<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?><rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
		>
<channel>
	<title>Comments on: उर्दू ब्लॉगजगत की एक बानगी</title>
	<atom:link href="http://kaulonline.com/chittha/2006/03/urdu-blogjagat/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://kaulonline.com/chittha/2006/03/urdu-blogjagat/</link>
	<description>इधर की ईंट उधर का रोड़ा</description>
	<lastBuildDate>Fri, 30 Jul 2010 00:55:48 -0700</lastBuildDate>
	<generator>http://wordpress.org/?v=2.9.2</generator>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
		<item>
		<title>By: anunad</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2006/03/urdu-blogjagat/comment-page-1/#comment-254</link>
		<dc:creator>anunad</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Mar 2006 17:31:43 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=85#comment-254</guid>
		<description>रमण जी, इतने सूचनापरक कार्य के लिये बधाई &#124; मैं ऐसे साफ्टवेयर की तलाश कर रहा हूँ जो उर्दू को देवनागरी में परिवर्तित कर सके या सीधे ही देवनागरी में दिखा सके &#124; ऐसे साफ्टवेयर के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में आपके इस तरह के पोस्ट अत्यन्त उपयोगी होंगे &#124;</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रमण जी, इतने सूचनापरक कार्य के लिये बधाई | मैं ऐसे साफ्टवेयर की तलाश कर रहा हूँ जो उर्दू को देवनागरी में परिवर्तित कर सके या सीधे ही देवनागरी में दिखा सके | ऐसे साफ्टवेयर के अनुपलब्ध रहने की स्थिति में आपके इस तरह के पोस्ट अत्यन्त उपयोगी होंगे |</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2006/03/urdu-blogjagat/comment-page-1/#comment-253</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Mar 2006 13:35:39 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=85#comment-253</guid>
		<description>पहले तो शुक्रिया के मेरी पहली गडबड वाली टिप्पणि को संवार दिया। उर्दू ब्लॉगरों नें मुझ से ये भी पूछा के अगर उर्दू भाषा एक &quot;बाज़ारी ज़ुबान&quot; है तो फिर हिन्दू लोग इसे क्यों नहीं आपनाते और उर्दू के लिये क्यों कुछ नहीं करते? मैं ने ऐसा जवाब दिया के उन पूछने वालों की बोलती बंद होगई, अगर फुरसत मेले तो ज़रूर पढीयेगा। ये रहा इसका लिंकः http://shuaibday.blogspot.com/2005/08/blog-post_112429637215734555.html</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>पहले तो शुक्रिया के मेरी पहली गडबड वाली टिप्पणि को संवार दिया। उर्दू ब्लॉगरों नें मुझ से ये भी पूछा के अगर उर्दू भाषा एक &#8220;बाज़ारी ज़ुबान&#8221; है तो फिर हिन्दू लोग इसे क्यों नहीं आपनाते और उर्दू के लिये क्यों कुछ नहीं करते? मैं ने ऐसा जवाब दिया के उन पूछने वालों की बोलती बंद होगई, अगर फुरसत मेले तो ज़रूर पढीयेगा। ये रहा इसका लिंकः <a href="http://shuaibday.blogspot.com/2005/08/blog-post_112429637215734555.html" rel="nofollow">http://shuaibday.blogspot.com/.....34555.html</a></p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: रमण कौल</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2006/03/urdu-blogjagat/comment-page-1/#comment-252</link>
		<dc:creator>रमण कौल</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Mar 2006 12:27:26 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=85#comment-252</guid>
		<description>धन्यवाद हिन्दी ब्लॉगर और शुऐब। शुऐब, आप उन को यह भी बता सकते हैं कि हमारे यहाँ दफ़्तर के बाबू और फ़ौज के अफ़्सर से लेकर तक मुख्य मन्त्री और राष्ट्रपति तक मुसलमान हैं और रहे हैं -- यहाँ तक कि अंडरवर्ल्ड के डॉन भी। पाकिस्तान में तो अल्पसंख्कों को मतदान का भी पूरा अधिकार नहीं है। आप की जगह कोई साम्प्रदायिक मुसलमान होता तो यह भी कह सकता था कि फिक्र न करो हम उन्हें बराबर की टक्कर देते हैं।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>धन्यवाद हिन्दी ब्लॉगर और शुऐब। शुऐब, आप उन को यह भी बता सकते हैं कि हमारे यहाँ दफ़्तर के बाबू और फ़ौज के अफ़्सर से लेकर तक मुख्य मन्त्री और राष्ट्रपति तक मुसलमान हैं और रहे हैं &#8212; यहाँ तक कि अंडरवर्ल्ड के डॉन भी। पाकिस्तान में तो अल्पसंख्कों को मतदान का भी पूरा अधिकार नहीं है। आप की जगह कोई साम्प्रदायिक मुसलमान होता तो यह भी कह सकता था कि फिक्र न करो हम उन्हें बराबर की टक्कर देते हैं।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: SHUAIB</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2006/03/urdu-blogjagat/comment-page-1/#comment-251</link>
