आप कौन सी भाषा सीख सकते हैं?

दुनिया में, ख़ास कर इंटरनेट की दुनिया में तरह तरह के व्यक्‍तित्व-परीक्षण (personality tests) मिल जाते हैं। इन में से कितने सही हैं, कितने ग़लत, यह पता नहीं। पर आज एक रोचक टेस्ट मिला — यह आप से कुछ सवाल पूछ कर बताता है कि आप कौन सी भाषा सीख सकते हैं — यह रही कड़ी। इस में एक रोचक ग्राफिक बना हुआ है, जिस में दरजन भर भाषाओं को प्रचलन और सीखने में आसानी के आधार पर रखा गया है। इस ग्राफिक में हिन्दी को अधिक प्रचलित भाषा माना गया है, और सीखने के हिसाब से कुछ मुश्किल — फिर भी चीनी जापानी जितना नहीं। खैर लगता है कि कुछ ब्लॉगरों को हिन्दी सीखने की सलाह दी जा रही है, और वे हैरान हैं — क्योंकि उन्हें हिन्दी के बारे में शायद कुछ नहीं मालूम। और मुझे चीनी (मैंडारिन) सीखने की सलाह दी गई। आप  भी देखें आप को क्या सलाह मिलती है।

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8 Comments

  1. आज तक तो मुझे लगता था कि मै हिन्दी लिख और पढ सकता हूं लेकिन ये तो मुझे हिन्दी सीखने कह रहा है 🙁

  2. लो भैया हमको भी हिन्दी सीखने को बोल रहा है। इसका मतलब कि मिर्जा सही कहता है कि “अबे सही हिन्दी तो बोल नही पाते हो, चले हो ब्लॉग लिखने”

    सांत्वना की बात ये है कि फ़्रेन्च,स्पैनिश,टर्किश,इटैलियन और पुर्तगाली भाषा सरल बता रहा है। अपने को बस इटैलियन सीखनी है, क्योंकि इटैलियन गोरिनो का अंग्रेजी मे हाथ बहुत तंग होता है।

  3. जीतू और आशीष का तो पता नहीं, पर काली और तरुण को हिन्दी सीखने की ज़रुरत लग रही है, वरना अँग्रेज़ी में क्यों लिखते? 🙂

  4. आप खुश किस्मत हैं कि आप को चीनी सीखने कि सलाह मिली – मेरी मातर भाषा उर्दू ज़ुबान है और मैं इन्टरनेट से हिन्दी सीख रहा हों मगर अभी तक टैपिंग का सही तरीका सीख नहीं पाया – पिछले 3 वर्षों से उर्दू में बलोग लिख रहा हों अब सोचा कियोंना हिन्दी भी सीख लिजाऐ – आप का किया खयाल है, किया मैं हिन्दी में सही टैप कर रहा हों? मगर मुझे हमेशा Backspace दबा कर टैप करना पडता है कियों कि अलफ़ाज़ मिल जाते हैं जैसे: इन्टर्नेट, व्ब सीट, किया खेने (किया कहने) व्गैरा (वगैरा) क्रिपया इस का कुछ हल बतायें – ब्डी (बडी) महरबानी होगी –

  5. रमण जी,

    मुझे भी हिन्दी सीखने की सलाह दी गई है। मैं सोचता था कि मुझे हिन्दी आती है।

  6. यह क्विज़ बकवास है यह तो तय है।

    शुएब भाई, जहाँ तक उर्दू के बाद हिन्दी सीखने का मसला है, उस के बारे में मुझे कुछ तजुरबा है क्योंकि मेरी बुनियादी तालीम उर्दू में हुई है। यह अलग बात है कि अब बहुत कुछ भूल गया हूँ। उर्दू की स्क्रिप्ट काफ़ी compact है, और इस में हम ज़ेर-ज़बर, आधे अक्षरों वग़ैरा की तरफ़ इतना ध्यान नहीं देते। फिर भी आप एक नौसिखिये होने के बावजूद अच्छी हिन्दी लिख लेते हैं — कुछ “हिन्दी वालों” से अच्छी। सही लिखने का राज़ तो मेरे ख्याल में यही है कि आप उर्दू वाले हिज्जे भूल कर तलफ़्फ़ुज़ का ख्याल करते हुए लिखें। मसलन “सीख रहा हों” की जगह “सीख रहा हूँ”, “मातर भाषा” की जगह “मातृभाषा”, “टैपिंग” की जगह “टाइपिंग”, “किया कहने” की जगह “क्या कहने”, “वग़ैरह” की जगह “वग़ैरा”, वग़ैरा, वग़ैरा :-)।

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