बंटी और बबली फिल्म में एक गाना है छोटे छोटे शहरों से, खाली भोर दुपहरों से, हम तो झोला उठा के चले। बारिश कम कम लगती है, नदिया मद्धम लगती है, हम समन्दर के अन्दर चले। पिछले दिनों लगता है बड़ा शहर मुम्बई वास्तव में समन्दर के अन्दर चला गया। मुम्बई और आसपास के इलाकों […]

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ये वर्ल्ड है ना वर्ल्ड, इस में दो तरह के लोग रहते हैं, एक वह जिन्होंने बंटी और बबली नहीं देखी, और दूसरे वह जिन्होंने देखी है। आज हम “दूसरे” लोगों में शामिल हुए। कई दिनों से पड़ौस की देसी वीडियो दुकान के चक्कर लग रहे थे, अब जा कर मिली है। फिल्म के गाने […]

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हमारे चिट्ठाकार मिलनों के बाद बात हो रही है, ब्लॉग सॉफ्टवेयर रचयिताओं के मिलन की, और वह भी चाट के साथ। वर्डप्रेस के मुख्य रचयिता हैं मैट मुलेनवैग और रायन बोरेन। रायन रहते हैं डलस, टैक्सस में और मैट रहते हैं हज़ारों मील दूर सैन-फ्रैंसिस्को, कैलिफोर्निया में। दोनों ने सालों से वर्डप्रेस पर इकट्ठे काम […]

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admin on July 21, 2005

लोग मेरे चिट्ठे पर इस को ढ़ूँढ़ते पहुँचेंगे, मुझे अन्दाज़ा न था। पर, ऐसा हुआ है, स्टैटकाउंटर ने बताया। और वह भी जीतू भाई के एक कमेंट की बदौलत। कोई बात नहीं, आओ तो सही, चाहे जिस बहाने आओ। वैसे यह गनीमत है कि मेरा चिट्ठा इस अनूठी गूगल खोज के चौथे पन्ने पर है। […]

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क्या आप ने इंडिया ग्लोब नामक अखबार का नाम सुना है? मैं ने भी नहीं। पर इंडिया ग्लोब नामक अखबार के पत्रकार श्री रघुबीर गोयल व्हाइट हाउस की हर प्रेस ब्रीफिंग में सामने की पंक्तियों में बैठते हैं और मौका मिलते ही सवाल दाग़ते हैं अमरीका की भारत नीति पर, या पाकिस्तान के बारे में, […]

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निरन्तर का जुलाई अंक हस्बे-मामूल (as usual) भारतीय समय के अनुसार महीने के पहले दिन का सूर्य उगने से पहले उदित हुआ है। निरन्तर के पूरे दल ने लगन से पूरा महीना काम किया और अन्त में देबाशीष ने पूरे मसौदे का समन्वय किया। निरन्तर के दल का सदस्य होने के नाते जो कुछ सृजनात्मक […]

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