लोग मेरे चिट्ठे पर इस को ढ़ूँढ़ते पहुँचेंगे, मुझे अन्दाज़ा न था। पर, ऐसा हुआ है, स्टैटकाउंटर ने बताया। और वह भी जीतू भाई के एक कमेंट की बदौलत। कोई बात नहीं, आओ तो सही, चाहे जिस बहाने आओ।

वैसे यह गनीमत है कि मेरा चिट्ठा इस अनूठी गूगल खोज के चौथे पन्ने पर है। मुझ से पहले अपनी बात, मेरा पन्ना (पुराना), नुक्ताचीनी, फुरसतिया, हाँ भाई, आदि हैं।

अंजन भूषण जी ने इस मुद्दे पर साल भर पहले यह लिखा है।

3 Comments on आओ तो सही

  1. रवि says:

    हे… हे… हे…

  2. debashish says:

    Bhaiya, yeh aisa shabd hai jisse Internet chal raha hai. Internet ki duniya mein asli kamai karane ka zariya bhi yahi hai. Jitni jaldi is shabd ka mahatva smajh aa jaye utna achcha.

  3. समझ गये क्या बता रहे हैं अनुभव के धनी देबाशीष!

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