Archive for अक्तूबर, 2006

डेलाइट सेविंग टाइम

रविवार की सुबह उठते ही हम ने अपनी घड़ियों को एक घंटा पीछे किया। यह अच्छी खासी मेहनत है — कलाई की घड़ियाँ, दीवारों की घड़ियाँ, वीसीआर, माइक्रोवेव, थर्मोस्टैट, स्टीरियो, आदि यदि सब का समय ठीक करने लगें तो दर्जन भर तो हो ही जाती हैं, इसलिए काम अभी पूरा नहीं हुआ। सौभाग्य से कंप्यूटर, [...]

ज़ी टी वी का सा रे गा मा पा

यह शीर्षक तो बढ़िया बन गया — एक एक अक्षर वाले नौ शब्द।
पिछले कुछ महीनों से मेरे यहाँ देसी टीवी लौट आया है, और साथ ही लौट आया है मेरा मनपसन्द कार्यक्रम सा रे गा मा पा, जिसे मैं सोनू निगम के समय से नियमित रूप से देखता आया हूँ। इस सीज़न में चल रहा [...]

ब्लॉगजगत में रोज़ नए नए शगूफे छोड़े जाते हैं। आज यह शगूफा देखने को मिला। एक प्रश्नोत्तरी में मुझे यह परिणाम मिला

आप 80% पूंजीवादी हैं, 20% समाजवादी

आम तौर पर आप मुक्त अर्थव्यवस्था में विश्वास रखते हैं। आप को लगता है कि लोगों को अपनी रोज़ी की चिन्ता स्वयं करनी चाहिए, बुरे समय में भी। [...]

वर्डप्रेस के प्रयोक्ताओं के लिए एक चिरप्रतीक्षित समाचार - वर्डप्रेस का बहु-प्रयोक्ता संस्करण यानी मल्टी यूज़र एडिशन आ गया है। यह समाचार उन लोगों के काम का नहीं है जो wordpress.com पर चिट्ठा चला रहे हैं, बल्कि उन के लिए है जो wordpress.org से वर्डप्रेस डाउनलोड कर अपने सर्वर पर चलाते हैं, और चाहते हैं [...]

गूगल की टूटी फूटी हिन्दी

गूगल वाले वैसे तो सब कुछ सोच समझ कर ही करते हैं, पर यहाँ लगता है कि गूगल की हिन्दी प्रूफरीडर सो गई थी।
आज आलोक की ऐडसेन्स विज्ञापन वाली प्रविष्टि से टकरा कर गूगल के हिन्दी ऐडवर्ड्स विज्ञापन वाले पृष्ठ पर पहुँचा। वहाँ जो ग्राफिक गूगल ने प्रयोग किया है, वह लगता है किसी ऐसे कंप्यूटर पर बनाया [...]

स्वदेश पहुँच कर सब से पहले सामना होता है ट्रैफिक से। एयरपोर्ट से निकलते ही सब से पहले घर पहुँचने के लिए गाड़ी में बैठो तो दाएँ चलते वाहनों के स्थान पर बाएँ चलते वाहन दिखाई देते हैं।
विश्व में अधिकांश देशों में यातायात सड़क के दाईं ओर चलता है, जबकि भारत समेत कई देशों में [...]






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