install this plug in and user can direclty input hindi comment from comment box instead of using Hindi IME and then copy/pasting text in comment box.

    Thank you,

  12. आज IBN-LIVE पर इस बारे में आधी अधूरी, और आधे दिमाग से तैयार खबर देखी। शर्म आई, और लगा की कम से कम वो लोग आपका चिट्ठा ही पढ़ लेते। मुझे पता नहीं लेकिन अगर आपने इस जानकारी को विकीपीडिया पर नहीं चिपकाया है तो वो भी कर ही दीजिए।

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