टाइम्ज़ ऑफ इंडिया के पॉप-अप

बचपन से टाइम्ज़ ऑफ इंडिया मेरा प्रिय अखबार रहा है। कम से कम दो दशक तक हर सुबह एक कप चाय और टाइम्ज़ ऑफ इंडिया  से शुरू होती थी। यहाँ, देश से दूर इस अखबार की वेबसाइट ही इसे पढ़ने का एकमात्र साधन है। पर हद से ज़्यादा पॉप-अप विज्ञापनों के चलते इसे पढ़ना सज़ा हो जाता है। अपने पर्सनलाइज़्ड गूगल होमपेज में मैं ने  टाइम्ज़ ऑफ इंडिया  की फीड डाली हुई है, पर किसी कड़ी को क्लिक करने पर स्वयं को कोसता हूँ कि क्यों क्लिक किया। एक के बाद एक चार पॉप-अप विज्ञापन खुलते हैं, जिन्हें किसी तरह बन्द कर के अपने काम का पृष्ठ खोज निकालना पड़ता है — इन में से दो तो स्मैश-हिट्स के होते हैं जो कि बहुत ही ढ़ीठ किस्म का पॉप-अप है। फिर स्पाइवेयर का भी डर रहता है। मैं जान बूझ कर इन में से किसी का भी लिंक नहीं दे रहा हूँ, क्योंकि पॉप-अप विज्ञापनों से मुझे बड़ी कोफ़्त होती है। घर के कंप्यूटर पर तो गूगल टूलबार सारे पॉप-अप रोक देता है, पर दफ़्तर के पॉप-अप ब्लॉकर को टाइम्ज़ पछाड़ देता है।

यह समझ नहीं आ रहा कि टाइम्ज़ ऑफ इंडिया वाले इतना लालच क्यों करते हैं। शायद उन्होंने इस बात की गणना की होगी कि पॉप-अप विज्ञापनों से खीझ कर भाग जाने वाले पाठकों की अपेक्षा उन विज्ञापनों पर क्लिक करने वालों से या उन विज्ञापनों के मालिकों से ज़्यादा कमाई होती है। मैं यह मानता हूँ कि आखिरकार बात “बॉटम-लाइन” की ही होती है। पर फिर भी टाइम्ज़ ऑफ इंडिया  के स्तर की कंपनी का कुछ तो उत्तरदायित्व बनता है अपने पाठकों के प्रति।

रेडिफ से लेकर हिन्दुस्तान टाइम्ज़ सभी पॉप-अप विज्ञापनों का प्रयोग करते हैं पर मेरे अनुभव से टाइम्ज़ ऑफ इंडिया  के पॉप-अप सब से ज़्यादा हैं। ऐसे में मैं इन अखबारों के ई-पेपर पर ज़्यादा निर्भर करता हूँ, क्योंकि वहाँ पॉप-अप नहीं आते। इस के इलावा हिन्दी के अखबारों में भी कम पॉप-अप आते हैं।

हाल में कुछ ब्लॉगर बन्धुओं ने भी जाने अनजाने पॉप-अप विज्ञापन डालने शुरू कर दिए हैं। उन से भी निवेदन करूँगा कि यदि विज्ञापन डालने ही हैं तो ऐसे डालें कि वे पृष्ठ को पढ़ने में बाधक न बनें।

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7 Comments

  1. अरे! रमण जी, लगता है कि आप अभी तर इंटरनेट एक्सप्लोरर में फंसे हुए हैं.

    पॉपअप की समस्या से छुटकारा चाहते हैं तो आज ही ऑपेरा ब्राउज़र अपनाइए, और आनंद लीजिए टाइम्स का.

    एक भी पॉप अप आपकी मर्जी के बगैर नहीं खुलेगा. यह मेरा अनुभव है.

  2. अरे भैया,
    फ्री गूगल टूलबार डाउनलोड करिये, गूगल वेबसाइट पर और पाप अप भूल जाइये।

  3. रवि जी और e-shadow जी, जैसे मैं ने बताया, घर पर तो वैसे भी समस्या नहीं है, गूगल टूलबार की मेहरबानी से। पर दफ़्तर के कंप्यूटर में मुझे न गूगल टूलबार इंस्टाल करने का अधिकार है, न ऑपेरा। फिर भी ऑपेरा के बारे में बताने के लिए धन्यवाद। ट्राइ कर के देखूँगा। सुना तो बहुत है, पर क्या क्या करें? फायरफॉक्स के भी लोग गुण गाते हैं पर अभी तक कोई ठोस कारण नहीं मिला स्विच करने का।

  4. इंटरनेट एक्सप्लोरर का कौनसा वर्शन है आपके पास ?
    इंटरनेट एक्सप्लोरर वर्शन ६ भी पाप अप ब्लाकर के साथ आता है. आप इंटरनेट एक्सप्लोरर को अपग्रेड कर लिजीये.

    आशीष

  5. धन्यवाद आशीष। मैं IE6 तो प्रयोग करता हूँ, पर मेरे कहने का तात्पर्य है कि यह चूहे-बिल्ली का खेल क्यों चलता रहे। जब लोग पॉप-अप्स से इतने तंग हैं कि गूगल, याहू, और माइक्रोसॉफ्ट सभी इन को रोकने की कोशिश करते हैं तो फिर ज़िम्मेदार वेबसाइटें इन्हें परोसना क्यों नहीं बन्द करतीं।

  6. आपकी बातो को पढकर मज़ा आ गया

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