Dec
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राम राम गाँव वालो। पडौस में नया आया हूँ। जब तक घर ठीक से बसा लूँ, गुड़-चीनी की ज़रूरत पड़े तो दे देना भाई लोगो। कई दिनों से इस ब्लाग-नगरी की गलियों के चक्कर लगा रहा हूँ। बड़े बड़े दिग्गज बैठे हैं डेरा जमाए। खैर इधर-उधर की हम भी हाँक ही लेंगे। अपना अन्दाज़े-बयाँ और हो या न हो,
हैं और भी दुनिया में सुख़नवर बहुत अच्छे …
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सुस्वागतम् रमण जी।