इंडिक ब्लॉगर अवार्ड – कुछ कमी सी है

इंडिक ब्लॉगर अवार्ड के लगभग सभी विजेताओं ने अपने चिट्ठों पर अवार्ड के बारे में लिखा है। अखबारोंटीवी चैनलों पर घोषणाएँ हो चुकी हैं। पता चला है, मेरा नाम भी पुरस्कृत चिट्ठों में है। पर मुझे अभी भी लग रहा है कि मेरा नाम वहाँ ग़लती से लिखा गया है, और अभी तक इन्तज़ार कर रहा था कि शायद वे अपनी ग़लती समझ लें — पर वे लगता हैं मुझ से भी ज़्यादा आलसी हैं। मुझे कॉमेडियन ग्राउचो मार्क्स का कहा याद आ रहा है

I sent the club a wire stating, PLEASE ACCEPT MY RESIGNATION. I DON’T WANT TO BELONG TO ANY CLUB THAT WILL ACCEPT ME AS A MEMBER.

यानी जो क्लब इतना घटिया हो कि मुझे अपना सदस्य स्वीकार करे, मैं उस का सदस्य नहीं बनना चाहता। वरना कहाँ रवि रतलामी और डा. व्योम जैसे दिग्गज या हिन्दी ब्लॉगर जैसे नियमित चिट्ठाकार, या मेरे प्रियतम चिट्ठाकार सुनील, और कहाँ मुझ जैसा आलसी चिट्ठाकार जो महीने में रोते-धोते कुल जमा तीन चार पोस्ट लिखता हो। और उन की बात की जाए जिन का नाम मेरे स्थान पर होना चाहिए था, तो पूरा ब्लॉगरोल बन जाएगा।

चलिए आप लोग तसल्ली दे रहे हैं तो मैं मान लेता हूँ कि मेरा ब्लॉग भी इतना घटिया नहीं है, पर फिर भी इंडिक ब्लॉगर अवार्ड के आयोजन से ले कर पुरस्कार घोषणा में कुछ चीज़ें ऐसी हैं कि कुछ कमी सी लग रही है। माइक्रोसॉफ़्ट जैसी प्रोफ़ेशनल कंपनी के द्वारा आयोजित किये जाने पर भी अवार्ड इतने अन-प्रोफ़ेशनल तरीके से आयोजित हुए कि दिल खुश होना नहीं मान रहा यह अवार्ड पा कर। कुछ नुक्ते

  • अभी तक भी मुझे, और जहाँ तक मुझे मालूम है औरों को, अवार्ड्स की कोई सीधी सूचना नहीं मिली है — आप का पुरस्कार डाक द्वारा भेज दिया गया है, जैसी। हिन्दी ब्लॉगर ने 26 जून को बताया कि “…अवार्ड्स घोषित हो चुके हैं. कब हुई घोषणा पता नहीं.” तब से दो सप्ताह और हो चुके हैं, पर भाषा-इंडिया ने अभी तक ज़हमत नहीं उठाई हमें बताने की।
  • मेरे चिट्ठे को “Social Activities/Activism” श्रेणी में नवाज़ा गया है। कोई मुझे बताए कि मेरा सोशल एक्टिविज़्म से क्या लेना देना।
  • रवि का वर्तमान चिट्ठा धनाधन चल रहा है — और बेहतरीन चिट्ठे का पूरा हकदार है। रचनाकार पर भी अभूतपूर्व काम हो रहा है। पर उन को पुराने चिट्ठे पर सराहा गया। यहाँ तक कि उन के नाम के हिज्जे (Rathlami) भी ग़लत लिखे गए।
  • डा. व्योम जैसे साहित्यकार के तीस ब्लॉग हैं पर उन को उस चिट्ठे पर इनाम मिला, जिस के नाम (URL) में भी ग़लती से स्पेलिंग मिस्टेक हो गई है, और अन्य चिट्ठों के मुकाबले प्रविष्टियाँ भी कम हैं।
  • माइक्रोसॉफ़्ट वालों की नामांकन प्रणाली क्या थी, किस ने ग़लत चिट्ठे नामांकित किए, यह समझ में नहीं आ रहा; न यह समझ में आ रहा है कि उन की चयन प्रणाली कैसी थी, पुरस्कृत चिट्ठों को कितना पढ़ा गया, कितना रिसर्च किया गया। मैं ने तो अपना चिट्ठा स्वयं नामांकित किया था, फिर भी वोट देने और अन्तिम निर्णय करने वालों को धन्यवाद। लगता है, मैं ने अपने चिट्ठे पर कुछ देर तक जो “मुझे वोट दो” वाला बैनर लगा रखा था, वही काम कर गया।

बाकी अनियमितताओं का ज़िक्र अन्य चिट्ठों पर प्रविष्टियों और टिप्पणियों द्वारा हो चुका है। या यूँ समझें कि कुछ लोग जलते हैं कि उन्हें यह अवार्ड क्यों नहीं मिला। यह पोस्ट मैं ने ऐसे ही ईर्ष्यालु लोगों के लिए लिखी है। वरना, माइक्रोसॉफ़्ट वालों ने बहुत बढ़िया काम किया है :-)। कोई सुन रहा है, भाषा-इंडिया? मैं अभी तक मज़ाक कर रहा था। यार, हमारा भारत का पता तो पूछो जहाँ आप हमारा गिफ़्ट वाउचर भेजोगे?

फिलहाल हम ने इस अवार्ड को फ्रेम कर लिया है, क्या पता कल हमारा नाम रहे न रहे।

 

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8 Comments

  1. एक सत्य और बताता हूं आपको – अनूप शुक्ला जी और मैने एक चैट सेशन के दौरान बातें करते रवि भाई के नए ब्लाग को नामांकित किया था. अगर किसी ने पुराने वाले को भी नामांकित किया हो तो भाषा इंडिया वालों की कार्यशैली को ये सत्य और “फ़िशी” ही बनाता है! 🙂

  2. जब हिंदिनी पर इसकी पहले पहल घोषणा हुई तो मेरी टिप्पणी http://hindini.com/hindini/?p=112#comments यह थी –
    माइक्रोसॉफ़्ट से ये उम्मीद नहीं थी…

    इससे ज्यादा के पुरस्कार तो इंडीब्लॉग़ीज़ ने बांट दिए थे भाई!

    और, कोढ़ में खाज यह कि माइक्रोसॉफ़्ट ने ही दो बड़े पुरस्कार इंडीब्लॉगीज़ में स्पांसर किए थे!

    मुझे तो नहीं चाहिए ऐसा कोई पुरस्कार!

    बाद में भी कई टिप्पणियों में इसके कई खामियों का जिक्र किया था. मुझे शुरू से ही इस पुरस्कार आयोजन के बारे में संदेह था और अब भी है. कल ही संस्कृत ब्लॉग पुरस्कार विजेता का ईमेल मेरे पास आया कि क्या आपको कोई आधिकारिक सूचना मिली है? अगर बिल गेट्स को पता चलेगा कि उसकी कंपनी के नाम पर ऐसा अनप्रोफ़ेशनल एटीट्यूड दिखाया गया है तो वे एक सिरे से सबको फायर कर देंगे.

    अनूप भाई तथा ईस्वामी भाई आपको धन्यवाद.

  3. इन पुरस्कारों की कहानी तो “अंधेर नगरी” से भी रोचक लग रही है | अन्य भाषाओं के पुरस्कारों की क्या कहानी है ?

  4. रमण भाई,

    बहुत दिन बाद आपका ब्लाग पढ़ा। देर हो गई है फिर भी पुरस्कार मिलने पर बधाई।

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