स्वदेश पहुँच कर सब से पहले सामना होता है ट्रैफिक से। एयरपोर्ट से निकलते ही सब से पहले घर पहुँचने के लिए गाड़ी में बैठो तो दाएँ चलते वाहनों के स्थान पर बाएँ चलते वाहन दिखाई देते हैं।

विश्व में अधिकांश देशों में यातायात सड़क के दाईं ओर चलता है, जबकि भारत समेत कई देशों में बाईं ओर। मैं अब तक यह समझता था कि यह हमें अंग्रेज़ों की साम्राज्यवादी देन है, जैसे क्रिकेट का खेल। पर आज आस्क-याहू पर देखा कि बाईं तरफ चलते यातायात का भी कोई तर्क है। विश्व मानकों के विषय पर बनी यह साइट बताती है,

पुराने ज़माने में लगभग सभी बाईं ओर ही चलते थे, क्योंकि उस समय के हिंसक समाज के लिए यही सुविधाजनक था। चूँकि आम तौर पर लोग दाहिने हाथ से काम करते हैं, तलवारबाज़ों के लिए बाएँ रहना, दाईं भुजा को प्रतिद्वन्द्वी की दिशा में रखना, और म्यान को उस से दूर रखना। इस तरह म्यान से आते हुए लोगों को टक्कर लगने का भी अन्देशा कम हो जाता था।

 इस के इलावा, घुड़सवार के लिए घोड़े पर बाईं ओर से चढ़ना भी आसान रहता था, और म्यान पहने हुए दाईं ओर चढ़ने में और मुश्किल आ सकती थी। चूँकि चढ़ना उतरना सड़क के किनारे पर ही सुरक्षित रहता है, इस कारण उतरना भी उसी तरफ रहता था।

इस साइट के अनुसार  दाईं तरफ चलने का रिवाज फ्राँस से आया और नेपोलियन की विजय पताका के साथ अन्य देशों में फैला। किसी कारणवश दाईं ओर चलने की प्रथा अधिक देशों में फैली, और आज केवल 74 देशों में यातायात बाईं ओर चलता है, जबकि शेष 166 देशों में दाईं ओर। आबादी को देखें तो बाईं ओर वाहन चलाने वाले देशों की आबादी विश्व की एक तिहाई है — उन देशों में गाड़ी चलाने वाले अधिक हैं, या अन्य देशों में, यह देखने वाली बात है। इस के इलावा शायद एक दूसरे से मिले हुए कोई दो देश ऐसे नहीं हैं, जहाँ विपरीत दिशाओं में यातायात चलता हो। उदाहरणतः इंगलैंड एक द्वीप समूह है, जिस की यूरोप के अन्य देशों से  थल सीमा नहीं मिलती। यदि एक देश से दूसरे देश गाड़ी चला कर जाने पर दिशा बदलनी पड़ती तो काफी दिलचस्प समस्याएँ पैदा होतीं।

अंग्रेज़ी में – Is right driving right, or left driving?

8 Comments on ए भाई, ज़रा देख के चलो, दाएँ ही नहीं बाएँ भी

  1. बहुत रोचक जानकारी दी हैं.

  2. […] रमण बता रहे हैं यातायात के दाएँ या बाएँ चलने के पीछे का इतिहास विश्व में अधिकांश देशों में यातायात सड़क के दाईं ओर चलता है, जबकि भारत समेत कई देशों में बाईं ओर। मैं अब तक यह समझता था कि यह हमें अंग्रेज़ों की साम्राज्यवादी देन है, जैसे क्रिकेट का खेल। पर आज आस्क-याहू पर देखा कि बाईं तरफ चलते यातायात का भी कोई तर्क है। […]

  3. इतनी दिलचस्प जानकारी के लिए धन्यवाद. पहली बार यूरोप में दायें चलने वाली ट्रैफ़िक से वास्ता पड़ा था. हालाँकि एक यात्री के रूप में ये अनुभव हासिल हुआ था, न कि चालक के रूप में…फिर भी बड़ा अटपटा-सा लगा था.

