Archive for मई, 2006

हम में से शायद सभी ने बचपन में सुदर्शन की कहानी हार की जीत पढ़ी होगी। यह कहानी उन चन्द कहानियों में से है, जिन्होंने मेरे मन पर, मेरी सोच पर गहरा प्रभाव छोड़ा। (जिन्होंने यह कहानी न पढ़ी हो, उन के लिए एक अलग प्रविष्टि के रूप में मैं ने वह कहानी उपलब्ध की है।) [...]

हार की जीत

सुदर्शन लिखित हार की जीत मेरी सर्वाधिक प्रिय कहानियों में से है। किस कारणवश आज इस कहानी की याद आ गई, यह अगली पोस्ट में बताऊँगा। अभी प्रस्तुत है यह कहानी, सधन्यवाद भारत दर्शन, जहाँ यह कहानी शुषा मुद्रलिपि में मिली, और रजनीश मंगला जिनके चमत्कारी टूल ने इसे यूनिकोड में परिवर्तित किया।

हार की जीत
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मैं एकल विद्यालय संगठन के विषय में जो कहने जा रहा हूँ, उस का आजकल चल रही आरक्षण संबन्धी बहस से भी गहरा सरोकार है। हमारे हिन्दी ब्लॉगमंडल में जितने लोगों ने भी आरक्षण के विषय पर अपना मत प्रकट किया, विशेषकर आरक्षण के विरोध में लिखने वालों ने, लगभग सब ने यह कहा कि समस्या [...]

आजकल पैट्रोल के दामों के विषय में एक चेन मेल शुरू हुई है, जिस में कहा गया है कि 22 मई (या 22 सितम्बर?) को पैट्रोल का प्रयोग न करें, ताकि पैट्रोल कंपनियों को होश आ जाए। अपने अंग्रेज़ी चिट्ठे में मैं ने इस पर किए हुए शोध के परिणाम दिए हैं। आप भी पढ़ें [...]

बचपन से टाइम्ज़ ऑफ इंडिया मेरा प्रिय अखबार रहा है। कम से कम दो दशक तक हर सुबह एक कप चाय और टाइम्ज़ ऑफ इंडिया  से शुरू होती थी। यहाँ, देश से दूर इस अखबार की वेबसाइट ही इसे पढ़ने का एकमात्र साधन है। पर हद से ज़्यादा पॉप-अप विज्ञापनों के चलते इसे पढ़ना सज़ा हो जाता [...]

फडणीस के कार्टून

पिछले सप्ताह फ़ॉरवर्ड किए हुए मेलों में एक मेल आया जिस में कई सारे कार्टून थे। मुझे अच्छे लगे, विशेषकर क्योंकि ऑरिजिनल भारतीय थीम के कार्टून थे। सोचा आगे फ़ॉरवर्ड करने के बदले अपने ब्लॉग पर डाल देता हूँ — कई दिनों का सन्नाटा छंट जाएगा। पर आदत के अनुसार पहले छानबीन की। कार्टूनों के [...]






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