मेरी प्यारी पाती,

Akshargram Anugunj मुझे बहुत दुख है कि तुम अब इस दुनिया में नहीं रही। खैर जहाँ भी हो, सुखी रहो। इस दुनिया में फिर आने की तो उम्मीद छोड़ दो क्योंकि इस दुनिया में तुम्हारा स्थान ईमेल ने ले लिया है। सालों हो गए तुम्हें गुज़रे हुए। वास्तव में तुम्हारी याद तो बहुत आती है। तुम्हारे रहते ही तुम्हारी पूछ बहुत कम हो गई थी, जैसा हर किसी के साथ बुढ़ापे में होता है। लोग खबर एक दूसरे तक पहुँचाने के लिए पहले ही टेलीफोन का इस्तेमाल करने लग गए थे।

पाती लिखने के लिए कहा गया, तो मन में आया कि वास्तव में पाती ही लिखता हूँ। वही पुरानी “फूलों के रंग से, दिल की कलम से, तुझको लिखी रोज़ पाती” वाली पाती। सोचा वास्तव में चिट्ठी लिख कर उसे स्कैन करूँगा, पर देखते देखते समय निकल गया, और आसान यही लगा कि चिट्ठी तो हो नहीं पाएगी इसलिए चिट्ठा ही सही, जिस का काम भले अलग हो, नाम तो तुम से मिलता है। दिल की कलम तो तैयार थी, पर फूलों के रंग, और कोरा कागज़ ढूँढते ढूँढते समय निकल गया।

याद है जब आशिकों के बजट में कागज़, कलम और डाक-टिकट का खर्च हुआ करते थे? भूल जाओ वे दिन, अब मजनू मियाँ की जान निकल जाती है टेलीफोन का बिल भरते भरते। तुम्हारे ज़माने में जब तुम्हें आने में देर हो जाती थी तो तुम्हारे इन्तज़ार में लोग कहते थे

या खुदा क्यों उन का खत आना बन्द हुआ,
क्या मुहब्बत बन्द हुई या डाकखाना बन्द हुआ।

और अब मुझे लगता है तुम्हारे साथ साथ डाकखाने के भी दिन पूरे हो चुके हैं। याद है, तुम्हारी छोटी बहन “तार” जो छोटी होने के कारण फुर्ती से एक जगह से दूसरी जगह पहुँच जाया करती थी? आगे समाचार यह है कि तुम्हारे जाते ही उसका भी देहान्त हो गया। याद है, तारघर में कितनी लम्बी कतारें होती थीं तार भेजने के लिए? अब तारघर में तो समझो ताला ही लग गया है।

हम जैसे लोग जिन को चिट्ठी पत्री का शौक होता था, चिट्ठी का जवाब मिलने से पहले ही चिट्ठी तैयार रखते थे

कासिद के आते आते खत इक और लिख रखूँ
मैं जानता हूँ वो जो लिखेंगे जवाब मे।

पर जो भी हो, जो बात तुम में थी, वह ईमेल में नहीं। इस ईमेल के ज़रिए तुम्हें यही बताना चाहता हूँ कि तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता। कहाँ वह काग़ज़ की खुशबू, वह सलाम करने लायक लिखावट की ज़ेरो-ज़बर। भला किसी को सुना है ईमेल को चूमते हुए? फिल्म में खत हाथ में ले कर गाना गाना हो तो पहले ईमेल को प्रिंट करना पड़ेगा।

अच्छा एक बार फिर अलविदा, तुम न सही, तुम्हारी याद तो हमेशा रहेगी।

तुम्हारा
क. ख. ग.

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2 Comments on एक पाती, पाती के नाम (10वीं अनुगूँज)

  1. बढ़िया चिट्ठी लिखी है।

  2. […] ¤¤à¥à¤° बचा है. भाई रमण का यह सारगर्भित, सोचने को मजबूर करता पत्र. यह एक प्रकार सॠ[…]

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