    इसी तरह ब्रिटेन में बिजली के प्लग का चक्कर पीड़ादायक रहा. भारत से जितने चार्जर वगैरह ले गया था सब दो पिन वाला था (जैसा कि यूरोप में होता है), लेकिन ब्रिटेन के प्लेग तीन पिन वाले होते हैं…वो भी तीनों चौकोर पिन !

    सेंटीग्रेड और फ़ारेनहाइट का चक्कर, किलोमीटर और मील का चक्कर, कपड़ों-जूतों के नंबर का चक्कर आदि-आदि ! पाँच साल के यूरोप प्रवास के दौरान इस तरह के बीसियों चक्करों से वास्ता पड़ा जो कि दिखाते हैं कि कितना भी ग्लोबलाइज़ेशन कर लो अलग-अलग तरह के मानक मौजूद रहेंगे.

    …और अंत में एक और मज़ेदार चक्कर का ज़िक्र है. ब्रिटेन में किसी को आपके वज़न के बारे में जानना हो तो आपसे सवाल होगा- कितने स्टोन के हो?

  4. Shrish says:

    भाईसाहब, मेरा हिन्दी ब्लॉग है hamarabenji.WordPress.com जो कि निर्माण प्रक्रिया में है, मैने ‘Options’ tab में Language भी Hindi सैट कर दी, फिर भी ब्लॉग हिन्दी में नहीं आता, मैं चाहता हुं कि Date, time आदि सभी मीनू तथा Sidebar widget जैसे कि कैलेंण्डर, फीड आदि हिन्दी में प्रदर्शित हों, क्या यह WordPress.com पर संभव है या नहीं. क्या इसके लिए HTML template modify करना होता है, जो कि मैं जानता हूं कि WordPress.com पर नहीं किया जा सकता। जरा मुझे बताइए कि आपने पूरे Blog का Layout हिन्दी में कैसे बनाया।

    अगर तरीका लंबा चॊडा है तो यदि हो सके तो मुझे इस पते पर मेल कर दें Sharma.Shrish [at] gmail.com

    एडवांस में धन्यवाद !

  5. सभी टिप्पणियों के लिए धन्यवाद।

    श्रीश जी, जहाँ तक मेरी सूचना है, यह सब wordpress.com पर तो संभव नहीं है, कम से कम अभी तो नहीं। मैं ने वर्डप्रेस को wordpress.org से डाउनलोड कर एक अलग सर्वर पर स्थापित किया है, जिस में आप अपने हिसाब से परिवर्तन कर सकते हैं। समस्या यह है कि उस में सर्वर का खर्चा अलग से आएगा, और डोमेन भी रजिस्टर कराना पड़ेगा। यदि आप यह सब करने के लिए तैयार हैं तो मैं आप को आगे का रास्ता दिखा सकता हूँ। हाँ, blogspot.com पर कुछ कस्टमाइज़ेशन संभव है।

    यदि आप पहले से चिट्ठाकार समूह के सदस्य नहीं हैं, तो उस के सदस्य बन जाएँ, वहाँ आप को इस तरह की समस्याओं का समाधान मिल सकेगा। परिचर्चा पर भी पूछ सकते हैं।

  6. says:

    मुल्ला नसीरूद्दीन दिल्ली के एम्स अस्पताल में दाखिल थे. दुर्घटना की वजह पूछने पर बताया कि अगले हफ़्ते अमेरिका जाना है. इसीलिए कार दायीं ओर चला रहा था….

    ज्ञानवर्धन जानकारी दी है.

  7. Shrish says:

    रमण जी, सहयोग के लिए धन्यवाद !

  8. Rati Saxena says:

    ramaN ji, aap videsh me jakar firkho gaye, bharat ki sarake yad hen , log nahi. chaliye koi bat nahi. kritya ko aap jaise sathiyon ki jarurat he. shubhakamanae

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