Archive for जनवरी, 2005
लगभग सभी हिन्दी भाषी जो कविता में रुचि रखते हैं, हिन्दी संगीत में रुचि रखते हैं, किसी न किसी रूप में ग़ज़ल में भी रुचि रखते हैं। जो लोग उर्दू-दाँ नहीं भी हैं और महदी हसन, ग़ुलाम अली की गाई कुछ पेचीदा ग़ज़लें नहीं भी समझ पाते, उनके लिए पंकज उधास अवतार सरीखे आए। [...]
साइबर स्क्वैटिंग को हिन्दी में क्या कहेंगे? अनु-झोपड़पट्टी? कुछ समय पहले तक साइबर स्क्वैटिंग बहुत ही आम बीमारी थी। लोग बड़ी-बड़ी कंपनियों के डोमेन-नेम रजिस्टर करा लेते थे और बाद में उनसे अच्छी ख़ासी रक़म वसूलते थे। अब कई कानून बन गए हैं जिनसे साइबर स्क्वैटिंग करने वालों के लिए मुश्किल हो गई है पर [...]
जब कार में अकेला सफ़र कर रहा होता हूँ, विशेषकर सुबह दफ़्तर जाते और शाम को वापस आते, तो मेरी पसन्द का रेडियो स्टेशन रहता है NPR (यानी नैश्नल पब्लिक रेडियो)। शायद यही एक स्टेशन है जिस पर विज्ञापन नहीं आते, और समाचार व अन्य चर्चा दिन भर चलती रहती है। देश भर में [...]
दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद थी अब याद आया
आज मुश्किल था सम्भलना ऐ दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया
दिन गुज़ारा था बड़ी मुश्किल से
फिर तेरा वादा-ए-शब याद आया
तेरा भूला हुआ पैमान-ए-वफ़ा
मर रहेंगे अगर अब याद आया
फिर कई लोग नज़र से गुज़रे
फिर कोई शहर-ए-तरब याद [...]
बाज़ीचा-ए-अत्फ़ाल है दुनिया मेरे आगे
होता है शबो-रोज़ तमाशा मेरे आगे।
इक खेल है औरंगे-सुलेमाँ मेरे नज़दीक
इक बात है ऐजाज़े-मसीहा मेरे आगे।
जुज़ नाम नहीं सूरते-आलम मुझे मंज़ूर
जुज़ वहम नहीं हस्तिए-अशिया मेरे आगे।
होता है निहाँ गर्द में सहरा मेरे होते
घिसता है जबीं ख़ाक पे दरिया मेरे आगे।
मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे
तू देख कि [...]