किश्ती में छेद

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार :

भारत के प्रधानमंत्री ने कहा है कि कश्मीर में सीमा को ‘अर्थहीन और अप्रासंगिक’ बनाने और भारत प्रशासित कश्मीर को अधिक स्वायत्ता देने से पाकिस्तान के साथ चल रहे विवाद को सुलझाने में सहायता मिल सकती है।

मेरी प्रतिक्रिया, जो बीबीसी के पन्ने पर भी छपी है, यूँ है :

कश्मीर की सीमा को अर्थहीन बनाने का सुझाव अर्थहीन है। यह ऐसा कहने के बराबर है कि “हम अपनी कश्ती डुबो नहीं रहे हैं, केवल इस में छोटा सा छेद कर रहे हैं”। या तो दोनों देशों के बीच सारी सीमाएँ समाप्‍त करने की बात हो, जिस से पहले सारे वैमनस्य समाप्‍त होने चाहिए अन्यथा पाकिस्तान में चल रहे आतंकी कारखानों के उत्पाद को भारत को निर्यात करने का एक आसान रास्ता खुल जाएगा। फिर उसे रोकने के लिए कश्मीर और शेष भारत के बीच सीमा बांधनी पड़ेगी। यह भी सोचने की बात है कि कश्मीर के हिन्दू निवासियों के लिए कश्मीर का रास्ता बन्द है पर पाकिस्तान के निवासियों के लिए आप रास्ता खोलना चाहते हैं।

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