मैंने कहा था न ब्लॉगस्पॉट छोड़ते समय अपना चिट्ठा डिलीट मत करो, वरना कोई और URL हथिया लेगा। अब देखिए समाजवाद समाप्‍त हो गया तो टोमेक जी ने हथिया लिया, जिन का शायद काम ही कूड़ेदान से URL निकालने का है। चिट्ठाचर्चा निरन्तर से होते हुए चिट्ठा-विश्व पर चली गई तो उसका URL किसी शहज़ादे नवाब ने ले लिया। चलो कम से कम देसी मसौदा ही है इस पर। पर क्या कोई ताज़ा पता नहीं ले सकते थे? (ताज़ा खबर (१५ सितम्बर) : चिट्ठा चर्चा शहज़ादे नवाब से वापस ले लिया गया है। बधाई!) पता चला धरणीधर जी ने भी दुकान बन्द कर ली है। भैया, अपना URL वापिस ले लो, इस से पहले कि कोई और हथिया ले।

समाजवाद बन्द हुआ तो हमें बहुत दुख हुआ। समाजवाद के सिद्धान्तों से भले ही हमारा कोई वास्ता न रहा हो, पर बड़ी मुश्किल से तो हमारे चिट्ठे की कहीं तारीफ हुई थी। दुनिया वाले अमर सिंह को अमर सिंह मानें न मानें, हम ने तो मान लिया था।

9 Comments on मैंने कहा था न!

  1. भाई ,हमने तो चिट्ठा चर्चा को मिटाया नहीं.बल्कि मैं अब
    इसके नियमितीकरण की बात सोच रहा था.कैसे ऐसा हुआ?
    दोस्तों के पास खाते के विवरण थे.कुछ वहां से गड़बड़ /भूल
    हो गयी क्या? कैसे हुआ होगा ऐसा जरा पता किया जाये!

  2. अतुल says:

    अमरसिंह क्यो रूठे यह तो अमरसिंह जाने पर चिठ्ठा चर्चा के टेम्पलेट के साथ मेरी मेहनत भी गई पानी में। नये चिठ्ठा चर्चा पर दो महीने पुरानी प्रविष्टियों से लगता है कि पुराना वाला कुछ समय पहले शहीद हुआ है। चलिए इस पर दो मिनट का मौन रखते हैं।

  3. मेरे चिट्ठे का पता http://dharnid.blogspot.com के बजाय http://antarman.blogspot.com है। यह शायद मेरी ही गलती है। पहले कुछ दिन मैंने पहले वाला ही पता रक्खा था…पर बाद में नामकरण करने के बाद पता भी बदल दिया। कष्ट के लिये क्षमा! दस्तक देते रहिये मेरे चिट्ठे पर। और भी कुछ चिट्ठे शुरू किये हैं मैने…उनके बारे में फिर कभी लिखूंगा।

  4. भइया मौन तो वो रहे जो बोलरहा हो.कल से हम पर्याप्त दुखी हैं मुंह से बोल नहीं फूटा है.ये बात समझ में अभी तक नहीं आई कि ब्लाग कैसे खत्म हुआ? कल को क्या हमारे दूसरे ब्लाग के साथ ऐसा ही हो सकता है जिसको हमने मिटाया भी न हो?

  5. धरनीधरजी तो खुद ही अन्तर्मन पर आ गये तो पुराने टेस्ट ब्लाग को ‘मटिया’ दिया.अब ये ‘जसूसियाओ’ भाई कि हमारे चिट्ठाचर्चा का अपहरण कैसे हुआ?

  6. ravi says:

    Very sad that Original Chitta Charcha’s Content has gone. But what about similar occurances to other Blogs? Is there exists any back up plan for our blogs content? Then How to do it? What are the additional security measures we should adopt to prevent such occurences? Is simply the tough passward is enough for preventing these type of mishaps?

    Any clue?

  7. […] धरणी जी की टिप्पणी नँ ३ : और भी कुछ चिट्ठे शुरू किये हैं मैने…उनके बारे में फिर कभी लिखूंगा। […]

  8. upendra says:

    aaj maine hindi mein likha

  9. Nisha says:

    namaskar,
    i want ot write in hindi but i dont know how to write in hindi.Please send me the site or some information so that i can write in hindi on my computer.

    Dhanywad
    nisha singh

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