		<dc:creator>SHUAIB</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Mar 2006 09:37:56 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=85#comment-251</guid>
		<description>रमण जीः
ये पाकिस्तानी ब्लॉगर भारत के खिलाफ बहुत ज़हर उगलते हैं हालंकि वो कुछ कर नहीं सकते, फिर भी मेरी खवाहिश है के भारती उनके उर्दू ब्लॉग भी पढें और मुं तोड जवाब दें। मुझे प्रोग्रामिंग नहीं आती, और हमारे भारत में हिन्दी ब्लॉगर्स में भी बहुत सारे ऐसे प्रोग्रामर्स हैं जो ये काम कर सकते हैं बस दिलचस्पी चाहिये।

अभी परसों रात का एक किस्सा सुनें
एक होटल में खाना खा रहा था वहां चार पाकिस्तानियों से मेरी बहस होगई, मुझ से पूछने लगे किया तुम मुसलिम हो? मैं ने कहा हां। फिर कहने लगे यार भारत में हिन्दू लोग तुम मुस्लमानों का जीना हराम कर दिया है और तुम हो के सिर्फ मार खाते नहीं थकते। मैं ने जवाब दिया तुम लोग अपने अखबारों में सिर्फ हिन्दुस्तान का फसाद पढते हो वहां का भाई चारा के बारे में नहीं जानते। अब मैं उन से उलझ गया सवाल पे सवाल मारेः हमारे भारत में हिन्दू-मुसलिम फसाद आम सी बात है मगर तुम बताऔ, तुमहारे मुल्क में भार से ज़ियादा फसाद होता है, तुम शिया की मसजिद में धमाका करते हो और वो सून्नी मुसलमानों की मसजिद में। वहां कोई हिन्दू तुमहें नहीं मारता तुम खुद आपस में एक-दूसरे के दुशमन हो। मैं ने अदाकारी करते होवे कहाः हमारे भारत में हिन्दू मुसलिम लडते है और मुझे बहुत शर्म आती है के तुम मुसलमान ही आपस में लड कर मर रहे हो। वहां अरब लोग आपस में लड कर मर रहे हैं, पाकिस्तान और अफघानिसतान में तम मुसलमान-मुसलमान एक दूसरे के लिये खून के पियासे। मेरा जवाब सुन कर चारों पाकिसतानी थनडे पड गऐ।</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>रमण जीः<br />
ये पाकिस्तानी ब्लॉगर भारत के खिलाफ बहुत ज़हर उगलते हैं हालंकि वो कुछ कर नहीं सकते, फिर भी मेरी खवाहिश है के भारती उनके उर्दू ब्लॉग भी पढें और मुं तोड जवाब दें। मुझे प्रोग्रामिंग नहीं आती, और हमारे भारत में हिन्दी ब्लॉगर्स में भी बहुत सारे ऐसे प्रोग्रामर्स हैं जो ये काम कर सकते हैं बस दिलचस्पी चाहिये।</p>
<p>अभी परसों रात का एक किस्सा सुनें<br />
एक होटल में खाना खा रहा था वहां चार पाकिस्तानियों से मेरी बहस होगई, मुझ से पूछने लगे किया तुम मुसलिम हो? मैं ने कहा हां। फिर कहने लगे यार भारत में हिन्दू लोग तुम मुस्लमानों का जीना हराम कर दिया है और तुम हो के सिर्फ मार खाते नहीं थकते। मैं ने जवाब दिया तुम लोग अपने अखबारों में सिर्फ हिन्दुस्तान का फसाद पढते हो वहां का भाई चारा के बारे में नहीं जानते। अब मैं उन से उलझ गया सवाल पे सवाल मारेः हमारे भारत में हिन्दू-मुसलिम फसाद आम सी बात है मगर तुम बताऔ, तुमहारे मुल्क में भार से ज़ियादा फसाद होता है, तुम शिया की मसजिद में धमाका करते हो और वो सून्नी मुसलमानों की मसजिद में। वहां कोई हिन्दू तुमहें नहीं मारता तुम खुद आपस में एक-दूसरे के दुशमन हो। मैं ने अदाकारी करते होवे कहाः हमारे भारत में हिन्दू मुसलिम लडते है और मुझे बहुत शर्म आती है के तुम मुसलमान ही आपस में लड कर मर रहे हो। वहां अरब लोग आपस में लड कर मर रहे हैं, पाकिस्तान और अफघानिसतान में तम मुसलमान-मुसलमान एक दूसरे के लिये खून के पियासे। मेरा जवाब सुन कर चारों पाकिसतानी थनडे पड गऐ।</p>
]]></content:encoded>
	</item>
	<item>
		<title>By: Hindi Blogger</title>
		<link>http://kaulonline.com/chittha/2006/03/urdu-blogjagat/comment-page-1/#comment-250</link>
		<dc:creator>Hindi Blogger</dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Mar 2006 09:35:04 +0000</pubDate>
		<guid isPermaLink="false">http://www.kaulonline.com/chittha/?p=85#comment-250</guid>
		<description>क्या ही बढ़िया काम किया है आपने. बहुत-बहुत धन्यवाद! आगे भी उर्दू ब्लॉग जगत की जानकारी हम हिंदी पाठकों तक पहुँचाते रहें. बहुत आभारी रहूँगा.</description>
		<content:encoded><![CDATA[<p>क्या ही बढ़िया काम किया है आपने. बहुत-बहुत धन्यवाद! आगे भी उर्दू ब्लॉग जगत की जानकारी हम हिंदी पाठकों तक पहुँचाते रहें. बहुत आभारी रहूँगा.</p>
]]></content:encoded>
	</item>
</channel>
</rss>
